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लोकसभा में 14 और राज्यसभा में नौ विधेयक पारित

parliament-building-650_650x400_41471013712नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया और इस दौरान लोकसभा में करीब 78 प्रतिशत और राज्यसभा में करीब 80 प्रतिशत कामकाज हुआ। इस दौरान दोनों सदनों में नौ अगस्त को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष चर्चा हुई।

लोकसभा में 14 और राज्यसभा में नौ विधेयक पारित किये गये। इसी दौरान लोकसभा के छह सदस्यों को सदन की कार्यवाही बाधित करने पर पांच बैठकों के लिए निलंबित कर दिया गया। इसी सत्र के दौरान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पदों के लिए चुनाव हुए।

नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संसद के केंद्रीय कक्ष में  शपथ दिलायी गई वहीं नए उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा के सभापति एम वैकेया नायडू ने भी कार्यभार संभाला। संसद का मानसून सत्र 17 जुलाई को आरंभ हुआ था।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के पहले अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि इस सत्र में व्यवधानों और उसके कारण स्थगनों की वजह से 29 घंटे 58 मिनट का समय बर्बाद हुआ, वहीं सभा ने 10 घंटे और 36 मिनट देर तक बैठकर विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा भी की।

उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान महत्वपूर्ण वित्तीय, विधायी और अन्य कार्य निपटाये गये। वर्ष 2017-18 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों (सामान्य) और वर्ष 2014-15 के लिए अतिरिक्त अनुदान की मांगों (सामान्य) तथा इससे संबंधित विनियोग विधेयक पारित किये गये। सदन में पारित किये गये कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों में आईआईआईटी (पीपीपी) विधेयक, 2017, निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2017, कंपनी (संशोधन) विधेयक 2016, बैकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2017 और नाबार्ड (संशोधन) विधेयक, 2017 शामिल हैं।

इसके अलावा कृषि क्षेत्र की स्थिति और भीड़ द्वारा हिंसा तथा पीट-पीटकर हत्या की कथित घटनाओं से उत्पन्न स्थिति के विषयों पर अल्पकालिक चर्चाएं भी हुईं। इसके अलावा  ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से देश के विभिन्न भागों में बाढ़ के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।मानसून सत्र में 380 तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध किये गये जिनमें से 63 प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिये गये। सदस्यों ने शून्यकाल में लोक महत्व के करीब 252 मुद्दे उठाए। संसद की स्थायी समितियों ने 44 रिपोर्ट पेश कीं। इस दौरान 28 निजी विधेयक भी पेश किये गये।

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