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भंडाफोड़; कालाधन के खेल में 5800 कंपनियां

indian pm Narendra Modi rs 500 rs 1000 indian rupee illegalसरकार ने कालेधन पर कार्रवाई तेज करते हुए 6 अक्टूबर (शुक्रवार) को कहा कि उसके पास करीब 5,800 ऐसी मुखौटा कंपनियों की सूचनाएं हैं जिनके खाते में जमाराशि नगण्य थी पर नोटबंदी के बाद उनके खातों में करीब 4,574 करोड़ रुपये जमा हुए। बाद में इनमें से 4,552 करोड़ रुपये की निकासी भी की गयी।

सरकार ने आज जारी बयान में कहा, ‘‘इस साल शुरुआत में 2,09,032 संदिग्ध कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है। इनमें से कुछ कंपनियों के बैंक खातों के नोटबंदी के बाद परिचालन के बारे में 13 बैंकों ने बड़ी सूचनाएं दी हैं।’’पिछले महीने सरकार ने दो लाख से अधिक कंपनियों के बैंक खातों के परिचालन पर रोक लगा दी थी।सरकार ने कालेधन तथा मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई में इसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि पहली खेप में दो लाख से अधिक कंपनियों में से करीब 5,800 कंपनियों के 13,140 बैंक खातों के बारे में जानकारी मिली हैं।‘‘कुछ कंपनियों के नाम पर सौ से भी अधिक बैंक खाते पाये गये हैं। इनमें से एक कंपनी के नाम पर 2,134 बैंक खाते मिले हैं। कुछ कंपनियों के पास 900 और 300 बैंक खाते पाये गये हैं।’’ सरकार ने कहा कि नोटबंदी के बाद बैंक खातों और लेनदेन से संबंधी आंकड़े आश्चर्यजनक हैं। ऋण खातों को अलग करने के बाद इन कंपनियों के पास आठ नवंबर 2016 को महज 22.05 करोड़ रुपये की राशि थी।

सरकार ने बयान में कहा, ‘‘हालांकि नौ नवंबर 2016 के बाद से अब तक इन कंपनियों ने 4573.87 करोड़ रुपये जमा किये तथा इनमें से 4,552 करोड़ रुपये की निकासी कर ली गई।’’ उसने आगे कहा, ‘‘यह जानना जरूरी है कि ये आंकड़े सरकार द्वारा हटायी गयी संदिग्ध कंपनियों की कुल संख्या का महज 2.5 फीसदी है। इन कंपनियों द्वारा किया गया भारी हेर फेर भ्रष्टाचार, काला धन और गैरकानूनी कार्यों का काफी छोटा हिस्सा है।’’

13 बैंकों ने नोटबंदी के बाद विभिन्न बैंक खातों से गलत लेनदेन की बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने जानकारी दी कि उसे उन 2 लाख 9 हजार 32 संदिग्ध कंपनियों में से 5,800 कंपनियों के बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी मिल गई है जिनका रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया गया है। बैंकों ने सरकार को इन कंपनियों के 13,140 अकाउंट्स की जानकारी मुहैया कराई है।9 नवंबर 2016 के बाद से उन कंपनियों को रद्द किए जाने की तारीख तक कंपनियों ने अपने बैंक खातों में कुल मिलाकर 4,573.87 करोड़ रुपये जमा करवाए और 4,552 करोड़ रुपये निकाल भी लिए। इन कंपनियों के लोन अकाउंट्स की बात करें तो इनका ओपनिंग बैलेंस माइनस में 80.79 करोड़ रुपये है। जैसा कि पहले बताया गया है कि कंपनियों ने नोटबंदी के बाद से अथॉरिटीज को चकमा देने का काम तब तक जारी रखा जब तक कि उनके रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं कर दिए गए। सरकार ने इस बात पर हैरानी जताई है कि कुछ कंपनियों ने तो पाबंदी लगने के बाद भी पैसे जमा करने और निकालने का हौसला दिखाया। उदाहरण के तौर पर एक बैंक में 429 कंपनियों के खातों में 8 नवंबर 2016 तक एक भी पैसा नहीं था। लेकिन बाद में इन खातों के जरिए 11 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा और निकासी का काम हुआ और इन खातों के फ्रीज होने के दिन इनसे कुल 42,000 करोड़ रुपये का लेनदेन हो चुका था। एक अन्य बैंक में ऐसी 3000 से ज्यादा कंपनियों के कई-कई खाते पाए गए।

8 नवंबर तक इन खातों से 13 करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे जो पाबंदी के दिन तक बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गए। खास बात यह है कि ये आंकड़े उन संदिग्ध कंपनियों के करीब 2.5% के बराबर ही हैं जिनके रजिस्ट्रेशन सरकार ने रद्द किए हैं। इन कंपनियों और उनके सहयोगियों ने पैसा का जो बड़ा खेल खेला है, वह भ्रष्टाचार, काला धन और काली करतूतों की पर्वत श्रृंखला की एक चोटी मात्र है। सरकार ने कहा, ‘जांच एजेंसियों से समयबद्ध तरीके से जरूरी जांच पूरी करने को कहा गया है। देश और देश के ईमानदार नागरिक ज्यादा साफ-सुथरे भविष्य की कल्पना कर सकते हैं।’गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद फर्जी लेनदेन करने वाली कंपनियों पर मोदी सरकार ने शिकंजा कसा। इसके तहत, जीएसटी लागू होने से 48 घंटे पहले 1 लाख शेल कंपनियों पर ताला जड़ने की बात खुद पीएम मोदी ने कही थी। साथ ही इन कंपनियों के डायरेक्टरों पर भी फंदा कसते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।

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