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28 बैंकों के साथ फर्जीवाड़ा, 22 हजार 842 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला

CBI-books-ABG-Shipyard-its-directors-in-biggest-bank-fraud-caseबैंक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा होता है. बैंक एक ऐसी जगह है जहां आम लोग अपनी छोटी-बड़ी बचत करते हैं और भविष्य के हिसाब से योजनाएं बनाते हैं. देश में आए दिन बैंक घोटालों के मामले सामने आते रहते हैं, ऐसे में सोचिए कि आपने अपनी कमाई से पैसा बचा कर बैंक में जमा किया हो और अचानक एक दिन पता चले की आपका पैसा डूब गया. ऐसी स्थिति बैंकिंग व्यवस्था के चरमराने की वजह से होती है. देश में बैंक धोखाधड़ी का एक और सबसे बड़ा मामला सामने आया है. सीबीआई ने एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके तत्कालीन अध्यक्ष व मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषि कमलेश अग्रवाल सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. यह मुकदमा भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के एक संघ से कथित रूप से 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज किया गया है.

एजेंसी ने अग्रवाल के अलावा तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशकों – अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कथित रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आधिकारिक दुरुपयोग जैसे अपराधों के लिए मुकदमा दर्ज किया. इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा किया गया है. अधिकारी ने कहा कि कंपनी को एसबीआई के साथ ही 28 बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 2468.51 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी थी. उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि वर्ष 2012-17 के बीच आरोपियों ने कथित रूप से मिलीभगत की और अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसमें धन का दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात शामिल है. यह सीबीआई द्वारा दर्ज सबसे बड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला है.बैंक धोखाधड़ी का यह पहला मामला नहीं है. इसके पहले भी कई बैंकिंग घोटाले सामने आते रहे हैं. यहां हमने पंजाब नेशनल बैंक घोटाला और पीएमसी बैंक घोटाला समेत देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों के बारे में बताया है.

इस कंपनी ने जिन बैंकों को चूना लगाया है, उनमें देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और सबसे बड़े प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई बैंक के भी नाम हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई की जांच के घेरे में आया यह सबसे बड़ा बैंक फ्रॉड केस है. जांच एजेंसी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए एबीजी शिपयार्ड कंपनी, उसके पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल पर केस दर्ज किया है.आरोप में कहा गया है कि शिपयार्ड कंपनी ने बैंकों के कंसोर्टियम (आसान भाषा में बैंकों का समूह कह सकते हैं) के साथ धोखा किया और करोड़ों रुपये गबन कर लिए गए. पहले यह खबर आई कि बैंकों का कंसोर्टियम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुआई में बनाई गई और कंपनी को लोन दिए गए. हालांकि रविवार को समाचार एजेंसी ANI ने SBI के हवाले से एक ट्वीट में लिखा, ‘आईसीआईसीआई बैंक के नेतृत्व में 2 दर्जन से अधिक बैंकों के कंसोर्टियम व्यवस्था के तहत फाइनेंस किया गया. कंपनी के खराब प्रदर्शन के कारण उसका खाता नवंबर 2013 में एनपीए बन गया. कंपनी ऑपरेशन को फिर से चलाने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन सफल नहीं हो सके.”

SBI की सफाई

सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर आरोप लग रहे हैं कि उसने जानबूझ कर फर्जीवाड़ा केस में देरी की और मामले को लटकाए रखा. इस पर स्टेट बैंक ने सफाई दी है और कहा है कि उसने एबीजी शिपयार्ड मामले में कोई देर नहीं की और जब से फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट की शुरुआत हुई, तब से वह सीबीआई से संपर्क में है. एसबीआई ने यह भी कहा कि लगभग सभी बैंक सीबीआई से संपर्क उसी वक्त से बनाए हुए हैं. एसबीआई ने साफ कर दिया कि उसकी तह से कोई देरी नहीं हुई और बैंकों का कंसोर्टियम आईसीआईसीआई बैंक के नेतृत्व में बना था.स्टेट बैंक ने कहा है कि शिपयार्ड कंपनी को पुन: खड़ा करने की कई कोशिशें की गईं. सीडीआर मेकेनिज्म के तहत मार्च 2014 में उसे री-स्ट्रक्चर किया गया. कंसोर्टियम के सभी बैंकों ने इसमें भाग लिया. लेकिन चूंकि शिपिंग इंडस्ट्री लगातार गिरावट में है, इसलिए कंपनी को जीवित नहीं किया जा सका. एसबीईआई के मुताबिक, शिपयार्ड कंपनी ने अपने सबसे बुरे दिन दिखे और उसके ऑपरेशन को दोबारा जिंदा नहीं किया जा सका. कंपनी की री-स्ट्रक्चरिंग फेल होने के बाद इसका खाता जुलाई 2016 में एनपीए में चला गया. इस केस में फ्रॉड का जो भी मामला है वह फंड के डायवर्जन को लेकर है. बैंकों का भरोसा तोड़ने का है.

SBI के एमडी स्वामीनाथन जे ने बताया अब तक मामले में कब क्या हुआ

एबीजी शिपयार्ड धोखाधड़ी मामले पर एसबीआई के एमडी स्वामीनाथन जे ने कहा है कि एबीजी शिपयार्ड 2001 से करीब 28 बैंकों से कर्ज की सुविधाओं का फायदा ले रहा था. इसी के चलते कंपनी लंबे समय तक सस्टेन नहीं कर सकी. अव्यावहारिक ऑपरेशन के चलते कंपनी के खाते को नवंबर 2013 में एनपीए घोषित किया गया था. इसके बाद कॉर्पोरेट डेब्ट रीस्ट्रक्चरिंग मकैनिज्म (Corporate Debt Restructuring Mechanism,) के तहत बैंकों ने 2014 में कर्ज को रीस्ट्रक्चर किया और कंपनी को उसे चुकाने के लिए और समय दिया.स्वामीनाथन ने कहा कि पुनर्गठन पैकेज दो साल से अधिक समय से प्रभावी था. उस समय शिपिंग उद्योग को मंदी का सामना करना पड़ा, इसलिए कंपनी द्वारा पुनर्गठन के लिए दिए गए अनुमानों को हासिल नहीं किया जा सका. 2016 में खाते को 2013 से प्रभावी एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया गया था. स्वामीनाथन ने ये भी कहा कि लीड बैंक ICICI द्वारा एक ऑडिट का आदेश दिया गया था और रिपोर्ट 2019 में आई थी. जिसमें संबंधित पार्टियों को धन के हस्तांतरण और अन्य उद्देश्यों के लिए धन के उपयोग का संकेत दिया गया था. चर्चा के बाद 2019 में सभी बैंकों ने अकाउंट को फ्रॉड घोषित कर दिया.स्वामीनाथन के मुताबिक सबसे बड़ा पीएसबी होने के नाते एसबीआई को अन्य बैंकों द्वारा सीबीआई शिकायत दर्ज करने के लिए अधिकृत किया गया था. पहली शिकायत नवंबर 2019 में दर्ज की गई थी. दिसंबर 2021 में एक कम्प्रीहेन्सिव कंप्लेन दर्ज की गई थी. यह आम तौर पर बड़े स्तर के कॉर्पोरेट कर्ज के संबंध में होता है. मुझे कोई देरी नहीं दिख रही है, यह 2013 से एनपीए है.स्वामीनाथन जे के मुताबिक हम जितना संभव हो उतना हासिल करने का लक्ष्य रखेंगे. ऐसे मामलों के लिए पूरी तरह से प्रावधान किया गया है. इसलिए किसी भी बैंक या लाभ/हानि खातों के बैलेंस शीट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. करीब 22,842 करोड़ रुपये के एबीजी शिपयार्ड घोटाला मामले में सीबीआई अब तक 8 लोगों पर FIR दर्ज कर चुकी है. 28 बैंकों के समूह को इस कंपनी ने चूना लगाया है. बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटाले पर अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी बात कही है.

विजय माल्या का 9000 करोड़ रुपये का घोटाला

शराब कारोबारी और बैंकों से कर्ज लेकर फरार विजय माल्या के खिलाफ 9000 करोड़ रुपये के फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से बार-बार समन किए जाने के बावजूद माल्या अब तक पेश नहीं हुए. कुछ दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आखिरी बार कार्ट में पेश होने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. हालांकि, बैंकों ने अब तक अपना काफी रकम रिकवर कर लिया है. एक खबर के मुताबिक कर्ज देने वाले बैंकों ने अब तक अपना 81 फीसदी पैसा रिकवर कर लिया है. इसका मतलब है कि अब केवल 19 फीसदी रकम की वसूली बाकी है.

पंजाब नेशनल बैंक घोटाला

नीरव मोदी का पंजाब नेशनल बैंक घोटाला आप सबको याद ही होगा. नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर 13500 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की धोखाधड़ी का आरोप है. यह फ्रॉड इन्‍होंने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में किया और फरार हो गए. इस घोटाले में नीरव मोदी के अलावा उनकी पत्नी ऐमी, भाई निशाल, और चाचा मेहुल चोकसी मुख्य अभियुक्त हैं. यह उस समय भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला था.

वीडियोकॉन घोटाला

मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला जनवरी 2019 में दर्ज हुआ था. इसमें आरोप था कि ICICI बैंक और वीडियोकॉन ग्रुप के बीच जो डील हुई है उसमें मनी लॉन्ड्रिंग की गई है. ICICI बैंक और वीडियोकॉन के शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने प्रधानमंत्री, रिजर्व बैंक और सेबी को एक खत लिखकर वीडियोकॉन के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत और ICICI की सीईओ व एमडी चंदा कोचर पर एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था. इसमें दावा है कि धूत की कंपनी वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक से 3250 करोड़ रुपये करोड़ रुपये का लोन दिया गया और इसके बदले धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की वैकल्पिक ऊर्जा कंपनी ‘न्यूपॉवर’ में अपना पैसा निवेश किया.ईडी का आरोप है कि चंदा कोचर की अध्यक्षता वाली आईसीआईसीआई बैंक की एक समिति ने वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को 300 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी दी, और कर्ज जारी करने के अगले दिन वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज ने आठ सितंबर 2009 को 64 करोड़ रुपये न्यूपॉवर रिन्यूएबल प्राइवेट लिमिटेड (एनआरपीएल) को हस्तांतरित किए. एनआरपीएल के मालिक दीपक कोचर हैं. CBI ने 22 जनवरी, 2019 को मामला दर्ज कर दीपक कोचर, चंदा कोचर, वेणुगोपाल धूत और उनकी संबंधित फर्मों के खिलाफ जांच शुरू की थी.

पीएमसी बैंक घोटाला

पंजाब व महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक में एक बड़ा घोटाला सामने आया था. साल 2019 में पीएमसी बैंक में 4 हजार 355 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला हुआ था, जिसके मुख्य आरोपी बैंक के डायरेक्टर दलजीत सिंह बल थे. इस बैंक स्कैम की जांच महाराष्ट्र इकोनॉमिक्स ऑफेंस विंग (EOW) कर रही थी. सितंबर 2019 में, एक व्हिसल-ब्लोअर की मदद से आरबीआई को पता चला कि PMC बैंक मुंबई के एक रियल इस्टेट डेवलेपर को क़रीब 6500 करोड़ रूपये लोन देने के लिए नकली बैंक खातों का उपयोग कर रहा है. जानकारी सामने आते ही लाखों बैंकधारकों को एहसास हो गया था कि उनकी मेहनत की कमाई घोटाले के कारण फंस गई है. पीएमसी बैंक को संकट से बचाने के लिए आरबीआई ने सितंबर 2019 को पैसे निकालने पर मोरेटोरियम लगा दी थी यानी निकासी की सीमा निर्धारित कर दी थी.

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