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ACP अनुज कुमार ने सुनाई आपबीती- वे हजारों में थे, हम सिर्फ 200

delhi_violence_acp_20073053_132916917दिल्ली में तीन दिन लगातार हुई हिंसा में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है जिसमें दिल्ली पुलिस का हेड कांस्टेबल रतन लाल शहीद हो गए। हिंसा के दौरान सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अनुज कुमार भी घायल हुए थे और उन्होंने बताया कि कैसे भीड़ ने उन्हें घेर लिया था। इस भीड़ के पथराव में ही डीसीपी शाहदरा गंभीर रूप से घायल हो गए थे और हेड कांस्टेबल रतन लाल शहीद हो गए थे। घायल एसीपी ने 24 फरवरी की घटना को याद करते हुए बताया कि प्रदर्शनकारियों के पथराव के चलते फोर्स बिखर गई थी। इस बीच डीसीपी सर मेरे से पांच छह मीटर दूर चल गए थे और डिवाइडर के पास बेहोशी की हालत में थे और उनके मुंह से खून आ रहा था। उन्होंने कहा कि जब हम प्रदर्शनकारियों के पथराव का सामना कर रहे थे तब रतन लाल भी हमारे साथ थे। मैंने देखा था रतन लाल को चोट लगी है और उसे दूसरा स्टाफ नर्सिंग होम में लेकर गया था। हम वहां से अपनी गाड़ियों से नहीं निकल सकते थे इसलिए हम वहां से निजी वाहन की मदद से निकले। मैक्स अस्पताल दूर था इसलिए हम डीसीपी सर और रतन लाल को लेकर पहले जीटीबी अस्पताल पहुंचे जहां पर रतन लाल को मृत घोषित कर दिया गया। बाद में हम डीसीपी सर को मैक्स अस्पताल लेकर पहुंचे।

दिल्ली के गोकलपुरी में हिंसा में घायल हुए एसीपी को दो दिन पहले ही अस्पताल से छुट्टी मिली है। उन्होंने बताया कि हमें निर्देश दिया गया था कि सिग्नेचर ब्रिज को गाजियाबाद की सीमा के साथ जोड़ने वाली सड़क को ब्लॉक ना होने दिया जाए लेकिन धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी और इसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल थे। वे लगभग 20,000- 25,000 थे, जबकि हम केवल 200 थे। मुझे नहीं पता कि उन्होंने सड़क को ब्लॉक करने की योजना बनाई थी जैसा कि उन्होंने पहले किया था।उन्होंने बताया कि हमने उनसे शांति से बात की और उन्हें मुख्य सड़क के बजाय सर्विस रोड पर प्रदर्शन करने को कहा। तब तक अफवाहें फैलने लगी थीं कि कुछ महिलाएं और बच्चे पुलिस फायरिंग में अपनी जान गंवा चुके हैं। पुल के पास निर्माण कार्य चल रहा था। प्रदर्शनकारियों ने वहां से पत्थर और ईंटें उठाकर अचानक पथराव शुरू कर दिया और हम घायल हो गए, जिसमें डीसीपी सर भी घायल हो गए और उनके सिर से भी खून बह रहा था।

एसीपी ने बताया कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे लेकिन प्रदर्शनकारियों के बीच की दूरी बड़ी होने के कारण यह कोशिश नाकाम रही। उन्होंने बताया कि हम सड़क के दो विपरीत छोरों पर खड़े थे। हम फायरिंग नहीं करना चाहते थे क्योंकि कई महिलाएं भी विरोध प्रदर्शन में शामिल थी। उन्होंने बताया कि मेरा मकसद डीसीपी को बचना था क्योंकि पथरा के दौरान वह घायल हो गए थे और उनके शरीर से खून बह रहा था। उन्होंने कहा कि वहीं हम किसी भी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंचाना चाहते थे।

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