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अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए ना हो; पीएम नरेंद्र मोदी

सच बात—देश की बात

वो कहते थे मुसलमान बनो, मैं कहता था वाहेगुरू जी दा खालसा वाहेगुरू जी दी फतेह

afgjan sikhअफगानिस्तान में रहने वाले निदान सिंह का एक महीने पहले तालिबानियों ने अपहरण कर लिया था फिर उन्हें रिहा कर दिया गया। रविवार को निदान सिंह सहित 11 सिख अफगानिस्तान से भारत पहुंचे। इन्हें विशेष विमान के जरिए काबुल से दिल्ली लाया गया है। दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचने पर इन सभी का जोरदार स्वागत किया गया।इसी साल मार्च में आतंकियों ने काबुल के एक गुरुद्वारा पर हमला किया था। दिल्ली पहुंचने के बाद जब वे अपने परिवार वालों से मिल रहे थे तब भावुक कर देने वाला सीन था। इस दौरान भाजपा और अकाली दल के कुछ नेता भी उनके स्वागत के लिए वहां मौजूद थे।पिछले कई दशकों से अफगान के सिख और हिंदुओं के लिए भारत नेचुरल होम रहा है। इस साल 700 से ज्यादा लोगों ने लॉन्ग टर्म वीजा के लिए अप्लाई किया है। कुछ महीनों से इनका वीजा लंबित पड़ा था। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक कोरोनावायरस के चलते वीजा देने में देरी हुई।

  • अफगान के 11 लोग रविवार को भारत पहुंचे, इनमें से ज्यादातर वे लोग हैं जिन्होंने हाल ही में हुए काबुल आतंकी हमले में अपने परिवार के लोगों को खोया है
  • इस साल 700 से ज्यादा लोगों ने लॉन्ग टर्म वीजा के लिए अप्लाई किया , कोरोनावायरस के चलते इन्हें वीजा देने में देरी हुई
  • निदान सिंह ने कहा कि आतंकियों ने मुझ पर भारत की तरफ से जासूसी करने का आरोप लगाया था जो पूरी तरह गलत है

भारत ने निदान सिंह की रिहाई में निभाई थी अहम भूमिका
Afghan-Sikhs-arrive-say-atmosphere-of-1200x830भारत सरकार ने तालिबानियों द्वारा अपहृत किए गए निदान सिंह की रिहाई में अहम भूमिका निभाई थी। सिंह की रिहाई के लिए उनकी पत्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उनका 17 जून को अफगानिस्तान के पकटिया गुरुद्वारा से अपहरण किया गया था। एक महीने बाद उनकी रिहाई हुई थी।निदान सिंह के साथ एक 16 साल की नाबालिग युवती सुनमित कौर भी है। उसका अपहरण करके जबरन मुस्लिम बनाकर निकाह करवाया जा रहा था। ये सभी लंबी अवधि के वीजा के तहत भारत आए हैं। नागरिकता संशोधन कानून के तहत इन्हें नागरिकता दी जाएगी।

हिंदुस्तान को मां बोलूं, बाप बोलूं, क्या बोलूं, हिंदुस्तान तो हिंदुस्तान है। हिंदुस्तान में कोई कमी नहीं है। 
भारत पहुंचने के बाद भावुक होते हुए निदान सिंह सचदेवा ने कहा कि मुझे नहीं पता हिंदुस्तान को क्या कहना है, अफगान सिख निदान सिंह ने मार्मिक तरीके से अपनी बात रखी। उन्‍होंने कहा कि हिंदुस्तान को मां बोलूं, बाप बोलूं, क्या बोलूं, हिंदुस्तान तो हिंदुस्तान है। हिंदुस्तान में कोई कमी नहीं है। आतंकी मुझे कहते थे कि मुसलमान बनो, मैं कहता था “वाहेगुरू जी दा खालसा वाहेगुरू जी दी फतेह मैं अपना धर्म क्यों बदलूं”।निदान सिंह ने बताया कि अफगान के पहाड़ी इलाकों में तालिबानी आतंकी जंगल के जानवर की तरह घूमते रहते हैं। भगवान ने मुझे बचा लिया। मैं पूरी रात सो नहीं पाता था, वे हमेशा मेरी तरफ बंदूक ताने रहते थे। वे मुझे पीटते थे, जान से मारने की धमकी देते थे। वे मेरी उंगलियां और नाक काटने की बात कहते थे। उन लोगों ने मुझ पर भारत की तरफ से जासूसी करने का आरोप लगाया था जो पूरी तरह गलत है।हक्कानी नेटवर्क ने निदान सिंह को अफगानिस्तान के पकतिया में पकड़ा था। उसके बाद वे सीमा पार से पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा ले गए। हालांकि जब भारत की जासूसी से जुड़ा उन्हें कोई लिंक नहीं मिला तो निदान सिंह रिहा कर दिया।निदान सिंह ने कहा कि अफगानिस्तान में रहने वाले सिख हमेशा डर के माहौल में जीते हैं। हमारी मां- बहनें गुरुद्वारा में दर्शन के लिए भी अकेले नहीं जा सकती, उनके साथ परिवार के एक पुरुष मेंबर को जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मैं पीएम मोदी को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद देना चाहता हूं। भारत ने जिस तरह बड़ा दिल दिखाया उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं धन्यवाद व्यक्त कर सकूं। उन्होंने कहा कि भारत में उनके धर्म को किसी तरह का खतरा नहीं है। उनकी मां-बहनें बिना किसी डर के यहां घूम सकती हैं।निदान सिंह के भाई चरण सिंह ने कहा कि हमने आतंकियों के कब्जे में उनकी तस्वीर देखी थी। हमें नहीं पता था कि वे किस हालत में हैं। आज उन्हें अपने बीच पाकर खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को मानवीय आधार पर हमें वीजा देनी चाहिए।

वे लोग हमें काफिर कहते थे। अगर हम काफिर हैं, तो वहां रहने का क्या मतलब है? हमारे सिख गुरुओं ने बलिदान दिया है। हमने कभी धर्म परिवर्तन नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने अफगानिस्तान में डर से मुक्त रहने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया है। गुरजीत सिंह के परिवार के तीन लोग काबुल हमले में मारे गए थे। उनमें उनके पिता भी शामिल थे।आतंकी हमलों के अलावा, धार्मिक परिवर्तन भी अफगानिस्तान में सिख समुदाय के लिए एक चिंता का विषय रहा है। अनुमान के मुताबिक भारत ने 700 से अधिक अफगान सिखों शरण देने की सहमति दी है। अफगान के ज्यादातर सिख पलायन के लिए मजबूर हुए हैं। वहां सिख कम्युनिटी विलुप्त होने के कगार पर है।अफगान के एक्टिविस्ट ओमिद शरीफ ने मुझे बताया कि ऐसा होना मेरे लिए दुखदाई है। मुझे शर्म आती है कि हम अपनी डाइवर्सिटी को बचा नहीं सके और अफगान लोगों को इस तरह से अपने पैतृक घर को छोड़ना पड़ा।

आतंकियों के निशाने पर हैं सिख
अफगानिस्तान में सिख काफी लंबे समय से आतंकियों के निशाने पर हैं। उन्हें भारत को चोट पहुंचाने के लिए निशाना बनाया जाता है। काबुल के गुरुद्वारे में हुए आतंकी हमले में 25 सिखों की मौत हुई थी। अफगानिस्तान में सिख लड़कियों की जबरन शादी कराए जाने के मामले भी सामने आए हैं। काबुल में सिख समुदाय के नेता चाबुल सिंह ने बताया कि हमें 11 लोगों का छह महीने के लिए वीजा मिला है। इनमें निदान सिंह भी शामिल हैं। अपहरण के दौरान दी गई प्रताड़ना के बाद से वो काफी बीमार हैं। उनके रिश्तेदारों को भी वीजा मिला है। काबुल हमले में मारे गए दो भाइयों के परिवार भी भारत गए हैं। एक बेटी जिसे जबरन शादी से बचाया गया था उसे भी भेजा गया है।अफगानिस्‍तान में हिंदुओं को अक्‍सर प्रताड़ित किया जाता है। हाल में ही मार्च के महीने में यहां रह रहे हिंदुओं और सिखों पर हमला हुआ था। इसके बाद काबुल में एक सिख मंदिर के पास रहने वाले करीब 63 वर्षीय लाला शेर सिंह ने बताया था कि हमले के बाद से हमारा समुदाय बहुत डरा हुआ है। ऐसी आशंका भी जताई गई कि कहीं उनके ऊपर फिर से हमला न हो जाए। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि कहीं अगला हमला उन लोगों को टारगेट करके न किया जाए जिसमें बाकी बचे लोग भी मारे जाएं।सिख नेता मनजीत सिंह ने कहा कि हमें उम्मीद नहीं थी कि निदान सिंह सुरक्षित लौटेंगे, हमें डर था कि कहीं उनकी हत्या न हो जाए। अफगान में सिख समुदाय के लोगों को टारगेट किया जा रहा है, हमला किया जा रहा है, लड़कियों को अगवा किया जा रहा है, जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सभी को भारत बुलाने और यहीं शरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो धीरे-धीरे सभी मार दिए जाएंगे।अफगान सिख समुदाय के लिए भारत में अपने जीवन की शुरुआत करना मुश्किल जरूर होगा। फिर भी उनमें से ज्यादातर के लिए यह पुनर्जन्म की तरह है जो आतंक के चंगुल से बचकर भारत को अपना घर बनाने आए हैं।

कौन हैं निदान सिंह

निदान सिंह एक अफगानी सिख हैं, जिन्‍हें भारत सरकार नागरिकता संशोधन कानून के तहत भारत देश की नागरिकता दी जाएगी। निदान जैसे कई लोग अफगान में तालिबानियों का अत्‍याचार सह रह रहे हैं। ऐसे लोगों की मदद के लिए भी भारत सरकार सीएए लेकर आई है। इसी कड़ी में और भी लोग हैं जिन्‍हें यहां की नागरिकता मिलेगी।

 

 

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