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अफगानिस्तान सुरक्षा बलों ने 303 तालिबान आतंकियों को मार गिराया

afgan armyअफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने पिछले 24 घंटे में 303 तालिबान आतंकियों को मार गिराया है जबकि 125 घायल हुए हैं। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों (ANSF) ने नंगरहार, लगमन, गजनी, पक्तिका, कंधार, जाबुल, हेरात, जोजजान, समांगन, फरयाब, सर-ए पोल, हेलमंद, निमरुज, कुंदुज, बगलान और कपिसा प्रांतों में अभियान चलाया।मंत्रालय ने कहा कि कंधार के बाहरी इलाके में अफगान वायु सेना (AAF) की ओर से किए गए हवाई हमलों में 16 तालिबानी आतंकी मारे गए और 10 घायल हुए। वायु सेना ने गुरुवार को बल्ख प्रांत के देहदादी जिले में भी कार्रवाई की। इन हमलों में दहशतगर्दों के कई ठिकाने भी ध्वस्त कर दिए गए।

बगलान प्रांत में 23 तालिबानी आतंकी मारे गए
मंत्रालय ने दो हवाई हमलों के वीडियो भी शेयर किए। मंत्रालय ने कहा कि बगलान प्रांत में सुरक्षा बलों ने तालिबान के 23 आतंकियों को मार गिराया और 4 घायल हुए। उनके हथियार और गोला-बारूद नष्ट कर दिए गए। बुधवार को जाबुल के बाहरी इलाके में AAF की मदद से ANSF के ऑपरेशन में 60 तालिबानी आतंकी मारे गए और 11 घायल हो गए।

विदेशी सेनाओं की वापसी के बीच हिंसा बढ़ी
अफगानिस्तान में हाल के दिनों में हिंसा में बढ़ोतरी हुई है। कुछ ही हफ्तों में विदेशी सेनाएं यहां से पूरी तरह से चली जाएंगी। इस दौरान तालिबान ने अफगान बलों और नागरिकों के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। उसने देश के पूर्वोत्तर प्रांत तखर समेत अफगानिस्तान के कई जिलों पर कब्जा कर लिया है।

223 जिलों पर तालिबान का नियंत्रण
लॉन्ग वॉर जर्नल के अनुसार, अफगानिस्तान के 223 जिलों पर तालिबान का नियंत्रण है। वहीं, 34 प्रांत की राजधानियों में से 17 पर तालिबान से सीधे तौर पर खतरा है। पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा का होने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि अफगान सेनाएं तालिबान से लोहा ले रही हैं। वहीं अमेरिका और दूसरे देशों ने भी अफगानिस्तान को मदद देने की बात कही है।

अफगान मंत्रियों पर हमले की धमकी
तालिबान ने बुधवार को धमकी दी थी कि अफगान सरकार के मंत्रियों पर और हमले किए जाएंगे। दरअसल, मंगलवार रात उसने काबुल में अफगानी रक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह मोहम्मदी पर बम और बंदूक से हमला किया था, लेकिन वह इसमें बच निकले। हमले में 8 लोगों की जान गई और कई लोग जख्मी हुए।

क्या और कैसा है तालिबान?

  • 1979 से 1989 तक अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का शासन रहा। अमेरिका, पाकिस्तान और अरब देश अफगान लड़ाकों (मुजाहिदीन) को पैसा और हथियार देते रहे। जब सोवियत सेनाओं ने अफगानिस्तान छोड़ा तो मुजाहिदीन गुट एक बैनर तले आ गए। इसको नाम दिया गया- तालिबान। हालांकि तालिबान अब कई गुटों में बंट चुका है।
  • तालिबान में 90% पश्तून कबायली लोग हैं। इनमें से ज्यादातर का ताल्लुक पाकिस्तान के मदरसों से है। पश्तो भाषा में तालिबान का अर्थ होता हैं छात्र या स्टूडेंट।
  • पश्चिमी और उत्तरी पाकिस्तान में भी काफी पश्तून हैं। अमेरिका और पश्चिमी देश इन्हें अफगान तालिबान और तालिबान पाकिस्तान के तौर पर बांटकर देखते हैं।
  • 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत रही। इस दौरान दुनिया के सिर्फ 3 देशों (सऊदी अरब, UAE और पाकिस्तान) ने इसकी सरकार को मान्यता देने का जोखिम उठाया था।
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