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बगावत करने वाले दो नेताओं को अखिलेश ने सपा से निकाला

akhilesh_yadav_1-sixteen_nine-sixteen_nineउत्तर प्रदेश के बागपत में जिला पंचायत चुनाव में भाजपा के मददगार बने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओंकार यादव और पूर्व जिलाध्यक्ष किरणपाल उर्फ बिल्लू प्रधान को सपा से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। दोनों पर सपा की जिला पंचायत सदस्य बबली देवी को भाजपा में शामिल कराने व अन्य सदस्यों पर भी दबाव बनाने का आरोप लगा था। जिसकी जांच पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपने स्तर से कराई थी।भाजपा के पास जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ाने के लिए अनुसूचित जाति की महिला प्रत्याशी नहीं थी। सपा छोड़कर आईं बबली देवी को भाजपा ने अपना जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया था। ओंकार यादव वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। इस बार उनकी पत्नी तारा यादव वार्ड-17 से निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ी थी। रालोद प्रत्याशी शाहिदा ने उन्हें चुनाव में शिकस्त दी थी।सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी का कहना है कि ओंकार यादव और बिल्लू प्रधान के पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की जानकारी पार्टी को मिली थी। शीर्ष नेतृत्व ने अपने स्तर से इसकी जांच कराई थी। दोषी पाए जाने पर दोनों को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया।इस बीच पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष  नरेश उत्तम पटेल की संस्तुति से मिर्जापुर के धीरेन्द्र सिंह  को समाजवादी युवजन सभा की राज्य कार्यकारिणी में प्रदेश सचिव बनाया गया है। जबकि यशवीर सिंह व मोहम्मद रिजवान खान समाजवादी युवजन सभा की राज्य कार्यकारिणी में प्रदेश सदस्य नामित हुए हैं।

अखिलेश को परिवार के अलावा किसी से लेना देना नहीं
कांग्रेस ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ट्विटर का नेता करार दिया है। कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा है कि अखिलेश यादव संसद में सबसे कम सवाल पूछने वाले सांसद हैं। प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के हकों को लेकर उन्होंने आवाज नहीं उठाई। इन्हें अपने परिवार के अलावा किसी और से कोई लेना-देना नहीं है।  उन्होंने 69000 शिक्षक भर्ती में पिछड़े वर्ग का हक मारे जाने पर आवाज नहीं उठाई। पुलिस द्वारा फ़र्जी एनकाउंटर में इस समुदाय के लोगों को मारा गया, लेकिन अखिलेश यादव ने सदन में यह मुद्दा नहीं उठाया। वह केवल ट्विटर पर सवाल उठाने वाले नेता हैं। उन्होंने कहा कि सपा अपना वोटर खो रही है लेकिन परिवारवाद से ऊपर नहीं उठ पा रही है। यहां तक कि जहां पर वे चुनाव लड़कर जीतते आ रहे थे, वहां से इनके परिवार के लोग भी हार गए। राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव, सपा प्रमुख की पत्नी डिंपल यादव, अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव तक चुनाव हार गए। इसके बाद भी ओबीसी के लिए आरक्षित सीट पर इटावा से मुलायम सिंह के नाती अंकुश यादव व हमीरपुर से धर्मेंद्र यादव के साले पुष्पेंद्र यादव की पत्नी बंदना यादव को टिकट दिया गया है।

 

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