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किसान संगठन ने खत्म किया आंदोलन…तिरंगे के अपमान से आहत

vm singhराष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रमुख वीएम सिंह ने गाजीपुर बॉर्डर पर ऐलान किया कि उनका संगठन मौजूदा किसान आंदोलन से अलग हो रहा है। उनके अलावा भारतीय किसान यूनियन-भानू ने भी खुद को किसान आंदोलन से अलग कर लिया है।कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब दो महीने से चल रहे किसानों का आंदोलन गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में हिंसा के बाद अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। दिल्ली हिंसा को देखते हुए दिल्ली-नोएडा रोड पर स्थित चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने बुधवार से अपना धरना वापस ले लिया। दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसक घटना और राष्ट्र ध्वज के अपमान से आहत होकर भानु गुट ने धरना वापस लिया ।अब चिल्ला बॉर्डर के माध्यम से दिल्ली-नोएडा मार्ग 57 दिनों के बाद यातायात के लिए फिर से खुल गया। इधर, दिल्ली हिंसा को लेकर पुलिस ने 25 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं और 93 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। एक्टर दीप सिद्धू और लक्खा का भी नाम एफआईआर में दर्ज है।दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि एनएच-24 खोल दिया गया है, जिससे दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाला रूट बहाल हो गया है।

India Republic Dayभारतीय किसान यूनियन (भानू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने चिल्ला बॉर्डर पर एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कल ट्रैक्टर परेड के दौरान जिस तरह से दिल्ली में पुलिस के जवानों के ऊपर हिंसक हमला हुआ तथा कानून व्यवस्था की जमकर धज्जियां उड़ाई गई, इससे वे काफी आहत हैं। गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन (भानू) नये कृषि कानूनों के विरोध में चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहा था। इस धरने की वजह से नोएडा से दिल्ली जाने वाला रास्ता करीब 57 दिनों से बंद था। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने खत्म किया आंदोलन. वीएम सिंह बोले- हम लोगों को पिटवाने नहीं आए हैं.

गणतंत्र दिवस पर किसान अंदोलन के दौरान हिंसा की तस्वीरों ने पूरे देश को झकाझोर कर रख दिया है। राजधानी में जगह-जगह उत्पात भी देखने को मिला। इस खौफनाक मंजर की कुछ तस्वीरें पहलवान योगेश्वर दत्त ने अपरे ट्विटर अकाउंट पर शेयर की हैं।ओलिंपिक में मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाने वाले इस पहलवान ने उपद्रवियों के किसान होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्वीट किया- हाथों में तलवार और राजधानी में अराजकता फैलाना क्या ये किसानों का आंदोलन है? क्या किसान पुलिस के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा सकता है? क्या किसान हिंसा कर सकता है? क्या किसान तिरंगे का अपमान कर सकता है? अब आप को तय करना है ये किसान हैं या देश विरोधी ताकतों का मोहरा।

वीएम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ विरोध-प्रदर्शन को आगे नहीं बढ़ा सकते जिसकी दिशा कुछ और हो. इसलिए, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन वीएम सिंह और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति इस विरोध को तुरंत वापस ले रही है. बता दें कि दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा के मामले में वीएम सिंह पर भी एफआईआर दर्ज हुई है.किसान नेता वीएम सिंह ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हम लोगों को पिटवाने के लिए यहां नहीं आए हैं. हम देश को बदनाम करना नहीं चाहते हैं. वीएम सिंह ने कहा कि टिकैत ने एक भी मीटिंग में गन्ना किसानों की मांग नहीं उठाई. वीएम सिंह ने कहा कि सरकार की भी गलती है, जब कोई 11 बजे की जगह 8 बजे निकल रहा है तो सरकार क्या कर रही थी. जब सरकार को पता था कि लाल किले पर झंडा फहराने वाले को कुछ संगठनों ने करोड़ों रुपये देने की बात की थी.उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का झंडा, गरिमा, मर्यादा सबकी है. उस मर्यादा को अगर भंग किया है, भंग करने वाले गलत हैं और जिन्होंने भंग करने दिया वो भी गलत हैं. ITO में एक साथी शहीद भी हो गया. जो लेकर गया या, जिसने उकसाया उसके खिलाफ पूरी कार्रवाई होनी चाहिए.

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