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अमेरिका में आगजनी – लूटपाट, 40 शहरों में कर्फ्यू

america 0neवॉशिंगटन अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से अमेरिका जल रहा है। कई बड़े शहरों से लूटपाट, दंगे और आगजनी की खबरें आ रही हैं। हिंसा की लपटें राजधानी वॉशिंगटन डीसी और वाइट हाउस तक पहुंच चुकी हैं। हालात नियंत्रण से बाहर निकलते देख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने अमेरिकी मिलिट्री  को उतारने का फैसला किया है।राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘जॉर्ज फ्लॉयड की निर्मम हत्या से सभी अमेरिकी दुखी हैं और उनके मन में एक आक्रोश है। जॉर्ज और उनके परिवार को इंसाफ दिलाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मेरे प्रशासन की ओर से उन्हें पूरा न्याय मिलेगा। मगर देश के राष्ट्रपति के तौर पर मेरी पहली प्राथमिकता इस महान देश और इसके नागरिकों के हितों की रक्षा करना है।’

हजारों की संख्या में सेना के जवानों को उतारने का फैसला
amrica twoट्रंप ने कहा कि मैंने इस देश के कानून को सबसे ऊपर रखने की शपथ ली थी और मैं अब बिल्कुल वही करूंगा। उन्होंने कहा, ‘रविवार रात वॉशिंगटन डीसी में जो कुछ हुआ वह बेहद गलत है। मैं हजारों की संख्या में हथियारों से लैस सेना के जवानों को उतार रहा हूं। इनका काम दंगा, आगजनी, लूट और मासूम लोगों पर हमले की घटनाओं पर लगाम लगाना होगा।’

‘हिंसा का शिकार बने मासूम लोग, बतौर राष्ट्रपति मैं करूंगा अधिकारों की रक्षा’
ट्रंप ने राज्यों को हिदायत दी कि वे अपने नागरिकों की रक्षा करने में कोई कसर न छोड़ें। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई राज्य या शहर अपने नागरिकों और उनकी संपत्ति की रक्षा करने से इनकार करता है तो मैं अमेरिकी फौज की वहां तैनाती कर उनका काम तुरंत आसान कर दूंगा।’ ट्रंप ने कहा कि जॉर्ज की मौत से लोग बेहद दुखी हैं और चंद दंगाइयों के उपद्रव के आगे शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले लोगों के विरोध को नजरअंदाज नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि हिंसा का सबसे ज्यादा शिकार मासूम और शांतिप्रिय लोग बने हैं और उनका राष्ट्रपति होने के नाते मैं उनके अधिकारों की रक्षा करूंगा।

america threeयह है पूरा मामला
दरअसल बीते 25 मई को 20 डॉलर का नकली नोट इस्तेमाल करने के आरोप में अश्वेत अमेरिकन जॉर्ज फ्लॉयड को पुलिस ने हिरासत में लिया था। घटना के कई वीडियो सामने आए इसमें एक पुलिसकर्मी 7 मिनट तक जॉर्ज के गले पर घुटना रखे दिखाई दिया। जॉर्ज यह कहते-कहते बेहोश हो गए कि ‘मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं’ लेकिन आरोपी पुलिस ऑफिसर डेरेक शॉविन को तरस नहीं आया। जॉर्ज की मौत के बाद लोग पुलिस के इस रंगभेदी अत्याचार के खिलाफ सड़कों पर हैं। हालांकि विरोध प्रदर्शन की आड़ में कई जगह हिंसा, आगजनी, दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आई हैं। बीते दो दिनों में विरोध प्रदर्शन राजधानी वॉशिंगटन तक पहुंच गए और एहतियातन वाइट हाउस को बंद करना पड़ा।

अमेरिका में 52 साल बाद सबसे भीषण हिंसा

National Moment Of Silence Held For Victims Of Police Brutalityराजधानी वॉशिंगटन सहित देश के 40 से ज्यादा शहरों में उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू का ऐलान किया गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका के इतिहास में 52 साल बाद यह सबसे भीषण हिंसा और नस्लीय अशांति की घटना है। इससे पहले साल 1968 में मार्टिन लूथर किंग की हत्या के बाद ऐसा ही हिंसक संघर्ष देखने को मिला था।न्यूयॉर्क, शिकागो, फिलाडेल्फिया और लॉस एंजिल्स में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की झड़प हुई। हिंसक भीड़ ने पुलिस की कई कारों को आग के हवाले कर दिया है जबकि कई दुकानों को लूट लिया गया है। स्थानीय पुलिस से मामला काबू में होता न देखकर कई शहरों में अमेरिका की रिजर्व फोर्स नेशनल गार्ड्स को तैनात किया गया है।अमेरिका के 75 से ज्यादा शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। जो शहर कुछ दिनों पहले कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण पूरी तरह बंद थे और सड़कें सूनसान पड़ी थी, वहां अब हजारों की संख्या में भीड़ कंधे से कंधा मिलाकर विरोध प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है।फिलाडेल्फिया में दंगाइयों ने पुलिस की कारों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। इतना ही नहीं, उन्होंने कई दुकानों को लूटपाट भी की। कैलिफोर्निया के सांता मोनिका में भी लूटपाट की खबरें आ रही है। अटलांटा और जॉर्जिया में भी भीड़ पर आंसू गैस के गोले दागने और लाठीचार्ज करने के बाद दो पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। ह्यूस्टन में भी बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।अमेरिका में दंगे के आरोप में 4,100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जगह-जगह पर नेशनल गार्ड के जवान गश्त लगा रहे हैं। इन लोगों में से अधिकतर को अस्थाई जेलों में रखा गया है।

प्रदर्शन की आड़ में खूब लूट-पाट

हिंसक प्रदर्शन के दौरान मौके का फायदा उठाकर कई लोगों ने जी-भरकर लूटपाट की। कई मंहगे आउटलेट से जिसको जो मिला लूटकर ले गया। पुलिस ने कई शहरों में फ्लैगमार्च भी निकाला है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग शहरों में जारी हिंसा के लिए देश के वामपंथ को जिम्मेदार ठहराया है। दंगाई निर्दोष लोगों को डरा रहे हैं, नौकरियों को नष्ट कर रहे हैं, बिजनेस को नुकसान पहुंचा रहे हैं और बिल्डिंग्स को जला रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि जॉर्ज फ्लॉयड की याद को दंगाइयों, लुटेरों और अराजकतावादियों ने बदनाम किया है। ट्रंप ने एक ट्वीट में कहा कि नेशनल गार्ड को मिनियापोलिस में हालात को काबू में करने के लिए उतार दिया गया है जो डेमोक्रेटिक पार्टी के मेयर नहीं कर सके। इनका दो दिन पहले ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अब कोई और नुकसान नहीं होगा।

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