Pages Navigation Menu

Breaking News

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा

कोविड-19 वैक्सीन की एक खुराक मौत को रोकने में 96.6 फीसदी तक कारगर

हरियाणा: 10 साल पुराने डीजल, पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध नहीं

सच बात—देश की बात

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 26 प्रोफेसर समेत 44 की कोरोना से मौत

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में केवल 20 दिनों के भीतर 44 व्यक्तियों की कोरोना से मौत हो चुकी है. इनमें 26 प्रोफेसर्स भी शामिल हैं. कोरोना के कारण मरने वाले इन प्रोफेसर्स में 16 वर्किंग और 10 रिटायर्ड फैकल्टी हैं. विश्वविद्यालय ने संदेह जताया है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में कोरोना का कोई नया वैरिएंट हो सकता है. विश्वविद्यालय के कुलपति ने यहां से लिए गए सैंपल की जांच के लिए आईसीएमआर से आग्रह किया है. एएमयू में मातम  छाया हुआ है। शिक्षक व छात्रों में भय है। शिक्षक घर में रहकर दूसरों से भी घर में ही रहने की अपील कर रहे हैं।  कुलपति ने ट््वीट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैंपस के हालात की जानकारी ली, जिन्हें अब तक की स्थिति से अवगत करा दिया है। मुख्यमंत्री ने एएमयू को पूरा सहयोग करने का वादा किया है। उन्होंने एएमयू स्टाफ के निधन पर शोक भी जताया। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने जेएन मेडिकल कालेज को आक्सीजन व रेमडेसिविर इंजेक्शन की लगातार आपूर्ति करने का भरोसा दिया है। एएमयू में 13 फैकल्टी व 114 डिपार्टमेंट हैं, जिनमें करीब 1100 शिक्षक हैं। छात्रों की संख्या करीब 30 हजार है। कोरोना के चलते यूनिवर्सिटी में कक्षाएं स्थगित हैं। इसलिए अधिकांश छात्र अपने घर हैं। कैंपस के विभिन्न हाल में इस समय करीब पांच सौ छात्र-छात्राएं ही हैं। इनमें अधिकांश स्कालर हैं। छात्रों से अपील की गई कि वे अपने घर चले जाएं। 

एएमयू के कुलपति तारिक मंसूर के भाई की भी कोरोना से मौत हो चुकी है. कुलपति तारिक मंसूर ने विश्वविद्यालय में कोरोना के नए वैरिएंट की आशंका जताई है. कुलपति की मांग पर विश्वविद्यालय से कोरोना के सैंपल एकत्र किए गए हैं. एकत्र किए गए इन सैंपल को को जांच के लिए दिल्ली में सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जिनॉमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायॉलजी भेजा गया है. वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने ICMR को नमूनों की जांच के लिए एक पत्र भेजा है. आईसीएमआर की ओर से इस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. गौरतलब है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी परिसर से विश्वविद्यालय की ही आईसीएमआर प्रमाणित लैब ने यह सैंपल इकट्ठा किए हैं.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के ने आईसीएमआर को लिखे पत्र कहा है कि जितनी जल्दी हो सके, कोविड सैंपल्स की जीनोम स्टडी कराई जाए. इस स्टडी से यह पता चल सके कि क्या यूनिवर्सिटी में कोविड का कोई नया वैरिएंट विकसित हुआ है.विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले जिन प्रोफेसर की कोरोना के कारण मृत्यु हुई है, उनमें पोस्ट हार्वेस्ट इंजिनियरिंग विभाग के प्रफेसर मोहम्मद अली खान (60), राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. काजी मोहम्मद जमशेद (55), मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. साजिद अली खान (63), संग्रहालय विभाग के अध्यक्ष मोहम्मद इरफान (62), महिला अध्ययन केंद्र के डॉ. अजीज फैसल (40), इतिहास विभाग के डॉ. जिबराइल (51), अंग्रेजी विभाग के डॉ. मोहम्मद यूसुफ अंसारी (46), उर्दू विभाग के डॉ. मोहम्मद फुरकान संभली (43) और जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर सैयद इरफान अहमद (62) शामिल हैं.

एएमयू के शिक्षकों की मौत पर सीएम व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने जताया दुख

कोरोना काल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पैदा हुए हालत से प्रदेश व केंद्र सरकार भी चिंतित है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से फोन पर पूरे हालात की जानकारी ली। कुलपति ने आक्सीजन व रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत बताते हुए लगातार आपूर्ति की मांग की। सीएम ने एएमयू को हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया है। केंद्रीय मंत्री ने भी मदद की बात कही है। इनसे हुई बातचीत की जानकारी कुलपति ने ट्वीट के जरिये  साझा भी की है।केंद्रीय मंत्री से हुई बातचीत में बताया गया कि कैंपस में कोरोना वैक्सीन लगवाने का अभियान चल रहा है। मेडिकल कालेज में आक्सीजन जनरेटर प्लांट लगाने पर काम चल रहा है। कैंपस के आसपास कहीं कोरोना का नया वायरस तो पैदा नहीं हो गया है,  इसकी जांच के लिए कोविड के सैैंपल आइसीएमआर भेजे गए हैं।  आइसीएमआर के वे लगातार संपर्क में हैं। केंद्रीय मंत्री के सामने भी कुलपति ने आक्सीजन व रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत को रखा। मुख्यमंत्री ने एएमयू के जेेएन मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों तथा वहां कार्यरत चिकित्सकों व अन्य कार्मिकों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के परिसर में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। इन्हें कोविड संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए सभी उपाय किए जाना जरूरी है। इस कार्य में प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा।

मेडिकल कालेज की सुविधा पर उठ रहे सवाल 

इतनी संख्या में एएमयू के शिक्षकों की मौत ने सबको हिलाकर रख दिया है। सवाल उठने लगे हैं कि जेएन मेडिकल कालेज को उच्च श्रेणी का होने का दावा किया जाता रहा है, लेकिन अपने शिक्षकों को बचान में कैसे चूक कर गया। यहां आए दिन आक्सीजन की कमी होती रहती है। रेमडेसिविर इंजेक्शन भी मरीजों की मांग के अनुसार उपलब्ध नहीं हैं। एक प्रोफेसर ने यहां तक कह दिया कि मेडिकल कालेज से तो दीनदयाल संयुक्त अस्पताल व जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं ठीक हैं। जबकि, मेडिकल कालेज के ङ्क्षप्रसिपल प्रो. शाहिद सिद्दीकी लगातार कहते आएं कि मरीजों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है। कभी-कभी मरीज ऐसी स्थिति में आते हैं कि उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है।

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »