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सोशल मीडिया पर अर्नब गोस्वामी को मिला जबरदस्त समर्थन

trp republic bharatटेलीविजन एंकर और रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी ने गुरुवार धमकी देते हुए कहा कि टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स) बढ़ाने के लिए पैसे देने के आरोप में रिपब्लिक टीवी का नाम लेने को लेकर वे मुंबई पुलिस कमिश्नर उन पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने टीआरपी रैकेट के भांडाफोड़ का दावा किया है और कहा कि टेलीविजन चैनल्स टीआरपी को मैनुपुलेट करते थे। सिंह ने कहा कि रिपब्लिक टीवी और और दो अन्य मुंबई के लोकल चैनल्स इस काम में संलिप्त पाए गए हैं। इन दोनों चैनलों के मालिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा कि रिपब्लिक टीवी के डायरेक्टरों और प्रमोटरों की जांच फिलहाल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि रिपब्लिक चैनल के कुछ कर्मचारियों को समन भेजेंगे।मुंबई पुलिस के दावे के विपरीत सोशल मीडिया पर रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को जोरदार समर्थन मिला है।

अर्नब की मुंबई पुलिस कमिश्नर को मुकदमे की धमकी

आपराधिक मानहानि की धमकी देते हुए अर्नब गोस्वामी ने बयान जारी कर कहा- “मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ गलत आरोप लगाए हैं, क्योंकि हमने उनसे सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच को लेकर सवाल किया था। रिपब्लिक टीवी मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दायर करेगा।”बयान में आगे कहा गया कि मुंबई पुलिस की तरफ से यह जांच ‘हताशा के बाद उठाया गया कदम’ है क्योंकि पुलिस कमिश्नर की अगुवाई में हुई बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मौत की जांच अभी भी संदेह के घेरे में है।

उन्होंने कहा- “BARC की ऐसी एक भी रिपोर्ट नहीं है, जिसमें रिपब्लिक टीवी का नाम हो। भारत की जनता सच्चाई जानती है। सुशांत सिंह राजपूत केस में परमबीर सिंह की जांच संदेह के घेरे में हैं और यही हताशा है क्योंकि रिपब्लिक टीवी ने पालघर, सुशांत सिंह राजपूत और अन्य केस को दिखाया है।”बयान में कहा गया- परमबीर सिंह स्टैंड आज बिल्कुल लोगों के सामने आ गया क्योंकि बार्क ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ एक भी शिकायत नहीं की है। उन्हें आधिकारिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए और कोर्ट का सामना करने के लिए तैयार रहें। मुंबई पुलिस के अनुसार, उसकी जांच में यह पता चला कि कुल 30 हजार आउडियंस मेजरमेंट मीटर्स एक प्राइवेट कंपनी से खरीदे गए थे, इनमें से 2 हजार मुंबई में लगाए गए थे।  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुंबई पुलिस चीफ ने कहा कि जिन घरों में टीआरपी को मापने के लिए यह सेट लगाए गए थे उन्हें खास चैनल लगाने के लिए पैसे दिए गए थे।

टेलीविजन रेटिंग (TRP) क्या है?

टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (TRP) से यह पता लगाया जाता है कि किस चैनल के किस प्रोग्राम को कितने दर्शक देखते हैं। टीआरपी का पता लगाने के लिए चुनिंदा घरों में एक डिवाइस पीपल्स मीटर लगाया जाता है। पीपल्स मीटर उस घर के टीवी से जुड़ा होता है। पीपल्स मीटर के जरिये यह रिकॉर्ड किया जाता है कि कौन-सा प्रोग्राम या चैनल उससे कनेक्टेड टीवी पर कितनी बार और कितनी देर देखा जा रहा है। पीपल्स मीटर के द्वारा रिकॉर्ड डेटा का विश्लेषण करने के बाद तय होता है कि किस चैनल या किस प्रोग्राम की TRP कितनी है।

दरअसल, किन घरों में पीपल्स मीटर लगाया गया है, यह गोपनीय रखा जाता है। न तो विज्ञापनदाताओं और न ही टीवी चैनलों को बताया जाता है कि ये मीटर कहां लगे हैं। इस मामले में आरोप है कि मुंबई के जिन घरों में मीटर लगे थे, उनमें रहने वालों को 400-500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए गए और सवालों के घेरे में आए चैनलों को ज्यादा देखने के लिए कहा गया, जिससे उनकी टीआरपी बढ़ गई। इस मामले हंसा एजेंसी के पूर्व कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने मीटर पाइंट वाले घरों की जानकारी इन चैनलों को दी।

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