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आप की जीत के 10 कारण

Kejriwal win delhi

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नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) एक बार फिर पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे। वोटों की गिनती से पहले भाजपा दिल्ली में बड़ी जीत का दावा कर रही थी, लेकिन जब नतीजे आए तो आप को पिछले चुनाव की तुलना में कोई खास नुकसान नहीं हुआ। आप 70 में से 62 सीटें जीतने में कामयाब रही। भाजपा के राष्ट्रवाद और शाहीन बाग के मुकाबले आप ने अपनी फ्री योजनाओं और स्थानीय मुद्दों पर जोर दिया। अपना घोषणापत्र जारी करने से पहले आप ने उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया। वहीं, भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे का मुकाबला करने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड भी खेला। आप की जीत के ऐसे ही 10 कारण, जो साबित करते हैं कि यह संयोग नहीं, बल्कि प्रजा का प्रयोग हैं।

1) राष्ट्रवाद v/s स्थानीय मुद्दे
भाजपा के चुनाव प्रचार पर स्थानीय मुद्दों की बजाय राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय मुद्दों का ही जिक्र मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हर रैली में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, राम मंदिर बनाने और सर्जिकल स्ट्राइक-एयर स्ट्राइक की बातें की। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी (आप) का फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चीजों पर रहा। केजरीवाल ने चुनाव से पहले 5 साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। भाजपा सीएए-शाहीन बाग और राष्ट्रवाद पर ही लड़ती रही।
2) केजरीवाल के खिलाफ कोई चेहरा नहीं था
2015 में भाजपा ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया था, लेकिन इससे उसे बहुत ज्यादा नुकसान हुआ। इसी वजह से इस बार दिल्ली में पार्टी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं किया। केजरीवाल बार-बार चुनौती देते रहे “अगर भाजपा में हिम्मत है, तो सीएम उम्मीदवार घोषित करके दिखाए।’ इसके जवाब में भाजपा ने कहा “दिल्ली की जनता उसका चेहरा है।’ लेकिन इन सबका चुनावों पर असर नहीं पड़ा। दिल्ली में लड़ाई केजरीवाल बनाम अन्य हो गई। इससे वोटरों को केजरीवाल के खिलाफ कोई चेहरा नहीं दिखा। भाजपा मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही थी, लेकिन यह विधानसभा चुनाव था, इसलिए मोदी के चेहरे से भी फर्क नहीं पड़ा।
3) कांग्रेस चुनाव में कहीं दिखी ही नहीं
दिल्ली चुनाव में कांग्रेस कहीं दिखाई नहीं दी। उसके उम्मीदवार और स्टार प्रचारकों ने भी प्रचार पर ज्यादा जोर नहीं दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वोटिंग से 4 दिन पहले रैली करने आए और उसमें भी मोदी को ही घेरा। अगर कांग्रेस दमखम से लड़ती तो उसे एंटी-भाजपा और एंटी-आप वोट मिलने की संभावना थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका सीधा फायदा आप को हुआ। आप को एंटी-कांग्रेस और एंटी-भाजपा वोट भी मिल गए।
4) शाहीन बाग और सीएए से दूरी
चुनाव प्रचार के दौरान मोदी और अमित शाह शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के लिए आप को जिम्मेदार ठहराते रहे। लेकिन केजरीवाल ने भी यह कह दिया कि अगर दिल्ली पुलिस उनके हाथ में होती, तो दो घंटे में शाहीन बाग का रास्ता खुलवा देता। भाजपा पूरे चुनाव में शाहीन बाग और सीएए का मुद्दा उठाती रही, लेकिन आप ने इससे दूरी बनाए रखी। इसके अलावा केजरीवाल ने शाहीन बाग और सीएए का न ही खुलकर समर्थन किया और न ही विरोध।
5) सॉफ्ट हिंदुत्व
2015 में जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने मुस्लिमों से आप को वोट देने की अपील की। लेकिन आप ने कहा कि उनकी पार्टी जाति-धर्म की राजनीति के खिलाफ है। सरकार में आने के बाद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना शुरू की। इन सबके अलावा वोटिंग से कुछ दिन पहले केजरीवाल ने खुद को हनुमान का भक्त बताया, जिस पर भाजपा ने सवाल किया कि “क्या उन्हें हनुमान चालीसा’ भी आती है। इसके बाद केजरीवाल ने हनुमान चालीसा भी गाकर सुनाई। वोटिंग से एक दिन पहले भी केजरीवाल हनुमान मंदिर गए थे।

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6) प्राइवेट स्कूलों को फीस बढ़ाने से रोका
केजरीवाल ने सरकार में आते ही सबसे पहले प्राइवेट स्कूलों को मनमानी फीस बढ़ाने से रोका। सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्राइवेट स्कूल हाईकोर्ट भी गए, जहां केजरीवाल सरकार के इस फैसले को रद्द कर दिया गया। इसके बाद केजरीवाल सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी और दो जजों की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। चुनाव प्रचार के दौरान 19 जनवरी को केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा- “जब तक दिल्ली में ईमानदार सरकार है, तब तक अभिभावकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। दिल्ली के किसी भी प्राइवेट स्कूल को फीस की मनमानी नहीं करने देंगे। पिछले पांच सालों की तरह आगे भी फीस पर नियंत्रण रखेंगे।’
7) सरकारी स्कूलों को सुधारा
एक तरफ सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को मनमानी फीस बढ़ाने से रोका तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों पर भी फोकस किया। शिक्षा बजट 6,600 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 15,600 करोड़ रुपए किया गया। केजरीवाल ने दावा किया कि कई पैरेंट्स अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल भेज रहे हैं। आप के घोषणापत्र में यह भी दावा किया गया था कि उनकी सरकार ने 200 सरकारी स्कूल में 20 हजार नए क्लासरूम खोले।
8) मोहल्ला क्लीनिक
लोगों को सस्ता और अच्छा इलाज मुहैया करने के मकसद से केजरीवाल सरकार ने 400 से ज्यादा मोहल्ला क्लीनिक खोलीं। इन क्लीनिक में कई बीमारियों के फ्री इलाज के साथ-साथ फ्री दवाइयां भी दी जाती थीं। इसके साथ ही 212 तरह के टेस्ट भी मुफ्त में किए जाते थे। संयुक्त राष्ट्र के पूर्व सचिव जनरल कोफी अन्नान और डब्ल्यूएचओ के डीजी डॉ. ग्रो हार्लेम ब्रुंडलैंट ने भी मोहल्ला क्लीनिक की तारीफ की थी।
9) मुफ्त बिजली और पानी
केजरीवाल सरकार ने 6 महीने पहले ही 200 यूनिट तक की बिजली फ्री देने की घोषणा की थी। जबकि 201 से 400 यूनिट तक की बिजली इस्तेमाल करने वालों को 50% सब्सिडी देने का ऐलान किया। केजरीवाल ने दावा किया कि जो लोग पहले 200 यूनिट बिजली के लिए 622 रुपए देते थे, उन्हें अब कुछ भी नहीं देना होगा। सरकार के मुताबिक, इससे 40 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा हुआ। फ्री बिजली के साथ ही सरकार ने फ्री में पानी भी दिया। सरकार ने हर महीने लोगों को 20 हजार लीटर पानी फ्री देने का ऐलान किया। सरकार के मुताबिक, इससे 14 लाख लोगों को लाभ हुआ।
10) महिला सुरक्षा और कच्ची कॉलोनियों का निर्माण
चुनाव से तीन महीने पहले आप सरकार ने डीटीसी बसों और मेट्रो में महिलाओं के सफर को फ्री किया। आप के रिपोर्ट कार्ड के मुताबिक, सरकार महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 1.4 लाख सीसीटीवी कैमरे लगा चुकी है, जबकि 2 लाख स्ट्रीट लाइट लगाए गए हैं। महिला सुरक्षा के अलावा केजरीवाल सरकार ने कच्ची कॉलोनियों के निर्माण पर भी ध्यान दिया। रिपोर्ट कार्ड में दावा किया कि सरकार ने 5 साल में 1,797 में से 1,281 कॉलोनियों में सड़कें बनाईं, जबकि 1130 कॉलोनियों में सीवर लाइनें बिछाईं।

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