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केजरीवाल सरकार और मुस्लिम जमात….

keriwal muslim 1नई दिल्ली ( मनोज वर्मा ) कहने को तो दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुुखिया अरविंद केजरीवाल यही कहते हैं कि मैं हिन्दू मुसलमान के बीच भेद नहीं करता। धर्म के नाम पर राजनीति नहीं करता लेकिन बीते चार महीनों में दिल्ली में मजहबी कट्टरपन का जो स्वरूप उभरकर आया उसने कई सवाल खडे कर दिए हैं।सबसे बडा सवाल तो यह कि केजरीवाल सरकार के शासन में दिल्ली में मुसलमानों का एक तबका क्यों देश के कानून और व्यवस्था को चुनौती दे रहा है? क्या केजरीवाल सरकार मुस्लिम परस्त राजनीति कर रही है? दिल्ली में दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नागरिकता संशोधन कानून ओर एनआरसी को लेकर शाहीनबाग बाग का धरना हो या उत्तर पूर्वी दिल्ली में दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद हुए दंगों की घटना हो। या कोरोनाव संक्रमण के संकट के दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन में मुस्लिम संगठन तबलीगी जमात के कार्यक्रम का हो, इन तीनों ही घटनाओं में केजरीवाल सरकार की कार्यशैली और भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठे रहे हैं। आआप नेताओं के वक्तव्यों और कार्यशैली ने भी केजरीवाल पार्टी की छवि को मुस्लिम परस्त बनाने में अहम भूमिका ही निभाई है।

जैसे तब्लीगी जमात मामले में केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से लेकर ओखला से आआप विधायक अमानतुल्ला खान कोरोना मामले में भी जमात का बचाव करते हुए नजर आए। यह हाल तब है जबकि तब्लीगी जमात में शामिल हुए लोगों पर करोनो संक्रमण के देशव्यापी प्रसार में भूमिका निभाने और इसे छुपाने के गंभीर आरोप हैं। कोरोना सक्रमण से ग्रस्त तब्लीगी जमात में शामिल हुए लोगों ने अस्पतालों में चिकित्सकों और पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने से लेकर थूकने की हरकतें की हैं उसे लेकर लोगों में खासा गुस्सा है। तो नर्सो के साथ अश्लील हरकतों और इशारों ने तब्लीगी जमात की साख पर भी बटटा लगाने का काम कर दिया। कोरोना वायरस के संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात और उनके संपर्क में आए 25 हजार लोगों को पूरे देश में क्वारंटाइन किया गया है। आइसोलेशन में रखा गया है। तब्लीगी जमात के कुल 2,083 विदेशी सदस्यों में से 1,750 सदस्यों को ब्लैक लिस्ट में डाला जा चुका है। तब्लीगी जमात सवालों के कटघरे में खडी है ऐसे में केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और विधायक अमानतुल्ला खान की पैरवी मुख्यमंत्री केजरीवाल ओर उनके दल पर सवाल खडे करती है।

तब्लीगी जमात के बचाव में आगे आ गए

मसलन कल्पना कीजिए कि आप किसी गैर हिंदी भाषी प्रदेश में हैं और आपको जाँच के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। आपको वहॉं की भाषा समझ में नहीं आती। तो आप क्या करेंगे? आप डॉक्टर पर थूकेंगे? आप नर्स के सामने अपनी पतलून उतार लेंगे? बीड़ी-सिगरेट मॉंगेंगे? या फिर आप अश्लील गाने सुनेंगे और अस्पताल की महिला कर्मचारियों को भद्दे इशारे करेंगे? आप यह सब कर सकते हैं, क्योंकि आपको वहॉं की Nizamuddin-markazभाषा समझ में नहीं आती। ये हम नहीं कह रहे। ऐसा मानना है कि दिल्ली की आआप सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का। बकौल जैन, “ एक तो भाषा की परेशानी है। ज्यादातर लोगों को ना तो हिंदी आती है और ना ही अंग्रेजी आती है। वे दूर-दूर के राज्यों के हैं। कई विदेशी हैं। दूसरा उनको लगता है कि हमको अस्पताल में क्यों रखा गया है। पुलिस से मदद मॉंगी गई है।” जैन ने यह बात तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा अस्पताल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कही थी। ‘भाषा’ का जैन का तर्क समझ से परे है। वैसे जमात की करतूत पर पर्दा डालने की कोशिश करने वाले केजरीवाल सरकार के मंत्री जैन आआप के अकेले नेता नहीं है। मुख्यमंत्री केजरीवाल  के करीबी माने जाने वाले विधायक अमानतुल्लाह खान ने अपने ट्वीट में जहां दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात का आयोजन करने वाले मौलाना साद का बचाव किया वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी और केरल के राज्यपाल आरिफ़ मुहम्मद खॉं के प्रति अभ्रद शब्दों और भाषा का प्रयोग कर तब्लीगी जमात के बचाव में आगे आ गए। विधायक अमानतुल्लाह खान ने वीडियो पोस्ट करते हुए अपने ट्वीट में लिखा कि ” ये तब्लीग़ी जमात के लोग हैं जिनको दिल्ली के सरकारी स्कूल में आइसोलेशन में रखा गया है, ये बांग्लादेश के रहने वाले हैं, जो ख़ुद अपने कमरों की और लॉबी की सफाई कर रहे हैं, जितना में तबलीग़ी जमात को जानता हूँ वो किसी के साथ बदसलूकी नही कर सकते, हां बीमार कोई भी हो सकता है। ” ऐसे समय जब कोरोना वायरस की महामारी को रोकने के लिए दिल्‍ली सहित पूरे देश में युद्ध स्‍तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, दिल्ली के द्वारका के सेक्टर 16B के दिल्ली सरकार के क्वारंटाइन सेंटर में यूरिन से भरी बोतलें फेंकी गई। जमातियों पर यूरिन से भरी यह बोतलें फेंकने का आरोप है। माना जा रहा है कि यूरिन फेंककर कोरोना फैलाने की कोशिश की गई। क्वारंटाइन सेंटर में तैनात सिविल वॉलिंटियर्स ने यह जानकारी दी। पुलिस ने सिविल डिफेंस के सुनील कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच की जा रही है कि आखिर ये जमाती बार बार ऐसी हरकते क्यों कर रहे हैं। इससे पहले भी नरेला में भी इसी तरह की हरकत को अंजाम दिया गया था वहां दो जमातियों ने क्वॉरन्टीन सेंटर के अंदर ही शौच कर दिया। इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद फाद और अदनाम नाम के दो लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। इसके अलावा दिल्ली के बक्करवाला इलाके में भी मोहम्मद इरशाद के खिलाफ मामला दर्ज किया है उस पर आरोप है कि उसने मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजी की और उनपर थूक दिया सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार ये लोग ऐसी गंदी हरकतों को क्यों अंजाम दे रहे है क्या ये कोई साजिश है या फिर ये जानबूझकर कर ये सब कर रहे हैं क्योंकि ये सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों से तब्लीगी जमात के लोग ऐसी ही हरकतों को अंजाम दे रहे हैं।

दिल्ली के दंगों में केजरीवाल सरकार और आआप नेताओं की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल 

tahir-hussain-video_202002146676गौरतलब है कि नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर तबलीगी जमात ने दिल्ली में मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों के अलावा विदेशियों ने भी शिरकत की। खुद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया था कि निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से अभियान चलाकर 2361 लोगों को निकाला गया था। ये दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों और क्वारंटाइन में हैं। हालत यह है कि देश के 19 राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण के ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है जो तब्लीगी जमात की मरकज से जुड़े हैं। पर जिस तरह से तब्लीगी जमात के लोगों की करतूतों पर कभी भाषा के नाम पर तो कभी किसी और ढंग से पर्दा डालने की कोशिश की, ऐसा ही कुछ बीते फरवरी माह में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान भी देखने को मिला था। उसे दंगे का आआप पार्षद ताहिर हुसैन मुख्य सूत्रधार बनकर उभरा था। उस पर आरोप है कि उसके घर से हिंदुओं को निशाना बनाकर पेट्रोल बम फेंके गए। आईबी के अंकित शर्मा की हत्या को लेकर भी कटघरे में है। हांलाकि जब ताहिर की संलिप्तता को लेकर लगातार तथ्य सामने आने लगे तो आआप ने उसे निलंबित कर पल्ला झाड़ लिया। लेकिन,अमानतुल्लाह जैसे आआप विधायक फिर भी उसका बचाव करते रहे। अमानतुल्लाह ने आरोप लगाया था कि मुसलमान होने के कारण ताहिर को फंसाया गया है। दंगों में अमानतुल्लाह ही नहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर आआप सांसद संजय सिंह की बयानबाजी और उनके आआप पार्षद ताहिर हुसैन से दंगों के आस पास फोन कॉल को लेकर भी उनके विरोधियों ने सवाल उठाए थे। दिल्ली में दंगों को लेकर जांच चल ही रही थी कि कोरोना का संकट सामने आ गए। दिल्ली के दंगों में केजरीवाल सरकार और आआप नेताओं पर भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल और आरोप हैं जो पुलिस की जांच का हिस्सा भी हैं।

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा ने एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया

delhi-assembly-pti_650x400_61502294219दिल्ली दंगों की जांच और दिल्ली में जुटी तब्लीगी जमात के कार्यक्रम के बीच 14 मार्च को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पारित करा अपने दृष्टिकोण को साफ कर दिया। प्रस्ताव में केंद्र की मोदी सरकार से अपील की गई है कि वह खासकर कोरोना महामारी के बढ़ते खतरे, बेरोजगारी बढ़ने और अर्थव्यवस्था की खराब होती हालत के बीच देश हित में एनआरसी और एनपीआर की पूरी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाएं और इसे वापस लें। इसमें कहा गया है कि यदि भारत सरकार को इसके साथ आगे बढ़ना है तो केवल एनपीआर को उसके 2010 के प्रारूप में ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए और इसमें कोई नया प्रावधान शामिल नहीं करना चाहिए। एनपीआर और एनआरसी पर चर्चा के लिए बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से इन्हें वापस लेने की अपील की।केजरीवाल ने सवाल किया कि मेरे, मेरी पत्नी, मेरे पूरे कैबिनेट के पास नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। क्या हमें निरोध केंद्र भेजा जाएगा? केजरीवाल ने विधानसभा में विधायकों से कहा कि यदि उनके पास जन्म प्रमाण पत्र हैं, तो वे हाथ उठाएं। इसके बाद दिल्ली विधानसभा के 70 सदस्यों में से केवल नौ विधायकों ने हाथ उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में 61 सदस्यों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं। क्या उन्हें निरोध केंद्र भेजा जाएगा? यह सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि यदि एनपीआर को अगले महीने से लागू किया जाता है तो केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि वे हिंदू भी प्रभावित होंगे जिनके पास सरकारी एजेंसी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हिंदू मुसलमान का उल्लेख करते हुए नागरिकता देने न देने को लेकर भी कई बाते कहीं।इन बातों का लगभग वही मतलब था जिसे लेकर दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले शाहीनबाग का धरना शुरू किया गया था।

दिल्ली में मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद आम आदमी पार्टी 

AAP-Muslim-Delhi-Polls-1200x900-1शाहीनबाग धरने का आधार नगरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और एनआरसी जैसे मुदृों को बनाया गया था। शाहीनबाग ओखला विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसी क्षेत्र से अमानतुल्ला खान आआप के विधायक न केवल विधायक हैं बल्कि दिल्ली की मुस्लिम राजनीति में तेजी से उभरे हैं। शाहीनबाग का धरना हो या जामिया मिलिया इस्लामियां विवि के कुछ छात्रों का प्रदर्शन हो और उस प्रदर्शन में हुई हिंसा का मामला हो आआप विधायक अमानतुल्ला आक्रमक ढंग से आगे नजर आए। इस आक्रमकता का असर भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखने को मिला और आआप आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर पहले से बेहतर प्रदर्शन किया और इन सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई। दिल्ली में मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी बनी। अमानतुल्ला खान रिकॉर्ड मतों से जीतकर पार्टी का मुस्लिम चेहरा बन गए हैं।दिल्ली में एक दौर में मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद कांग्रेस हुआ करती थी, लेकिन अब ये सोच पूरी तरह से बदल गई हैं। दिल्ली में 12 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं और एक दर्जन सीटों पर उनका प्रभाव है।आआप पांच मुस्लिम विधायक जीतने में कामयाब रहे हैं जबकि कांग्रेस उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा सके।दिल्ली चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवारों ने औसतन 21 हजार वोटों से जीत दर्ज की है वहीं, मुस्लिम प्रत्याशियों की जीत का अंतर औसतन 43 हजार वोटों का रहा। दिल्ली में मुस्लिम विधायकों में सबसे बड़ी जीत अमानतुल्ला ने दर्ज की है और रिकॉर्ड मतों से जीतने वाले दूसरे नंबर के विधायक हैं।

मस्जिदों के इमाम और मोअज्जिन की सैलरी बढ़ाने का फैसला 

kejriwal muslimमुख्यमंत्री केजरीवाल ने अमानतुल्ला को वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनाया तो आआप ने दिल्ली में मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ को और भी मजबूत किया।अमानतुल्ला के जरिए केजरीवाल सरकार ने मस्जिदों के इमाम और मोअज्जिन की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया। अमानतुल्ला ने दिल्ली में वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आने वाली 300 मस्जिदों के इमामों को 18000 रुपये जबकि मोअज्जिन को 16000 रुपये मासिक सैलरी देने का कदम उठाया। अमनातुल्ला खान ने वक्फ बोर्ड के जरिए दिल्ली ही नहीं बल्कि देश भर में मॉब लिचिंग के शिकार परिवारों को आर्थिक मदद दिया। झारखंड के तबरेज अंसारी की पत्नी को उन्होंने वक्फ बोर्ड की ओर से पांच लाख रुपये और नौकरी का ऐलान किया था। इसी तरह से सीएए और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प में जिन लोगों की मौत हुई थी उनके परिजनों को दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 5-5 लाख रुपये देने का ऐलान किया था। जाहिर तौर पर अपने कार्यकाल में अमानतुल्ला ने जो भी फैसले लिए वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सलाह करके या उनसे मिले आदेश के आधार पर ही किए। जाहिर है दिल्ली के निजामुद्दीन में मुस्लिम संगठन तबलीगी जमात के कार्यक्रम के आयोजन के बाद दिल्ली ओर देश के दूसरों राज्यों में कोरोना संक्रमित जमाती ओर उनकी हरकतें सामने आइ हें उसने कई सवाल खडे कर हैं उनमें से एक सवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनकी सरकार और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी पर दिल्ली में मुस्लिम परस्त राजनीति करने का है। आने वाले दिनों में दिल्ली के दंगों से लेकर शाहीनबाग और तब्लीगी जमात के आयोजन से लेकर योजनाओं में हिन्दू मुसलमानों के बीच भेदभाव संबंधी आरोपों और सवालों का सामना मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी को करना पडेगा।

manoj verma

 

लेखक मनोज वर्मा  वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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