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बागपत में महाभारत कालीन ‘राज परिवार’ के अवशेष

asi_1024_1532936660_618x347दिल्ली के लाल किले में स्थ‍ित पुरातात्विक संस्थान में एक कहानी को फिर से रचने की कोश‍िश की जा रही है. इसमें मदद मिल रही तीन ताबूत, कंकालों, रथ, तलवारों आदि के अवशेष से, जो एएसआई को हाल में यूपी के बागपत से खुदाई में मिले हैं. इन अवशेषों को महाभारत कालीन बताया जा रहा है.भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) को यूपी के बागपत जिले में स्थ‍ित सनौली में गत जून माह में एक स्थल पर खुदाई में तमाम प्राचीन अवशेष मिले थे. इन अवशेषों को पूर्व लौह युग से लेकर कांस्य युग (2000 से 1800 ईसा पूर्व, महाभारत काल भी लगभग इसी को माना जाता है) का माना जा रहा है. इन अवशेषों को दिल्ली के लाल किले में लाया गया है. पुरातत्व विभाग के जानकारों के मुताबिक यह अवशेष एक शाही योद्धा परिवार के लगते हैं.हालांकि पुरातत्वविद अभी इसे किसी निश्चित नस्ल या सभ्यता से जोड़ना मुनासिब नहीं समझते, लेकिन यह बात गौर करने की है कि खुदाई स्थल सनौली कौरवों की राजधानी माने जाने वाले हस्तिनापुर के पास स्थित है. महाभारत का काल भी 2000 ईसा पूर्व (BC) के आसपास माना जाता है.

लाल किले में इन अवशेषों पर रिसर्च कर रहे पुरातत्वविद अर्विन और संजय मंजुल ने हमारे सहयोगी प्रकाशन मेल टुडे को बताया कि इनको लेकर कई तरह के परीक्षण और अध्ययन किए जा रहे हैं. इसके द्वारा यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जिन लोगों के कंकाल या अन्य अवशेष मिले हैं उनका रहन-सहन किस तरह का था और उनकी मौत कैसे हुई?

पहली बार मिला रथ

 यह खोज हमारे प्राचीन इतिहास को जानने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्कियोलॉजी के निदेशक संजय मंजुल ने कहा कि इससे प्राचीन इतिहास के अध्ययन को एक नया आयाम मिलेगा. उन्होंने कहा कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पहली बार किसी खनन स्थल से रथ के अवशेष मिले हैं.इसके पहले इस तरह के रथ के अवशेष सिर्फ ग्रीक और मेसोपोटामिया में ही मिले थे. यही नहीं, इस कालखंड की मूठ वाली तलवार भी पहली बार मिली है. इनके अलावा एक चारपाई जैसा ताबूत भी मिला है जिस पर तांबे के पत्ते का डिजाइन है. खनन स्थल पर दबे आठ कब्र पाए गए, जिसमें एक कुत्ते का भी शव था. इन शवों के पास कायदे से बर्तनों में अनाज, शीशा, कंघी, सोने के मनके आदि रखे गए थे, जो अक्सर हिंदू लोग मृतकों के शव के पास रखते हैं अपने पितरों के लिए. इतने कायदे से तो हड़प्पा काल के कब्र में भी सामान नहीं पाए गए थे.इन कब्रों के अध्ययन के लिए पहली बार सीटी-स्कैन, एक्सरे और इंफ्रा रेड फोटोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.
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