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….मजदूर कितना मजबूर

labur accidentमुंबई जिस रोटी की तलाश में घर से निकले थे, वह उनके बेजान शरीर के पास बिखरी पड़ी हैं। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मालगाड़ी से 16 मजदूरों के कटने का मंजर दिल को चीर रहा है। खामोश पटरियों पर मौत का सन्नाटा पसरा है। लॉकडाउन के चलते ये सभी मजदूर अपने घर जाने के लिए 40 किलोमीटर चलकर आए थे। थकान ज्यादा लगी, तो पटरी पर सो गए। लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका सफर यही खत्म हो जाएगा।कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच ट्रेनें नहीं चल रही। हो सकता पैदल चलते वक्त इन लोगों को कोई ट्रेन मिली भी न हो। ऐसे में रात में थककर इन्होंने पटरी पर ही बिस्तर लगा लिया। यही इनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। सुबह-सुबह वहां से एक ट्रेन (माल गाड़ी) गुजरी और इन्हें मौत की नींद सुला गई।लॉकडाउन के बीच हूई इस हादसे ने देश में मजदूर कितना मजबूर है इसे साबित कर दिया है। रोजी रोटी मजदूर की मजूबरी है पर यह हादसा देश की व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। कोरोना के इस संकट में मजूदर दर दर की ठोकरे खा रहे है। 

पटरी पर बिखरी थीं रोटियां, सामान और लाश
labur rotiपटरी के पास का सुबह का मंजर डरानेवाला था। पटरी पर हर तरफ लाशें पड़ी थीं। पटरी पर ही इन लोगों का सामान और रोटियां बिखरी थीं जो ये लोग सफर के लिए लाए होंगे। आसपास के लोग दूर से ही वीडियोज बना रहे थे। इतने भयानक मंजर के पास जाने की कोई हिम्मत नहीं कर पाया।हादसे में जिंदा बच गए मजदूरों ने इस दर्दनाक हादसे का आंखों देखा हाल बयां किया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने रूह कंपा देने वाली घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे वे फैक्ट्री से घर जाने की उम्मीद में निकले और उनके 16 साथी रास्ते में ही हमेशा की नींद सो गए।

स्टील फैक्ट्री से शाम को चले मजदूर
जालना जिले के एसपी एस. चैतन्य ने जानकारी देते हुए बताया, ‘हादसे का शिकार हुए मजदूर यहां एसआरजी स्टील कंपनी में काम करते थे। उनकी उम्र 20 से 35 साल के बीच थी। एसआरजी स्टील मिल के 21 मजदूर पैदल ही laburऔरंगाबाद की तरफ निकल पड़े। मजदूरों ने औरंगाबाद जाने का निर्णय किया क्योंकि उन्हें लगा कि उन्हें वहां से मध्य प्रदेश के लिए ट्रेन मिल सकती है।’
रातभर चलने से थकान, बैठते ही आई गहरी नींद
करमाड के पुलिस अधिकारी ने जिंदा बचे प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया, ‘हम सभी ने गुरुवार शाम सात बजे जालना से चलना शुरू किया और लगभग 36 किलोमीटर चलने के बाद पटरियों पर आराम करने का निर्णय किया। रातभर पैदल चलने के बाद हम सब बेहद थके हुए थे। थोड़ी देर आराम करने के इरादे से सभी ने लेटने का फैसला किया। 16 पटरियों पर ही सो गए जबकि बाकी हम 3 लोग थोड़ी दूर पर लेट गए। बुरी तरह से थकान की वजह से सभी को गहरी नींद आ गई।’
‘हमने चिल्लाकर जगाना चाहा लेकिन…सब खत्म’
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘हम 3 लोग पीछे थे, जबकि वे सभी आगे। हम समतल जमीन पर सोए हुए थे। सुबह के वक्त सवा 5 बजे हमने अचानक एक मालगाड़ी को आते देखा और चिल्लाए लेकिन किसी को कुछ सुनाई नहीं दिया। हमने जोर-जोर से चिल्लाकर सोते हुए अपने साथियों को जगाने की कोशिश की लेकिन सब बेकार रहा और ट्रेन मजदूरों के ऊपर से निकल गई।’रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि मालगाड़ी में पेट्रोल के खाली कंटेनर थे और यह मनमाड तहसील स्थित पानेवाडी जा रही थी। दुर्घटना के बाद यह अगले स्टेशन पर रुक गई। इस संबंध में एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मृतकों के शव आज बाद में ट्रेन के जरिए जबलपुर ले जाए जाएंगे। एक अधिकारी के अनुसार ये सभी जिस फैक्ट्री में काम करते थे, उसके मालिक या फिर जिला प्रशासन को बताए बगैर ही निकल गए थे।

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