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मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी, नीचे गैर इस्लामी ढांचा था

Ayodhya-Verdict-Supreme-Courtनई दिल्ली।अयोध्या मामले में फैसला देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद में अपना दावा रखने में विफल हुआ है। मुस्लिम पक्ष ऐसे सबूत पेश करने में विफल रहा है कि विवादित जमीन पर सिर्फ उसका ही अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्ट है कि मुस्लिम अंदर नमाज पढ़ा करते थे और हिंदू बाहरी परिसर में पूजा किया करते थे। हालांकि हिंदुओं ने गर्भगृह पर भी अपना दावा कर दिया. जबकि मुस्लिमों ने मस्जिद को छोड़ा नहीं था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में एएसआई के रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एएसआई रिपोर्ट के मुताबिक बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में मस्जिद के नीचे मन्दिरनुमा गैर इस्लामी ढांचे की बात कही।हिंदुओं की आस्था और उनका यह विश्वास की मस्जिद से पहले वहां मंदिर था. लिहाजा राम जन्मस्थान वही जगह है जहां मस्जिद थी. यह आस्था और विश्वास दस्तावेजों और मौखिक रूप से साबित हुआ.जबकि मुस्लिम पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि बाबरी मस्जिद बनने के पहले भी उसका कब्जा था। न्यायालय ने कहा कि हिन्दू यह साबित करने में सफल रहे हैं कि विवादित ढांचे के बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था और उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्योध्या विवाद में अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। संविधान पीठ ने यह माना कि विवादित स्थल के बाहरी बरामदे में हिन्दुओं द्वारा व्यापक रूप से पूजा अर्चना की जाती रही है और साक्ष्यों से पता चलता है कि मस्जिद में शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते थे जो इस बात का सूचक है कि उन्होंने इस स्थान पर कब्जा छोड़ा नहीं था।

संविधान पीठ ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे मिली संरचना इस्लामिक नहीं थी लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह साबित नहीं किया कि क्या मस्जिद निर्माण के लिये मंदिर गिराया गया था। न्यायालय ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों को महज राय बताना इस संस्था के साथ अन्याय होगा। न्यायालय ने कहा कि हिन्दू विवादित स्थल को ही भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं और मुस्लिम भी इस स्थान के बारे में यही कहते हैं। पीठ ने कहा कि विवादित ढांचे में ही भगवान राम का जन्म होने के बारे में हिन्दुओं की आस्था अविवादित है। यही नहीं, सीता रसोई, राम चबूतरा और भण्डार गृह की उपस्थिति इस स्थान के धार्मिक तथ्य की गवाह हैं।

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना एतिहासिक फैसला सुना दिया। इससे अयोध्या में राममंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया। मुसलमानों को भी अयोध्या में ही पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन मिलेगी। इसके साथ ही लम्बे समय से जारी इस विवादास्पद मामले का पटाक्षेप हो गया।उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारुकी ने बड़ा बयान दिया है। फारुकी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बोर्ड अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम पहले से कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसे दिल से माना जाएगा। बता दें कि इस केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड एक अहम पक्षकार है। उन्होंने फैसले को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर कहा कि ओवैसी सुन्नी वक्फ बोर्ड का हिस्सा नहीं है। अगर वे इस संबंध में किसी भी तरह का बयान दे रहे हैं तो वह उनका व्यक्तिगत नजरिया होगा। बोर्ड का उस शख्स या किसी संगठन से लेना-देना नहीं है। फारुकी ने कहा ओवैसी कौन हैं, मैं उनको नहीं जानता और न ही कभी उनसे मिला हूं।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और केन्द्र को निर्देश दिया कि नयी मस्जिद के निर्माण के लिये सुन्नी वक्फ बोर्ड को प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ का भूखंड आवंटित किया जाए। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील 134 साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असंतुष्टि जताई और कहा कि मैं इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। साथ ही मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ओवैसी ने ये कहकर मानने से इनकार कर दिया कि हम खैरात की जमीन नहीं ले सकते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह उनका निजि विचार है, मगर सुन्नी बक्फ बोर्ड को इसका फैसला लेना है कि वह इस जमीन के प्रस्ताव को मानते हैं या नहीं।

ओवैसी ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन्होंने बाबरी मस्जिद को ढाहा, आज उन्हीं को सुप्रीम कोर्ट कह रही है कि ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाइए। अगर मस्जिद वहां रहती और वह शहीद नहीं होती तो क्या यही फैसला आता। मुझे नहीं मालूम। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम है, मगर इन्फैलेबेल नहीं है। बता दें ओवैसी की तरह ही उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस निर्णय पर असंतोष व्यक्त करते हुये कहा है कि वह इस फैसले पर विचार करेगा कि कोर्ट में चुनौती देनी है या नहीं। इस विवाद ने देश के सामाजिक और साम्प्रदायिक सद्भाव के ताने बाने को तार तार कर दिया था।उन्होंने कहा कि हम अपने कानूनी अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। हिन्दुस्तान का मुसलमान इतना गिरा नहीं है कि वो 5 एकड़ की जमीन भीख लेंगे। हम ऐसे ही मांगने चले जाएंगे तो हमें इससे ज्यादा जमीन मिल जाएगी। हमें 5 एकड़ जमीन खैरात नहीं चाहिए। हमें किसी से भीख की जरूरत नहीं है। मुस्लिम बोर्ड क्या फैसला लेगा ये उनका मसला है। मेरी निजी राय है कि हमें पांच एकड़ के प्रस्ताव को रिजेक्ट करना चाहिए। हमें कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए।ओवैसी ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। भारत के नागरिक होने के नाते मेरा अधिकार है कि मैं कोर्ट के फैसले से असंतुष्टि जताऊं। क्या इस देश में हमें बोलने की आजादी नहीं है। मुल्क हिन्दू राष्ट्र के रास्ते पर जा रहा है। संघ इसे अयोध्या से शुरुआत करेगी। एनआरसी का भी वो इस्तेमाल करेगी। ओवैसी ने आगे कहा कि मैं अपनी निजि घर का सौदा कर सकता हूं, मगर मस्जिद की जमीन का सौदा नहीं कर सकता हूं।

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