Pages Navigation Menu

Breaking News

संघ कार्यालय पर संघी-कांग्रेसियों ने फहराया तिरंगा
पंपोर में मुठभेड़ में तीनों आतंकवादी मारे गए  
वाराणसी में केजरीवाल को दिखाए काले झंडे

अयोध्या की जमीन पर रामलला विराजमान का हक ; सुप्रीम कोर्ट

ram-mandir-ayodhya-shaurya-diwasसुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले में आज यानी 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया. कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया. फैसले में विवादित जमीन पर राम लला विराजमान का हक माना गया है. इसको लेकर कोर्ट ने तीन महीने में मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने के लिए कहा है.कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जगह देने का आदेश दिया है. बता दें कि अयोध्या मामले में पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने फैसला सुनाया. इसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की. इस बेंच में जस्टिस एसए बोबडे जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और डीवाई चंद्रचूड़ शामिल रहे.अयोध्या पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला सुनाते हुए निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया. कोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है. मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा है. कोर्ट ने कहा ‘बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर नहीं हुआ था.’बेंच ने कहा कि मुसलमान अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए. 6 दिसंबर 1992 को ढांचा ढहा दिया गया था. 16 दिसंबर को 1949 को आखिरी नमाज यहां अदा की गई थी, जबकि हिंदू निर्विवाद रूप से बाहर पूजा करते रहे. बेंच ने कहा कि संविधान के मुताबिक, बराबरी होनी चाहिए, सभी बराबर है. बेंच ने कहा कि बाहरी अहाता हिंदुओं के निर्विवाद अधिकार में रहा है. बाहरी अहाते में रामचबूतरा सीता रसोई में पूजा होती थी.बेंच ने कहा कि 1934 में दंगे हुए थे. उसके बाद से मुसलमानों का एक्सक्लूसिव अधिकार आंतरिक अहाते में नहीं रहा. हालांकि 1949 दिसंबर तक मुस्लिम शुक्रवार जमाज अदा करते थे. वहीं, हिंदू बाहर 1885 से चबूतरे पर पूजा करते थे. वहां नमाज और पूजा साथ-साथ होती थी. बेंच ने कहा कि रेलिंग लगना लगातार संघर्ष और विवाद का गवाह है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर राम लला विराजमान का हक है. इसको लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाए. कोर्ट ने कहा कि तीन महीने में सरकार योजना बनाए. अदालत ने मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ वैकल्पिक जगह देने का आदेश दिया है.

 

  • न्यायालय ने निर्मोही अखाड़े की समूची विवादित जमीन पर दावे की याचिका को खारिज की।
  • न्यायालय ने केंद्र को मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने में योजना तैयार करने और न्यास बनाने का निर्देश दिया।
  • न्यायालय ने मुसलमानों को नयी मस्जिद बनाने के लिये वैकल्पिक जमीन आवंटिक करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन हिन्दुओं को मंदिर के लिए दी जाएगी।
  • बाबरी मस्जिद को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ था : न्यायालय।
  • हिंदू ये स्थापित करने में सफल रहे कि बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था : न्यायालय।
  • स्थल पर 1856-57 में लोहे की रेलिंग लगाई गई थी जो यह संकेत देते हैं कि हिंदू यहां पूजा करते रहे हैं : न्यायालय।
  • साक्ष्यों से पता चलता है कि मुसलमान मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करते थे जो यह संकेत देता है कि उन्होंने यहां कब्जा नहीं खोया है : न्यायालय।
  • हिंदुओं की यह अविवादित मान्यता है कि भगवान राम का जन्म गिराई गयी संरचना मं ही हुआ था : न्यायालय।
  • हिंदू इस स्थान को भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं, यहां तक कि मुसलमान भी विवादित स्थल के बारे में यही कहते हैं: न्यायालय।
  • एएसआई यह नहीं बता पाया कि क्या मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी: न्यायालय।
  • एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था : न्यायालय।
  • बुनियादी संरचना इस्लामिक ढांचा नहीं थी : न्यायालय।
  • बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी : न्यायालय।
  • न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।
  • न्यायालय ने विवादित स्थल पर पुरातात्विक साक्ष्यों को महत्व दिया।
  • न्यायालय ने कहा, राम जन्मभूमि एक न्याय सम्मत व्यक्ति नहीं।
  • न्यायालय ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की याचिका कानूनी समय सीमा के दायरे में नहीं, न ही वह रखरखाव या राम लला के उपासक।
  • न्यायालय अब पूजा के अधिकार के लिये गोपाल सिंह विशारद के दावे पर फैसला सुना रहा है।
  • न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है ।
  • न्यायालय ने सर्वसम्मति से शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज की। शिया वक्फ बोर्ड का दावा विवादित ढांचे को लेकर था जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।

 

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *