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अराजकता की राजनीति देश के लिए खतरनाक; मेयर डा.उमेश गौतम

papa book newबरेली।मेयर डा.उमेश गौतम ने कहा कि अराजकता की राजनीति देश के लिए खतरनाक है ऐसी राजनीति करने वालों से लोगों को सावधान रहना चाहिए। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है अराजकता का नहीं। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर दिल्ली में जो दंगे हुए और जो तथ्य उभर कर सामने आ रहे हैं उससे षडयंत्र का पता चलता है। मेयर डा.उमेश गौतम ने यह बात एडवोकेट श्याम मनोहर वर्मा से भेंट वार्ता के दौरान कही। एडवोकेट श्याम मनोहर वर्मा ने दिल्ली दंगों के पीछे सुनियोजित साजिश होने का खुलासा करती किताब एनाटॉमी ऑफ ए प्लान्ड रॉयट्स मेयर डा.उमेश गौतम का भेंट की। डा.उमेश गौतम ने कहा कि कानून की दृष्टि से तथ्यों को उजागर करती यह किताब खासी महत्वपूर्ण हैं। गौरतलब है कि सिक्किम हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस प्रमोद कोहली और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एमसी गर्ग ने एनाटॉमी ऑफ ए प्लान्ड रॉयट्स का दिल्ली में विमोचन किया था।

लेखक और वरिष्ठ टीवी पत्रकार मनोज वर्मा और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संदीप महापात्रा द्धारा लिखी गयी इस किताब में एनाटॉमी आफ ए प्लांड रायट पुस्तक दिल्ली में हुए दंगों पर शोध आधारित तथ्यात्मक सामग्री है।यश पब्लिकेशन ने इसे प्रकाशित किया है। यह पुस्तक दंगे की खतरनाक अर्बन नक्सल-जिहादी गठजोड़ को परत दर परत खोलती है। यह किताब दंगों के पीछे की एक बड़ी साजिश का खुलासा करने का दावा करती है। इस किताब, में कहा गया है, ‘घोषित तथ्यों से हमने जो पाया….उसके मुताबिक सीएए विरोधी प्रदर्शन और दिल्ली दंगों का घटनाक्रम पूरी तौर पर एक-दूसरे से जुड़ा है। इसके मुताबिक, ‘दंगों और प्रदर्शनों में आगे नजर आने वाले चेहरे दरअसल शतरंज के मोहरों की तरह हैं जिन्हें नियंत्रित करने वाले राजा या वजीर सामान्य तौर पर पर्दे के पीछे ही रहते हैं।’

delhi-roits-1delhi-roits-2गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर जारी विरोध के बीच ही पिछले साल 23 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे थे, जिस दिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक दिन की आधिकारिक यात्रा पर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे थे. हालिया वर्षों में हिंसा की सबसे घटनाओं में से एक माने जाने वाले इन दंगों के दौरान 53 लोग मारे गए और 500 से अधिक घायल हुए।दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 700 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं। पत्रकार मनोज वर्मा ने बताया कि एनोटोमी आफ ए प्लांड रायट को लिखने के पीछे उन तथ्यों को लोगों के सामने लाना है जो यह साबित करता है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे संयोग नहीं भारत विरोधी प्रयोग थे और इसकी प्रयोगशाला बनी दिल्ली।सीएए विरोध के नाम पर दिल्ली में हिंसक प्रदर्शन,दंगे,पुलिस कर्मियों पर हमले गृह युद्ध जैसा प्रयोग थे। इस प्रयोगशाला में नफरत थी। हार की हताश थी और राष्ट्र हित में एक एक कर हो रहे फैसलों से उपजी कुंठा थी। यह हताशा थी 2019 के चुनाव परिणाम की। दिल्ली का दंगा सामान्य दंगा नहीं था। भारत विरोधी षडयंत्र था। इसके तीन कोण नजर आते हैं पहला देश के खिलाफ षडयंत्र, दूसरा देश की लोकतांत्रिक संसदीय और संवैधानिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह और तीसरा मीडिया। यह घटना मीडिया के एक वर्ग की फेक नकारात्मक भूमिका की ओर संकेत करता है दिल्ली के दंगों के पीछे अंतर्राष्ट्रीय साजिश थी।

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