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“भारत बंद” के दिन ही सरकार ने पांच पी.एस.यू बेच दिए

sandipनई दिल्ली,( संदीप ठाकुर) । गत 8 जनवरी काे एक ओर जहां लाखाें मजदूर,किसान,कर्मचारी और छात्र माेदी सरकार की निजीकरण की नीतियाें के विराेध में भारत बंद का नारा बुलंद करते हुए सड़काें पर राेजी राेजगार काे लेकर हाय हाय के नारे लगा रहे थे वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पांच पी.एस.यू काे बेचने की मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्रीमंडल द्वारा मंजूरी मिलने के बाद जिन पी.एस.यू. के बिक्री का रास्ता साफ हाे गया उनमें भारत हैवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड(बी.एच.ई.एल),मिनरल्स एंड मैटल्स ट्रेनिंग कॉरपाेरेशन लिमिटेड(एम.एम.टी,सी), नेशनल मिनरल ़डेवलपमेंट कॉरपाेरेशन(एन.एम.डी.सी),नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड(एन.आई.एन.एल) व मैटेलर्जिकल एंड इंजीनयरिंग कंसलटेट लिमिटेड (एम.ई.सी.ओ.एन) है। सरकार की बहुमत की दबंगई का इससे बेहतरीन मिसाल और क्या हाे सकती है। आखिर सार्वजनिक क्षेत्र के बेहतरीन प्रतिष्ठानाें काे माेदी सरकार बेचने पर आमदा क्याें है ? आखिर सरकार के सामने ऐसी क्या मजबूरी है ? बनी बनाई संपत्ति ताे तब बेची जाती है जब काेई संकट या विपदा आई हाे। इस वित्तीय वर्ष में क्या केद्र सरकार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है । जी हां,देश गंभीर आर्थिक चुनाैतियाें से जूझ रहा है। वित्त मंत्रालय के सूत्राें के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष के पिछले चार महीने दिसंबर,जनवरी,फरवरी और मार्च के आंकड़ाें काे शामिल किए बगैर राजकाेषीय घाटा अप्रैल से नवंबर तक ही 8.08 खरब रुपए के पार जा चुका है जाे बजट में दिखाए गए पूरे साल के राजकाेषीय घाटे से 15 प्रतिशत अधिक है। इस घाटे की
भरपाई करने का काेई उपाय सरकार के पास नहीं है । सरकार महत्त्वपूर्ण और प्रॉफिटेबल प्रतिष्ठानाें काे बेच कर यह घाटा पूरा करना चाहती है। सनद रहे कि सरकार ने सीना ठाेक कर घाेषणा की थी कि वह चालू वित्त वर्ष के दाैरान 24.61 लाख कराेड़ रुपए का कुल टैक्स राजस्व जुटाएगी। लेकिन पहले आठ महीनाें में सरकार उसका महज 48 प्रतिशत हिस्सा ही जुटा पाई है। सरकारी की बैचैनी का सवब यही है। दावे जाे भी हाें लेकिन अर्थव्यवस्था मंद हाेते हाेते रेंगने की स्थिति में आ गई है। वित्त वर्ष समाप्त हाेने के शेष बचे महीनाें में आमदनी का काेई ठाेस जरिया सरकार काे दिख नहीं रहा है। इसलिए सरकार इसकी भरपाई सरकारी क्षेत्र के बेशकीमती व कमाऊ प्रतिष्ठानाें काे बेच कर करना चाह रही है। इसकी पुष्टि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक बयान से भी हाेती है। याद हाे कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ माह पहले ही  घाेषणा की थी कि देश के 28 पी.एस.यू. काे सरकार मार्च 2020 तक बेच देगी। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में 24.61 खरब आय का लक्ष्य तय किया था।
लेकिन अभी तक तय लक्ष्य से आधा से भी कम सरकारी खजाने में आया है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियाें व अर्थशास्त्रियाें का मानना है कि इस बात की संभावना बेहद कम है कि दिसम्बर 2019 से मार्च 2020 के बीच बची हुई 52 प्रतिशत सरकारी खजाने में आ पाएगी।

 

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