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महागठबंधन से अलग हुए कुशवाहा,सवाल क्‍या NDA में जाएंगे ?

tejashwi kushwahaचुनावी सुगबुगाहट के बीच बिहार में एनडीए और महागठबंधन दोनों की गांठ कमजोर होती दिख रही है। एनडीए में जहां लोजपा तो महागठबंधन में रालोसपा के तेवर ढीले होते नहीं दिख रहे हैं। लोजपा जहां सीधे सरकार को चुनौती दे रही है तो रालोसपा ने गुरुवार को दो टूक कह दिया कि सीएम नीतीश कुमार के सामने राजद जिस नेतृत्व (तेजस्वी) को सामने ला रहा है, उस मुकाबले में महागठबंधन कहीं नहीं टिकेगा। लोजपा और रालोसपा के इस तेवर से यह अर्थ निकाला जा रहा है कि जल्द ही दोनों दल अपने-अपने गठबंधन से अलग होने का औपचारिक ऐलान कर दें।

गुरुवार को हुई रालोसपा की बैठक में जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय कमिटि ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि दल किस गठबंधन में रहेगा, इसका निर्णय उपेन्द्र कुशवाहा लेंगे। महागठबंधन में रहने या नहीं रहने को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा को अधिकृत कर दिया है। महागठबंधन में बने रहने को लेकर तमाम कोशिशों का उल्लेख करते हुए पार्टी ने कहा है कि राजद के व्यवहार के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि अब निर्णय लेने का समय आ गया है।वहीं उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि महागठबंधन में अभी जो परिस्थिति है, उस पर विचार करते हुए पार्टी ने मुझे अधिकृत किया है। मैं सोच समझकर बिहार की जनता और अपने कार्यकर्ताओं के हित का ख्याल करते हुए निर्णय लूंगा।आरएलएसपी ने महागठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि आरजेडी अपना नेतृत्व बदल दे तो वे फिर से महागठबंधन में शामिल हो जाएंगे। गुरुवार को आपात बैठक में पार्टी कार्यकारिणी ने उन्हें गठबंधन के जरिये या स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया। कुशवाहा ने कहा कि आरजेडी का तेजस्‍वी यादव का मौजूदा नेतृत्व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के सामने टिकता नहीं दिख रहा है। आरजेडी नेतृत्व एकतरफा फैसले भी लेता रहा है। इस कारण महागठबंधन के दलों के बीच सीटों के सवाल सहित कई मामलामें में अनिश्चितता कायम है। ऐसी स्थिति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एनडीए को लाभ पहुंचा रही है।महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे थे। उनकी बातें नहीं सुनी जा रहीं थीं। सीटों के सम्‍मानजनक बंटवारे को लेकर कांग्रेस आलाकमान से लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव तक से मुलाकात के बावजूद कोई फैसला नहीं हो सका था। पार्टी के प्रधान महासचिव आनंद माधव कहते हैं कि सीटों को लेकर आश्वासन तक नहीं मिला। ऐसी स्थिति में आरएलएसपी अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र थी। आरएलएससपी के महागठबंधन से अलग होने के लिए आरजेडी और कांग्रेस जिम्‍मेदार हैं।

दूसरी ओर लोजपा ने कहा है कि बिहार की जनता 15 साल बनाम 15 साल के सरकारों को देख चुकी है। इस बार वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जनता एक बेहतर विकल्प ढूंढ़ रही है। लोजपा के प्रदेश प्रधान महासचिव शाहनवाज अहमद कैफी ने कहा है कि बिहार की जनता अब ऐसे व्यक्ति को अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है जो एक पुत्र और सेवक की तरह उनकी सेवा कर सके। दिन-रात राज्य की भलाई के लिए समर्पित हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान सबसे बेहतर विकल्प हैं, जिनके पास राज्य को विकसित बनाने का पूरा रोडमैप है।उन्होंने यह भी कहा है कि हमारे हर कार्यकर्ता की इच्छा है कि विधानसभा के चुनाव में लोजपा 143 सीटों पर लड़े। चिराग पासवान राष्ट्रीय राजनीति को छोड़कर प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हों। ताकि बिहार को एक सच्चा और मेहनतकस जनसेवक मिल सके।

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