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जजों के वेतन में होगी 3 गुना बढ़ोतरी

supreme-court-of-indiaनई दिल्ली:  केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के वेतन और सेवा शर्त संशोधन बिल 2017 को बहस के लिए लोकसभा में पेश किया बिल को सदन में पेश करते हुए कानून मंत्री ने कहा, ‘इस बिल का मकसद 7 वे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना है।’इस बिल के संसद से पास होने के बाद कानून बनने पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की सैलरी 2 लाख 80 हजार रुपये प्रति महीने हो जाएगी जबकि अभी यह 1 लाख रुपये है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों की सैलरी 90 हजार रुपये प्रति महीने से बढ़कर 2 लाख 50 हजार रुपये हो जाएगा। वेतन संशोधन बिल के पास होने के बाद हाई कोर्ट के जजों की सैलरी 80 हजार रुपये प्रति महीने से बढ़कर 2 लाख 25 हजार रुपये हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के वेतन और सेवा शर्त संशोधन बिल 2017 में उन्हें मिलने वाली सभी सुविधाओं को भी संशोधित किया जाएगा। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 25 जज है जबकि देश के 24 हाई कोर्ट में 682 जज नियुक्त हैं। इस बिल का फायदा उन पूर्व जजों को भी मिलेगा जो अपने पद से रिटायर हो चुके हैं।

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सुप्रीम कोर्ट में पांच साल से पुराने केस 30 फीसदी से ज्यादा हैं.

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार एपेक्स कोर्ट में 18 दिसंबर तक 54,719 केस पेंडिंग हैं. पांच साल से ज्यादा तक पेंडिंग रहने वाले केसों की संख्या 15,929 है जो कि कुल केस का 29 फीसदी है. वहीं, 10 साल से ज्यादा तक पेंडिंग पड़े केसों की संख्या 1550 हैं. इन दोनों डाटा को एक साथ देखें तो पांच साल से ज्यादा समय से पेंडिंग केसों की संख्या कुल केसों की एक तिहाई है. हाल ही में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने देश के सभी 24 हाईकोर्ट को चिट्ठी लिख कर कहा था कि छुट्टियों में भी बेंच बैठाएं और पेंडिंग पड़े क्रिमिनल केस की जल्द से जल्द सुनवाई करें और फास्ट ट्रैक आधार पर फैसला दें. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में एक एरियर्स कमेटी भी होती है जो जिला कोर्ट और हाईकोर्ट में पेंडिंग केसों को कम करने के लिए स्टेप्स तैयार करती है.औसतन हर हाईकोर्ट में 1.65 लाख केस पेंडिंग हैं. NJDG में उपलब्ध डेटा के मुताबिक, 26 दिसंबर तक हाईकोर्ट में 34.27 लाख केस पेंडिंग हैं. इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट को शामिल नहीं किया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार के कानून डिपार्टमेंट से उपलब्ध डाटा के मुताबिक वहां 3.2 लाख केस पेंडिंग हैं. ऐसे में 23 हाईकोर्ट को मिलाकर 37.47 लाख केस पेंडिंग हैं.डाटा बताता है कि 34.27 लाख पेंडिंग केस में 7.46 लाख केस 5 से 10 साल पुराने हैं. यह कुल केस का 22 फीसदी है. वहीं, 6.42 लाख केस 10 साल पुराने हैं जो कि कुल केस का 19 फीसदी है. सबको साथ मिलाकर देखें तो लगभग 40 फीसदी केस 5 साल से पेंडिंग पड़ी हुई हैंबता दें कि 24 हाईकोर्ट में 1079 अनुमोदित जजों में 395 जजों की पोस्ट खाली है. यह बताता है कि 36 फीसदी जजों की पोस्ट खाली है. कलकत्ता हाईकोर्ट, कर्नाटक हाईकोर्ट, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, मणीपुर हाईकोर्ट और मेघालय हाईकोर्ट में अप्रूव जजों की संख्या में 50 फीसदी खाली है. देश के अधीनस्थ न्यायालयों (सबऑर्डिनेट कोर्ट) में 2.6 करोड़ केस पेंडिंग हैं. इसमें अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, पुडुचेरी और लक्षदीप के पेंडिंग केस शामिल नहीं हैं.

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