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सोनिया, राहुल, प्रियंका गांधी ने लोगों को भडकाया; भाजपा

sonia sadनई दिल्ली। दिल्ली हिंसा को लेकर राजनीति गर्म हो गई है। विपक्ष जहां भाजपा और केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है। वहीं भाजपा का आरोप है कि हिंसा के लिए विपक्ष और खासतौर पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी जैसे कांग्रेस नेता जिम्मेदार हैं जो दो महीने ने सीएए के खिलाफ बारूद भरने का काम कर रहे थे।यह हिंसा दो दिन की नहीं है बल्कि दो महीने से इसे सुलगाया जा रहा था और लोगों को भड़काया जा रहा था। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी कठघरे में खड़ा किया और कहा कि वह स्थिति सामान्य करने की बजाय विधानसभा मे मारे गए लोगों धर्म बता रहे हैं। यह ओछी राजनीति है।

कांग्रेस नेता सड़क पर उतर गए हैं तो दूसरी ओर से जावडेकर ने सीधे कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने हिंसा में कांग्रेस की भूमिका बताते हुए कहा कि सरकार ने 11 दिसंबर को सीएए पास किया और तीन दिन बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में रैली की। उस रैली में सोनिया गांधी ने कहा – ‘यह आर पार की लड़ाई है, आपको फैसला लेना पड़ेगा कि आप इस पार या उस पार।’ उसी रैली में प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा- ‘लाखों को बंदी बनाया जाएगा, जो नहीं लड़ेगा वह कायर कहलाएगा।’ तो राहुल गांधी ने कहा- ‘डरो मत, कांग्रेस आपके साथ है।’

जावडेकर ने कहा कि ये बयान क्या बताते हैं। जब किसी की नागरिकता नहीं जा रही थी तो ऐसे बयान देकर कांग्रेस नेता ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे जो सामान्य न रहे। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1984 में राजीव गांधी ने ‘बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’ का बयान देकर स्थिति बिगाड़ दी थी उसी तरह सोनिया गांधी का बयान भी गंभीर है। इसे सिर्फ बयान नहीं माना जा सकता है। यह सीधे तौर पर भीड़ को उकसाने के लिए कहा गया था। अब जो हिंसा दिखी उसके पीछे कांग्रेस नेता की भूमिका है। जावडेकर ने मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद , शशि थरूर आदि के भी उदाहरण दिए।

जावडेकर ने विपक्षी नेताओं और समाज के कुछ वर्ग की चुप्पी पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गुरुवार की सुबह से दिखाया जा रहा है कि आप नेता ताहिर खान के घर में घर में असलहा था, दंगे की तैयारी थी लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी चुप है। हिंसा मे पुलिस कांस्टेबल रतनलाल, आईबी आफिसर अंकित शर्मा की शहादत होती है, डीसीपी, एसीपी जख्मी होकर अस्तपाल में भर्ती होते हैं, लेकिन विपक्षी पार्टियां गंदी राजनीति में जुटी हैं। कांग्रेस से आप में आए अमानतुल्ला ने कहा था कि – आपको टोपी पहनने पर पाबंदी लग जाएगी। लोग वहां ‘जिन्ना वाली आजादी’ की मांग कर रहे थे। इन बयानों ने ही दरअसल हिंसा के लिए जमीन तैयार की।गौरतलब है कि अगले तीन दिनों में बजट सत्र का दूसरा भाग शुरू होने वाला है। ऐसे में जिस तरह फिर से आरोप प्रत्यारोप की राजनीति गरमाई है उससे साफ है कि शुरूआती कुछ दिन संसद की कार्यवाही ठप ही रहने वाली है।

 

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