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UP जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बड़ी जीत की ओर BJP

yogi-vs-akhileshलखनऊ: जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा बड़ी जीत की ओर अग्रसर दिख रही है. अब तक गोरखपुर, वाराणसी समेत 25 जनपदों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष  निर्वाचित हो चुके हैं. कई विपक्षी उम्मीदवारों को प्रस्तावक और समर्थक तक नहीं मिल पाए, 13 जिले रहे जहां भाजपा का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया. क्योंकि दूसरी पार्टियों की ओर से नामांकन ही नहीं किया गया तो कुछ जगहों पर नामांकन रद्द भी किए गए.

13 जिलों में भाजपा के निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बने
आगरा से मंजू भदौरिया, गाजियाबाद से ममता त्यागी, मुरादाबाद से डॉ. शेफाली, बुलंदशहर से डॉ. अंतुल तेवतिया, ललितपुर से कैलाश निरंजन, मऊ से मनोज राय, चित्रकूट से अशोक जाटव, गौतमबुद्ध नगर से अमित चौधरी, श्रावस्ती से दद्दन मिश्रा, गोरखपुर से साधना सिंह, बलरामपुर से आरती तिवारी, झांसी से पवन कुमार गौतम और गोंडा से घनश्याम मिश्रा भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए.

 हार से बौखलाई SP ने लगाया सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि 12 जिलों में उनके प्रत्याशियों को नामांकन नहीं दाखिल करने दिया गया. इसके अलावा अन्य जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 38 अन्य सीटों पर सपा और भाजपा के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है. इन सीटों पर 3 जुलाई को मतदान होगा. उसी दिन शाम को ही मतगणना होगी और अगले दिन परिणाम घोषित होंगे. यूपी में कांग्रेस ने सिर्फ रायबरेली सीट पर मनीष सिंह को भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाया है.

सपा ने 11 जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया
समाजवादी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को सेमीफाइनल की तरह ले रही थी. उसे ऐसी हार की उम्मीद नहीं थी. इसी वजह से परिणाम देख पार्टी ने तुरंत एक्शन लेना शुरू कर दिया है. जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में मिली हार के बाद समाजवादी पार्टी ने अपने 11 जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है.

उत्तरप्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजे कुछ इस प्रकार थे
उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान कुल 3050 जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे. सपा के 747, बीजेपी के 666, बीएसपी के 322, कांग्रेस के 77, आम आदमी पार्टी के 64 और 1174 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीते थे. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों से विपक्षी पार्टियों खासकर सपा ने यह माहौल बनाने की कोशिश की कि राज्य में भाजपा की लोकप्रियता ढलान पर है और 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव में अखिलेश की विजय होने वाली है. लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा के सामने सपा कहीं टिक नहीं रही.

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