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कांग्रेस के ब्राह्मण नेता जितिन प्रसाद भाजपा में हुए शामिल

jitin-prasadaपूर्व केंद्रीय मंत्री और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले नेता जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़कर अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद जहां कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है वहीं बीजेपी के लिए जितिन कितने फायदेमंद साबित होने वाले हैं, इस पर भी चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जितिन के जरिए बीजेपी की कोशिश यूपी में ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की होगी, साथ ही उन्हें यूपी बीजेपी में बड़ी भूमिका भी मिल सकती है। जितिन के बीजेपी में जाने से कांग्रेस में गलत संदेश जाएगा। जब आपके कुछ न हो और जो है वो भी चला जाए तो यह बड़ा नुकसान है। यूपी में कांग्रेस के जो 7 विधायक थे वह भी कम हो गए हैं। कांग्रेस के लिए यूपी में बुरी स्थिति है। पिछले 30 साल में कांग्रेस नहीं पनप पाई और अब चुनौती बढ़ती जा रही है।बीजेपी यूपी में अपना सोशल इंजीनियरिंग गठबंधन को बढ़ाने में लगी है बीजेपी से जुड़ने से पहले पिछले साल जितिन प्रसाद ने ब्राह्मण चेतना परिषद नाम से संगठन बनाया था। जितिन ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए जिले वार ब्राह्मण समाज के लोगों से संवाद किया और ब्राह्मण परिवारों से मुलाकात भी की थी।

यूपी की सियासत में ब्राह्मण वोटबैंक के मायने क्या?
यूपी की राजनीति में देखा जाए तो ब्राह्मणों समुदाय का वर्चस्व हमेशा रहा है। यूपी में लगभग 12 फीसदी ब्राह्मण वोट बैंक है। कई विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों की आबादी 20 फीसदी से भी अधिक बताई जाती है। लिहाजा जीत-हार में उनकी भूमिका अहम रहती है। 2007 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने ब्राह्मण-दलित सोशल इंजिनियरिंग के जरिए अकेले दम पर 207 सीटें जीत ली थीं। बीएसपी ने इस चुनाव में 86 टिकट ब्राह्मणों को दिए थे। ऐसे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हर दल की नजर इस वोट बैंक पर है। समाजवादी पार्टी ने भी भगवान परशुराम की प्रतिमाएं स्थापित करने का ऐलान करके ‘ब्राह्मण कार्ड’ खेला था।

कौन हैं जितिन प्रसाद

Jitin-Prasad-BJP-3कांग्रेस पार्टी की यूथ विंग से अपना राजनीतिक सफरनामा शुरू करने वाले जितिन प्रसाद  ने बुधवार को अपनी एक नई सियासी यात्रा का आगाज किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और बीजेपी चीफ जेपी नड्डा की मौजूदगी में जितिन प्रसाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। जितिन प्रसाद पूर्व में मनमोहन सिंह सरकार के मंत्री रहे हैं और उन्हें यूपी में कांग्रेस के चर्चित युवा चेहरों में से एक कहा जाता था। वो राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक रहे हैं और प्रदेश में ब्राह्मण वोटों की गोलबंदी में कांग्रेस उन्हें एक बड़े चेहरे के रूप में इस्तेमाल करना चाहती थी। प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व कांग्रेसी प्रधानमंत्री राजीव गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे हैं। जितिन प्रसाद का जन्म 29 नवंबर 1973 में यूपी के शाहजहांपुर जिले में हुआ था। उनके पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के बड़े नेताओं में से एक थे। जितेंद्र प्रसाद राजीव गांधी के बेहद करीबी नेताओं में से एक थे। जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व पीएम राजीव गांधी एवं नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार थे। वहीं जितिन प्रसाद के बाबा ज्योति प्रसाद भी कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेता थे।जितिन की परदादी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की भतीजी थीं। दून स्कूल और दिल्ली के प्रसिद्ध श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से शिक्षा हासिल करने वाले जितिन प्रसाद ने साल 2001 में कांग्रेस की यूथ विंग का जनरल सेक्रेटरी बनकर अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी।

मनमोहन सरकार में कई विभागों के मंत्री रहे
2004 में जितिन प्रसाद ने पहली बार धौरहरा सीट से चुनाव लड़ा और इसके बाद वो 2008 में मनमोहन सिंह सरकार में इस्पात राज्यमंत्री बने। 2009 में शाहजहांपुर के सुरक्षित लोकसभा सीट होने के बाद जितिन ने धौरहरा सीट से चुनावी दावेदारी की और विजयी हुए। यूपीए-2 में उन्हें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) का राज्यमंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने अभ्यर्थियों के लिए यूपीएससी में अवसरों की संख्या बढ़वाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई।

2014 में हारे लोकसभा चुनाव, लेकिन बने कांग्रेस महासचिव
2014 के लोकसभा चुनाव में जितिन प्रसाद प्रचंड मोदी लहर में चुनाव हार गए। उन्हें बीजेपी की रेखा वर्मा ने पराजित किया। बाद में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें दल का महासचिव बनाया और फिर वह 2020 में पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए। हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस लेफ्ट से गठबंधन के बावजूद कोई खास प्रदर्शन ना कर सकी। इसी दौरान प्रियंका गांधी की यूपी में सक्रियता के वक्त में जितिन प्रसाद कई महत्वपूर्ण मौकों पर उनके सारथी बने दिखे। हाथरस के रेप कांड से लेकर लखनऊ में योगी सरकार के खिलाफ कई बड़े प्रदर्शनों के दौरान जितिन ने प्रियंका के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा वो ब्राह्मण वोटों की गोलबंदी में भी कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे।

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