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केंद्रीय बजट 2022-23 – रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

indian-army-representationalकेंद्रीय बजट 2022-23 में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और रक्षा क्षेत्र की सुरक्षा अवसंरचना के विकास को और प्रोत्साहन करते हुए रक्षा सेवाओं के पूंजीगत परिव्यय के लिए कुल आवंटन बढ़ाकर 1.52 लाख करोड़ किया गया है। आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता को कम करने के लिए रक्षा क्षेत्र की खरीद बजट का 68 प्रतिशत घरेलू उद्योग के लिए निर्धारित किया गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत निजी उद्योग और स्टार्टअप के लिए निर्धारित किया गया है।

  • केंद्रीय बजट 2022-23 में कुल 45 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय की परिकल्पना की गई है।
  • इसमें से रक्षा मंत्रालय को कुल 25 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो कुल बजट का 13.31 प्रतिशत है।
  • आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी घरेलू उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए, घरेलू खरीद के हिस्सा को 2021-22 के लिए 64 प्रतिशत पर निर्धारित किया गया था, जिसे अब रक्षा सेवाओं के अधिग्रहण बजट (1.24 लाख करोड़ रुपये) का 68 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है, जो वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 84,598 करोड़ रुपये होगा।
  • इसमें रक्षा पेंशन के लिए 19 लाख करोड़ रुपये की धनराशि शामिल है।

रक्षा बजट में 2021-22 के बजट अनुमानों की तुलना में 46,970 करोड़ रुपये (9.82 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज की गयी है।

बजट घोषणा 2022-23 –  रक्षा में आत्मनिर्भरता

  • सरकार आयात को कम करने और सशस्त्र बलों के लिए उपकरणों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। 2022-23 में रक्षा खरीद बजट का 68 प्रतिशत घरेलू उद्योग के लिए निर्धारित किया जाएगा, जो 2021-22 में 58 प्रतिशत था।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र को उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षाजगत के लिए खोला जाएगा और इसके लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।
  • एसपीवी मॉडल के माध्यम से एवं डीआरडीओ और अन्य संगठनों के सहयोग से सैन्य प्लेटफार्मों और उपकरणों के डिजाइन और विकास के लिए निजी उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • बड़े पैमाने पर परीक्षण और प्रमाणन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक स्वतंत्र नोडल वृहद् निकाय (अम्ब्रेला) की स्थापना की जाएगी।
  • ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने वित्त मंत्री को एक बेहतरीन केंद्रीय बजट 2022-23 पेश करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा, बजट मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन देगा, मांग को बढ़ावा देगा और एक मजबूत, समृद्ध एवं आत्मविश्वास से भरे भारत के लिए क्षमता का निर्माण करेगा।

प्रत्येक वर्ष के लिए बजटीय समर्थन में वृद्धि के माध्यम से, सरकार ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और अवसंरचना विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा योजना प्रक्रिया के केंद्र में रखा है।

  • रक्षा सेवाओं के पूंजीगत परिव्यय के तहत कुल आवंटन 2013-14 के 86,740 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2022-23 में 52 लाख करोड़ हो गया है।
  • नौ वर्षों की अवधि में 76 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • इसके अलावा, इस अवधि के दौरान, रक्षा पेंशन सहित कुल रक्षा बजट में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 5.25 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
  • आधुनिकीकरण और अवसंरचना विकास पर निरंतर जोर: केंद्रीय बजट 2022-23 में, सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और अवसंरचना विकास से संबंधित पूंजी आवंटन में काफी वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपये हो गयी है। इस मद में वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में 17,308 करोड़ रुपये (12.82 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, 2019-20 से पूंजीगत बजट में संचयी वृद्धि 48,975 करोड़ रुपये (47.37 प्रतिशत) रही है।
  • समग्र पूंजीगत बजट में वृद्धि, आधुनिकीकरण और अवसंरचना विकास में सतत वृद्धि के साथ आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में सरकार के संकल्प को दर्शाती है।
  • भारतीय तटरक्षक (आईसीजी), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और महानिदेशालय रक्षा संपदा (डीजीडीई) आदि संगठनों के लिए रक्षा मंत्रालय (सिविल) बजट के पूंजीगत मद में भी 60 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी गई है। कुल मिलाकर यह राशि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 8,050 करोड़ रुपये है, जो वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 5,173 करोड़ रुपये थी।
  • वित्त वर्ष 2022-23 के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का पूंजीगत बजट 40 प्रतिशत बढ़कर 3,500 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह 2,500 करोड़ रुपये था। इससे महत्वपूर्ण सुरंगों (सेला और नेचिफू सुरंग) और प्रमुख नदियों पर पुलों सहित सीमावर्ती अवसंरचना के निर्माण की प्रगति में तेजी आएगी।
  • समग्र समुद्री सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए, वित्त वर्ष 2022-23 में कुल 46,323 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, भारतीय नौसेना के पूंजीगत बजट में 53 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इस वृद्धि का उद्देश्य नए प्लेटफार्मों का अधिग्रहण, संचालन और सामरिक अवसंरचना का निर्माण, क्षमता की महत्वपूर्ण कमियों को दूर करना और भविष्य के लिए एक विश्वसनीय समुद्री बल का निर्माण करना है।
  • इसके अतिरिक्त, तटीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय तटरक्षक बल के पूंजीगत बजट को वित्त वर्ष 2022-23 में 24 प्रतिशत बढ़ाकर 4,246 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए यह 2,650 करोड़ रुपये था। इस वृद्धि का उद्देश्य जहाजों और विमानों के अधिग्रहण, अवसंरचना उन्नयन, तटीय सुरक्षा नेटवर्क की स्थापना और तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता संरचनाओं का निर्माण जैसी परिसंपत्तियों का विनिर्माण करना है।
  • मुख्य रूप से रक्षा भूमि की सीमा चौकियों / स्तंभों और चारों तरफ बाड़ के निर्माण के लिए, डीजीडीई के पूंजीगत बजट के तहत बीई 2022-23 और आरई 2021-22 के लिए क्रमशः 03 करोड़ रुपये और 131.08 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य रक्षा भूमि पर अतिक्रमण को रोकना है।
  • नव निर्मित सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) को समर्थन देने के लिए, आरई 2021-22 में 1,665 करोड़ रुपये और बीई 2022-23 में 1,310 करोड़ रुपये उनके नियोजित आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बजट अनुमान 2022-23 और आरई 2021-22 में 2,500 करोड़ रुपये भी आपातकालीन प्राधिकरण कोष के रूप में अलग से निर्धारित किये गए हैं।
  • इसके अलावा, देश में रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम को सक्षम करने के लिए, वित्त वर्ष 2022-23 में आईडीईएक्स और डीटीआईएस को क्रमशः 60 करोड़ रुपये और 23 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • आईडीईएक्स (रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार) योजना के तहत, रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण बनाना है, जो अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, शिक्षाविदों, उद्योगों, स्टार्ट-अप और यहां तक ​​कि व्यक्तिगत नवोन्मेषियों को शामिल करके रक्षा में नवाचार को बढ़ावा देगा और प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहित करेगा। रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (डीटीआईएस) निजी उद्योग के साथ साझेदारी में अत्याधुनिक परीक्षण अवसंरचनाके निर्माण की परिकल्पना करती है, जिससे घरेलू रक्षा और वैमानिकी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
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