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पत्रकार पर इतनी संपत्ति कहां से आई ?

Journalist-Upendra-Rai-04052018नयी दिल्ली : दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत ने संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के मामले में कथित संलिप्तता को लेकर गिरफ्तार पत्रकार उपेंद्र राय को तीन दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही मान ने राय को सीबीआई हिरासत में भेजने का निर्देश दिया.इससे पहले एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान पत्रकार के खिलाफ काफी अभियोगात्मक सामग्री मिली है और वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. सीबीआई के लोक अभियोजक मनोज शुक्ला ने आरोपी की सात दिन की हिरासत की मांग की थी. राय के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ना कुछ छिपा रहे हैं और न ही जांच से भाग रहे हैं, ऐसे में जांच पूरी करने के लिए उनकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि राय ने साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है और गवाह को प्रभावित करने की कोशिश का कोई आरोप नहीं है.
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उनकी गिरफ्तारी के मामले में किसी तरह के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अरुण भूषण की पीठ ने कहा कि वह राय की गिरफ्तारी के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी क्योंकि उसने संरक्षण के लिए दायर उनकी अर्जी अभी देखी नहीं है. जांच ब्यूरो ने दिल्ली स्थित पत्रकार उपेंद्र राय को संदिग्ध वित्तीय लेन देन में कथित संलिप्तता और हवाई अड्डे में प्रवेश के लिए गलत जानकारी देकर नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो का पास हासिल करने के मामले में गुरुवार को गिरफ्तार किया था. राय का दावा है कि इस मामले में उन्हें फंसाया गया है क्योंकि वह प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह के बारे में लिखते रहे हैं. राजेश्वर सिंह बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच करनेवाले दल के सदस्य थे.

सीबीआई ने पत्रकार उपेन्द्र राय और उसके सहयोगी राहुल शर्मा के खिलाफ आज एक नया मामला दर्ज किया है. दोनों ने स्वयं को आयकर विभाग का ‘पावर ब्रोकर’ (दलाल) बताकर मुंबई के बिल्डर से कथित रूप से 15 करोड़ रुपये वसूले थे.  सीबीआई का कहना है कि मुंबई के व्हाइट लायन रियल एस्टेट डेवेलॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में से एक बलविन्दर सिंह मल्होत्रा ने राय के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है.सीबीआई के मुताबिक, दोनों पक्षों में हुए समझौते के तहत बिल्डर ने बांद्रा स्थित एक्सिस बैंक के अपने खाते से 15.19 करोड़ रुपये की राशि राय के एचडीएफसी बैंक के खाते में डाली. यह लेन – देन अक्तूबर 2017 से अप्रैल 2018 के बीच हुआ.

सीबीआई ने वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में शामिल होने और गलत सूचना देकर नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) द्वारा जारी किए जाने वाला पास हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने इस सिलसिले में एयर वन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रसून रॉय के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच एजेंसी ने इस संबंध में दिल्ली, नोएडा, लखनऊ और मुंबई समेत आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।एजेंसी ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया कि राय के खाते में 2017 में 79 करोड़ रुपये आए और इसी अवधि में 78.51 करोड़ रुपये निकाले गए। प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘उन्होंने गलत तरीके से हासिल धन से कई कार कथित तौर पर खरीदे। ऐसी जानकारी मिली है कि उन्हें मुखौटा कंपनियों से आयकर विभाग में रिश्वत देने और मामलों को फिक्स करने के लिये एक साल में 16 करोड़ रुपये मिले। उन्हें एक साल में सहारा इंडिया से भी साढ़े छह करोड़ रुपये मिले।’’

एजेंसी ने कहा कि दो लोगों राहुल शर्मा और संजय स्नेही ने राय की कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल धन को रखने में मदद की। यह भी आरोप लगाया गया है कि राय ने एयर वन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के सीएसओ प्रसून रॉय और अन्य के साथ आपराधिक साजिश रची और बीसीएएस और दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे :डीआईएल: के साथ धोखाधड़ी की और धोखे और बेईमानी से अस्थायी और स्थायी एयरोड्रम इंट्री पास (एईपी) हासिल किया।

राय ने गलत सूचना के आधार पर एईपी हासिल किया। उन्होंने बेहद संवेदनशील, सीमित और सैनिटाइज्ड क्षेत्रों के साथ सभी हवाई अड्डों तक पहुंच का कानूनी अधिकार हासिल कर लिया। इसके जरिये उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम में डाला।प्राथमिकी के अनुसार राय ने अखिल भारतीय एईपी हासिल करने के लिये रॉय के साथ मिलकर एक आवेदन दिया और उसमें गलत तरीके से खुद को कंपनी का गुणवत्ता नियंत्रण निदेशक के तौर पर दिखाया। कंपनी ने कथित तौर पर राय का नाम प्रायोजित किया और बीसीएएस को आवेदन भेज दिया। बीसीएएस आपराधिक साजिश का हिस्सा बन गया और उसने राय को स्थायी एईपी जारी कर दिया।

सीबीआई ने आरोप लगाया कि एईपी ने हवाई ऑपरेटर प्रमाणन दिशा-निर्देशों और सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट का उल्लंघन करके उन्हें भारत में सभी हवाई अड्डों तक पहुंच का अधिकार दे दिया। सीबीआई ने कहा कि राय तकनीकी तौर पर योग्यता नहीं रखते हैं और उनके नाम को डीजीसीए ने एयर वन के गुणवत्ता नियंत्रण, निदेशक के पद के लिये मंजूरी नहीं दी थी।प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘सूत्र ने हमें सूचित किया है कि 2018 में पीआईबी कार्ड जारी करने के लिये दिए गए आवेदन में पत्रकार ने खुद को एयर वन का वास्तविक कर्मचारी तथा सलाहकार या निदेशक, गुणवत्ता नियंत्रण नहीं घोषित किया था।’’ सीबीआई ने कहा कि राय को चार किश्तों में एयर वन से भी 1.02 करोड़ रुपये मिले।

 

 

 

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