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सीबीआई करेगी सुशांत केस की जांच ; सुप्रीम कोर्ट

CBI-to-investigate-in-Sushant-SIngh-death-case (2)देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत केस में अपना फैसला सुना दिया है, जिसका हर किसी को बेसब्री से इंतजार था। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुशांत सिंह राजपूत के चाहनेवालों के पक्ष में दिया है और सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए यह माना कि मुंबई पुलिस ने इस केस में जांच नहीं की है बल्कि केवल इन्‍क्‍वायरी की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस केस जुड़े हर मामले को अब सीबीआई ही देखेगी। इस बीच महाराष्‍ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस कमिश्‍नर से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद अनिल देशमुख ने कहा कि महाराष्‍ट्र सरकार सीबीआई जांच में पूरा सहयोग करेगी।पुलिस कमिश्‍नर से मुलाकात के बाद अनिल देशमुख ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले का स्‍वागत करते हैं। सीबीआई जांच में जिन चीजों की भी जरूरत होगी, महाराष्‍ट्र सरकार वह मुहैया करेगी। देशमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच में कोई गलती नहीं पाई हैं और यह गर्व की बात है।केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कोर्ट के इस फैसले का दिल से स्वागत किया है। उन्होंने सुशांत के बारे में बातें करते हुए कहा, ‘मुझे यकीन है कि इस निष्पक्ष जांच की शुरुआत के बाद उनकी आत्मा को शांति मिली होगी। मैं न्याय की उम्मीद लिए उनके पिता की हिम्मत और धैर्य की भी दात देता हूं।’

कोर्ट ने माना- मुंबई पुलिस ने सुशांत केस में जांच नहीं की
बता दें कि कोर्ट ने इस सुनवाई में 35 पन्‍नों का जजमेंट दिया है और पटना में दर्ज एफआईआर को SC ने सही पाया है। कोर्ट ने कहा कि बिहार सरकार जांच की सिफारिश करने में सक्षम है। पटना कोर्ट की एफआईआर को कोर्ट ने सही पाया है। कोर्ट ने कहा कि बिहार सरकार जांच की सिफारिश करने में सक्षम है। कोर्ट ने माना है क‍ि मुंबई पुलिस ने जांच नहीं की। कोर्ट ने कहा है क‍ि मुंबई पुलिस ने सुशांत केस में जांच नहीं की है, बल्कि इस मामले में बस इन्‍क्‍वायरी की। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला पूरी तरह से सीबीआई को सौंप दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि आगे कोई भी एफआईआर इस मामले में दर्ज हुई तो सीबीआई देखेगी।सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ये सुनिश्चित किया जाए कि सुशांत सिंह राजपूत के मौत के पीछे के रहस्य की छानबीन के लिए सीबीआई कंपिटेंट जांच एजेंसी है और कोई भी राज्य पुलिस उसकी जांच में दखल न दे। सुशांत के पिता केके सिंह के वकील विकास सिंह ने एनबीटी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि बिहार सरकार सीबीआई जांच के लिए केस रेफर करने के लिए सक्षम है। पटना में दर्ज केस वैध है।कोर्ट ने अपने इस फैसले में लिखा है, ‘सुशांत सिंह राजपूत एक टैलंटेड ऐक्टर थे और उनकी पूरी काबिलियत का पता चलने से पहले ही उनकी मौत हो गई। काफी लोग इस केस की जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए कयासों को रोकना होगा। इसलिए इस मामले में निष्पक्ष, पर्याप्त और तटस्थ जांच समय की जरूरत है।’

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बिहार के लोग बेहद खुश हैं और अपने चहेते स्टार के लिए न्याय को लेकर उनका हौसला और भी बुलंद हो गया है। बिहार, सहरसा में सुशांत के फैन्स ने इस मौको को सेलिब्रेट किया और पटाखे भी जलाए।

जांच प्रक्रिया को टाला गया और खींचा गया: निरुपम
संजय निरुपम ने इस केस को लेकर बातें करते हुए कहा, ‘सुशांत की मौत संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई है और जिस तरह से जांच की प्रक्रिया को टाला गया और खींचा गया, पूरे देश में सीबीआई जांच की मांग हुई और महाराष्ट्र में इसका विरोध हो रहा है…ये सब गलत है।’ हालांकि, उन्होंने माना कि मुंबई पुलिस सक्षम पुलिस है और उन्हें उन पर फक्र है।

महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस के लिए बड़ा झटका

सीबीआई जांच का विरोध करती रही महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस के लिए यह बड़ा झटका है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि महाराष्ट्र सरकार एक सीमित दायरे में जांच कर रही थी।

न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की एकल पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की याचिका पर अपने फैसले में कहा कि राजपूत के पिता की शिकायत पर बिहार पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी सही है और इसे सीबीआई को सौंपना विधिसम्मत है। रिया चक्रवर्ती ने पटना के राजीव नगर थाने में दर्ज इस मामले को मुंबई स्थानांतरित करने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भले ही रिया चक्रवर्ती की याचिका पर आया हो, लेकिन इसका सबसे बड़ा झटका महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को लगा है। दोनों ने ही बार-बार बिहार पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर पर सवाल उठाए थे और कहा था कि यह मामला पुलिस पुलिस के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। बिहार पुलिस इसमें सिर्फ जीरो एफआईआर दर्ज कर सकती थी। इसके अलावा बिहार सरकार को सीबीआई जांच के लिए सिफारिश का भी अधिकार नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस के ये दावे टिक नहीं पाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुंबई पुलिस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत जांच कर रही है जो बहुत ही सीमित है। यह धारा अस्वभाविक मृत्यु और आत्महत्या के मामलों की प्रक्रिया से संबंधित है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में सीबीआई की जांच विधिसम्मत है। कोर्ट ने कहा, ”प्रस्तुत रिकॉर्ड से पहली नजर में यह नहीं लगता कि मुंबई पुलिस ने कुछ गलत किया है, लेकिन मुंबई पुलिस टीम के लिए उनकी रुकावट से बचा जा सकता था, क्योंकि इससे उनकी जांच की प्रमाणिकता पर संदेह को जन्म दिया।”

सुशांत सिंह राजपूत (34) 14 जून को मुंबई के उपनगर बांद्रा में अपने अपार्टमेन्ट में छत से लटके मिले थे। इस मामले की तभी से मुंबई पुलिस जाच कर रही है। मुंबई पुलिस ने इस मामले में सिने निर्माता आदित्य चोपड़ा, महेश भट और संजय लीला भंसाली सहित कम से कम 56 व्यक्तियों के बयान दर्ज किए हैं। न्यायमूर्ति रॉय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राजपूत की मृत्यु के संबंध में अगर कोई अन्य मामला दर्ज है तो उसकी जांच भी सीबीआई ही करेगी।

राजनीतिक रूप से भी बड़ा झटका
कांग्रेस, एनसीपी के साथ मिलकर सरकार चला रहे उद्धव ठाकरे की सरकार की सरकार ने इस मुद्दे को प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया था। सरकार गठन के बाद से ही कोरोना संक्रमण से जूझ रही सरकार पर विपक्ष को हमलावर होने का एक और मौका मिल गया है। यहां तक कि सरकार में शामिल कांग्रेस के कुछ नेता और खुद अजित पवार के बेटे पार्थ पवार इस मुद्दे पर सरकार को घेरते रहे और आज कोर्ट का फैसला आने पर ट्वीट किया, सत्यमेव जयते।

बिहार के डीजीपी ने बताए वो 4 प्वाइंट्स

सुप्रीम कोर्ट ने सुशांत सुसाइड केस की जांच सीबीआई को सौंपी है। कोर्ट के इस फैसले को बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने ऐतिहासिक बताया है। डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने भास्कर से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में बिहार पुलिस का स्टैंड एकदम सही था, जबकि महाराष्ट्र पुलिस हमें तकनीकी चीजों में उलझाती रही। उन्होंने 4 प्वॉइंट्स बताए कि क्यों इस पूरे मामले में महाराष्ट्र पुलिस का रवैया गलत था और कानूनी तौर पर बिहार का पक्ष सही था…

1. सुशांत के बाद पिता उत्तराधिकारी, पटना में एफआईआर का कदम सही था
सुशांत अविवाहित थे। ऐसे में उनकी मौत के बाद पिता ही स्वाभाविक उत्तराधिकारी हैं। पूरे मामले में हत्या से लेकर पैसे के हेरफेर तक की बातें सामने आ रहीं थीं। इस बारे में कानूनी तौर पिता को अपनी शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। वे पटना में रहते हैं। इसलिए पटना में एफआईआर दर्ज होना कानूनी तौर पर एकदम सही था। यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी साफ हुआ।

2. तकनीकी चीजों में उलझाती रही मुंबई पुलिस
महाराष्ट्र पुलिस बार-बार आरोप लगा रही थी कि बिहार पुलिस ने केस दर्ज करने की जगह जीरो एफआईआर क्यों नहीं की? केस मुंबई क्यों नहीं ट्रांसफर किया? इन सवालों को उठाने के बजाय महाराष्ट्र पुलिस ने जांच में कभी सहयोग नहीं किया। वहां की पुलिस तकनीकी चीजों में मामले को उलझाती रही, जो मुंबई पुलिस की मंशा पर सवाल उठाता है।

3. बिहार पुलिस की निगरानी की गई
बिहार पुलिस जांच के लिए मुंबई गई तो उसका सहयोग नहीं किया गया। बिहार पुलिस पर मुंबई आने-जाने पर नजर रखी गई। यहां तक बिहार पुलिस से ही पूछताछ की गई। जरूरत के कागजात-सबूतों तक पहुंचने से रोका गया। यहां तक कि सुशांत की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक साझा नहीं की गई। मुंबई पुलिस के पुलिस कमिशनर ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में कहा कि यह बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, जबकि इस मसले में अधिकार क्षेत्र जैसी कोई बात नहीं थी।

4. पटना के एसपी को क्वारैंटाइन किया गया
बिहार पुलिस ने बेहतर को-ऑर्डिनेशन के लिए पटना के एसपी आईपीएस विनय तिवारी को महाराष्ट्र भेजा। विनय तिवारी के पास कई इनपुट थे और उनकी जांच मामले को आगे ले जाती। लेकिन, बीएमसी ने उन्हें क्वारैंटाइन कर दिया, जो बताता है कि इस मामले में मुंबई पुलिस पर दबाव था।

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