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जीएसटी की मार ; सरकार कारोबारियों से जुटाएगी 46,000 करोड़ रुपये

gstनई दिल्ली। सरकार ने जीएसटी कलेक्शन में कमी को पूरा करने के लिए आय का नया रास्ता ढूंढ निकाला है। सरकार माल एवं सेवा कर (GST) के भुगतान में देरी पर ब्याज के रूप में 46,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। हालांकि, इसको लेकर टैक्स एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है। उनका कहना है कि सरकार ने नयी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को लागू करते समय टैक्सपेयर्स से टैक्स रिटर्न फाइल करने में देरी पर ब्याज और जुर्माना को माफ करने का वादा किया था।वही सरकार आज अपना राजस्व लक्ष्य पूरा करने के लिए इतने कठोर कदम उठा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज लगाने से मुकदमों की संख्या भी बढ़ जाएगी क्योंकि करदाता इसे चुनौती देंगे। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स के विशेष सचिव एवं सदस्य ए. के. पाण्डेय ने सभी प्रधान मुख्य आयुक्तों एवं केंद्रीय कर आयुक्तों को पत्र लिखकर कहा है कि कानून के मुताबिक, टैक्सपेयर्स पर टैक्स के लेट पेमेंट पर ब्याज की देनदारी बनती है। पाण्डेय ने कहा है, ”CGST Act की धारा 79 के प्रावधानों के तहत टैक्स के विलंबित भुगतान पर ब्याज वसूला जा सकता है।”पत्र के आधार पर प्रिंसिपल एडीजी (सिस्टम्स) ने एक फरवरी 2020 को GSTIN के आधार पर ऐसे पंजीकृत व्यक्तियों की लिस्ट बनायी है, जिन्होंने देर से GSTR 3B फाइल करते समय ब्याज नहीं दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, देर से टैक्स के भुगतान पर 45,996 करोड़ रुपये का ब्याज सरकार को नहीं मिला है। इस रिपोर्ट को SFTP पोर्टल पर साझा किया गया है। इसके आधार पर सीजीएसटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत ब्याज की रिकवरी की जाएगी। सरकार की इस सख्ती को लेकर AMRG & Associates के सीनियर पार्टनर रजत मोहन ने कहा है कि यह कदम टैक्सपेयर्स के खिलाफ है, जिनसे जीएसटी लागू करते समय सहयोग का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि इससे टैक्सपेयर्स हतोत्साहित होंगे। अगर सरकार टैक्स के लेट पेमेंट पर ब्याज लेना ही चाहती है तो ऐसा नेट टैक्स जवाबदेही पर किया जाना चाहिए, ना कि कुल टैक्स जवाबदेही पर।

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