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हज यात्रा पर दी जाने वाली सब्सिडी खत्म

hajj_650x400_71513835544नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने हज यात्रा पर दी जाने वाली सब्सिडीखत्म कर दी है. केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि हज यात्रा पर दी जाने वाली सब्सिडी की रकम लड़कियों की शिक्षा पर खर्च की जाएगी. नकवी ने कहा कि इस साल 1.75 लाख मुसलमान हज यात्रा पर जाएंगे. अब तक के इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी ज्यादा संख्या में यात्री हज यात्रा पर जाने वाले हैं.अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने कहा है कि सब्सिडी के पैसे को लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा उपलब्ध कराने पर खर्च किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सब्सिडी का फायदा ऐसे भी एजेंट्स उठा रहे थे, इसलिए हज सब्सिडी बंद कर दी गई है. उन्होंने कहा कि गरीब मुस्लिमों के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार तुष्ट‍िकरण नहीं, सशक्तिकरण चाहती है.

नकवी ने यह भी कहा कि सऊदी अरब की सरकार ने भारत से पानी के जहाज के जरिए हज यात्रा फिर से आरंभ करने को सैद्धांतिक रूप से सहमति प्रदान कर दी है और दोनों देशों के अधिकारी इससे जुड़े तौर-तरीकों को अंतिम रूप देंगे. नकवी ने कहा, ‘यह अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण के बिना और गरिमा के साथ सशक्तीकरण की हमारी नीति का हिस्सा है.’ इस साल की शुरुआत में नकवी ने कहा था कि केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक हज सब्सिडी खत्म करेगी.गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में सरकार से 2022 तक सब्सिडी खत्म करने के लिए कहा था. गौरतलब है कि पिछले साल हज यात्रा के लिए 450 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी. दुनिया भर से लाखों मुसलमान हर साल हज यात्रा पर सऊदी अरब के मक्का जाते हैं. आपको बता दें सऊदी अरब ने भारत के हज कोटे में हाल ही में 5000 की वृद्धि कर दी है. यानी अब इतने अतिरिक्त हजयात्री हज पर जा सकेंगे. वहीं बीते साल सऊदी अरब ने भारत के हज कोटे में 35,000 की वृद्धि की थी.

 इस्लाम धर्म के 5 स्तंभों में से एक है हज. ऐसा माना जाता है कि हर मुस्लिम को जीवन में एक बार हज पर जाना चाहिए. इसी वजह से हज यात्रा का इतना महत्व होता है. जो लोग हज नहीं जा पाते वो वहां जाने वाले बंदों के हाथों अल्लाह को पैगाम भेजते हैं.  ये यात्रा पांच दिनों की होती है. इहराम, तवाफ, सई, अराफात और मुजदलफा. तीसरे दिन बकरीद के बाद रमीजमारात पर पत्थर मारे जाते हैं. रमीजमारात एक ऐसी जगह है जहां तीन बड़े खम्भे हैं. इन्हीं खम्भों को लोग शैतान मानते हैं और उस पर कंकरी फेंकते हैं और इस रस्म के साथ ही हज पूरा हो जाता है.

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