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छलका उद्धव का ‘दर्द’, फडणवीस से कहा- आप अच्छे रहते तो ये सब न होता

dc-Cover-tr8io07ak584o6vmqmfli1bt10-20191107014844.Mediमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को सदन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि मैंने देवेंद्र फडणवीस से बहुत सी चीजें सीखी हैं, मैं हमेशा उनका दोस्त रहूंगा. उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल में मैंने कभी भी सरकार के साथ विश्वासघात नहीं किया. उद्धव ठाकरे ने सदन में देवेंद्र फडणवीस से कहा कि अगर आप हमारे लिए अच्छे होते तो यह सब नहीं होता. मैं आपको विपक्ष का नेता नहीं बल्कि जिम्मेदार नेता कहूंगा.मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, मैं आपको (देवेंद्र फडणवीस) ‘विपक्ष का नेता’ नहीं कहूंगा लेकिन मैं आपको एक ‘जिम्मेदार नेता’ कहूंगा. अगर आप हमारे लिए अच्छे होते, तो यह सब (बीजेपी-शिवसेना में फूट) नहीं होता. उद्धव ठाकरे ने कहा, मैंने देवेंद्र फडणवीस से बहुत सी चीजें सीखी हैं और मैं हमेशा उनका दोस्त रहूंगा. मैं अभी भी ‘हिंदुत्व’ की विचारधारा के साथ हूं और इसे कभी नहीं छोड़ूंगा. पिछले 5 वर्षों में मैंने कभी भी सरकार को धोखा नहीं दिया है.सदन में उद्धव ठाकरे ने कहा, मैं भाग्यशाली सीएम हूं क्योंकि जिन्होंने मेरा विरोध किया वे अब मेरे साथ हैं और जो मेरे साथ थे वे अब विपक्ष में हैं. मैं यहां अपनी किस्मत और लोगों के आशीर्वाद से हूं. मैंने कभी किसी को नहीं बताया कि मैं यहां आऊंगा लेकिन मैं आ गया.उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें देवेंद्र फडणवीस के साथ दोस्ती स्वीकारने में कोई संकोच नहीं है. उद्धव ने कहा, मुझे यह बोलने में तनिक भी संकोच नहीं कि लंबे समय तक हम दोनों अच्छे दोस्त रहे हैं. अगर आप मेरी बात सुने होते तो आज मैं घर पर बैठ टीवी पर ये सब वाकया देख रहा होता.

  • उद्धव बोले- मैं अभी भी ‘हिंदुत्व’ की विचारधारा के साथ हूं
  • सदन में उद्धव ने कहा- जो मेरे साथ थे, अब वे विपक्ष में हैं

महाराष्ट्र में एनसीपी-शिवेसना और कांग्रेस के साथ गठबंधन के मुख्यमंत्री बने उद्धव ठाकरे ने रविवार को इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वह हमेशा हिन्दुत्व की विचारधारा के साथ थे।महाराष्ट्र के विशेष सत्र के दौरान ठाकरे ने कहा- “मैं हिन्दुत्व की विचारधारा के साथ हूं, उसे छोड़ा नहीं है।”इसके साथ ही, उद्धव ने देवेन्द्र फडणवीस पर भी निशाना साधा, जिन्हें रविवार को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया है। फडणवीस को एक मित्र बताते हुए ठाकरे ने कहा कि वह उन्हें विपक्षी नेता के रूप में नहीं देखते है।ठाकरे ने अपने बधाई संदेश में कहा, ”मैंने कभी नहीं कहा कि कि मैं वापस लौटूंगा, लेकिन मैं इस सदन में आया। उन्होंने कहा, ”मैं सदन और महाराष्ट्र के लोगों को आश्वस्त कर सकता हूं कि मैं कुछ भी आधी रात को नहीं करूंगा। मैं लोगों के हितों के लिए काम करूंगा।इस कटाक्ष को फडणवीस और राकांपा प्रमुख अजित पवार के तीन नवम्बर की सुबह जल्दबाजी में शपथ लिये जाने के संबंध में देखा जा रहा है। सदन से किसानों की समस्याओं को कम करने की सदन से अपील करते हुए ठाकरे ने कहा, ”इस सरकार का उद्देश्य न केवल किसानों का कर्जा माफ करना है बल्कि हमें उनकी परेशानियों को भी  कम करने की जरूरत है।

शिवसेना प्रमुख ने कहा कि उन्हें यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि देवेन्द्र फडणवीस के साथ उनकी मित्रता है। ठाकरे ने कहा, ”मुझे यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं होगा कि हम लंबे समय से अच्छे मित्र हैं। अगर आपने हमारी बात सुनी होती तो मैं घर पर बैठकर आज के घटनाक्रम को टीवी पर देख रहा होता।राकांपा नेता जयंत पाटिल ने फडणवीस पर निशाना साधा। पाटिल ने कहा, ”उन्होंने (फडणवीस) कहा कि वह लौटेंगे, लेकिन यह नहीं बताया कि वह (सदन) में कहां बैठेंगे। पाटिल ने कहा, ”अब वह वापस लौट आये है और (विपक्ष के नेता) के शीर्ष पद पर है जो मुख्यमंत्री पद के समान है।राकांपा नेता ने विश्वास जताया कि फडणवीस ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन सरकार को हटाये जाने के किसी भी प्रयास का हिस्सा नहीं होंगे।

विपक्ष के नेता चुने गए फडणवीस

इससे पहले बीजेपी के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में निर्विरोध चुना गया. विधानसभा अध्यक्ष नाना एफ. पटोले ने सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी और विपक्ष के विधायकों की ओर से तालियों की गड़गड़ाहट के बीच फडणवीस के नाम की घोषणा की. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, जयंत पाटिल, एकनाथ शिंदे, बालासाहेब थोराट जैसे नेताओं ने फडणवीस को बधाई दी और पद के लिए उनके चुनाव का स्वागत किया.फडणवीस (49) अक्टूबर 2014 में पहली बार बीजेपी की ओर से राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद उन्होंने नवंबर 2019 में भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उनके साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

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