Pages Navigation Menu

Breaking News

बंगाल में ममता,असम में बीजेपी, तमिलनाडु में डीएमके तो केरल में लेफ्ट की जीत

 

सुप्रीम कोर्ट में समय से पहले गर्मी की छुट्टियां, दिल्ली में एक सप्ताह और बढ़ा लॉकडाउन

एसबीआई ने आवास ऋण पर ब्याज दर 6.70 प्रतिशत की

सच बात—देश की बात

ताइवान- अमेरिका पर चीन की बौखलाहट

America-vs-China-Warनई दिल्‍ली । चीन ताइवान को लेकर पहले से ही काफी आक्रामक रहा है। लेकिन अब ताइवान के साथ दूसरे देशों के घनिष्‍ठ होते संबंधों ने उसकी ये आक्रामकता और चिंता, दोनों ही बढ़ा दी हैं। इस आक्रामकता की सबसे बड़ी वजह दरअसल उसकी विस्‍तारवादी नीति का ही परिणाम है। चीन की यही विस्‍तारवादी नीति और उसकी आक्रामकता दुनिया को अब रास नहीं आ रही है। इसका ही नतीजा है कि दुनिया के कई बड़े देश रूस के बढ़ते कदमों को थामने में लगे हैं। इसमें एक बड़ा नाम अमेरिका का है। इसके अलावा भारत भी इसमें उसका साथ दे रहा है। इन दोनों ने ही चीन को रणनीतिक दृष्टि से रोकने के लिए ताइवान को अपना जरिया बनाया है। वहीं, दोनों ने ही आर्थिक तौर पर उसको कमजोर करने के लिए कई अन्‍य फैसले भी लिए हैं।

भारत और अमेरिका दोनों ने ही बीते कुछ समय में चीन के निवेश को अपने यहां पर कई क्षेत्रों में प्रतिबंधित किया है। साथ ही कई चीनी एप को बंद किया है। इसके अलावा भारत ताइवान के साथ आईटी सेक्‍टर में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, जहां तक भारत की बात है तो बता दें कि भारत ने ताइवान को एक आजाद राष्‍ट्र के तौर पर मान्‍यता नहीं दी है। इसके बाद भी भारत अब ताइवान के साथ अपनी नजदीकी को बढ़ा रहा है। वहीं अमेरिका की बात करें तो वो इस राह में भारत से कई कदम आगे है। दोनों ही देश आर्थक के अलावा सैन्‍य क्षेत्र में काफी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ये चीन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। गौरतलब है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने ताइवान को 13500 करोड़ रुपये के हथियार बेचने का निर्णय लिया है, जिसके बाद चीन बुरी तरह से तिलमिलाया हुआ है। अमेरिका ने इसके तहत जिन चीजों को ताइवान को बेचने की बात की है उसमें मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (एचआइएमएआरएस), स्टैंड ऑफ लैंड अटैक मिसाइल रिस्पॉन्स (एसएलएएस-ईआर), एएस-110 सेंसर पोड, अत्याधुनिक तोपें, ड्रोन, हापरून एंटी-शिप मिसाइल भी शामिल की गई हैं। ये प्रक्रिया सितंबर से ही चल रही थी।

प्रोफेसर अलका के मुताबिक, अमेरिका भी काफी समय से ताइवान को अपने हक के लिए इस्‍तेमाल करने में लगा हुआ है और सैन्‍य क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। वहीं, भारत केवल आईटी सेक्‍टर में चीन से अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ताइवान का उपयोग कर रहा है, जो गलत नहीं है।
चीन दुनिया का अकेला ऐसा देश है जिसकी सीमाएं 14 देशों के साथ मिलती हैं। इसमें भारत, पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान, तजाकिस्‍तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्‍तान, मंगोलिया, रूस, उत्‍तर कोरिया, वियतनाम, लाओस, म्‍यांमार, भूटान और नेपाल शामिल है। इन सभी 14 देशों से चीन का सीमा विवाद है। भारत के साथ उसका विवाद जगजाहिर है। इसके बाद रूस का नंबर आता है जिसकी सीमाएं 13 देशों के साथ मिलती हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के ताइवान को हथियार बेचने को लेकर लेकर चीन और अमेरिका में तनाव और बढ़ने के आसार पैदा हो गए हैं। इसको लेकर चीन ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के संबंधों पर सीधा असर पड़ेगा। चीन के विदेश मंत्रालय का ये भी कहना है कि इसको रद किया जाना चाहिए, क्‍योंकि ये उसके आंतरिक मामलों में दखल है। हालांकि, अमेरिका ने चीन की धमकी को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अहमियत को समझता है। इससे ताइवान की ताकत में इजाफा होगा। शक्ति संतुलन के लिए इस क्षेत्र में यह सराहनीय पहल है।
Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »