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चंद्रग्रहण, ब्लड मून और सुपरमून आज तीनों एक साथ

NASA_Super-blood-moon_eclipse-800x600साल का पहला चंद्रग्रहण आज यानी बुधवार को लग चुका है। पूरी दुनिया में आज के अद्भुत नजारे को देखने के लिए लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। दरअसल आज पूर्ण चंद्रग्रहण, ब्लड मून और सुपरमून तीनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं। यह खगोलीय घटना पूरे छह साल बाद हो रही है। जिसे लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिकों में भी खासा उत्साह है। आज का चंद्रग्रहण ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में दिखना शुरू भी हो गया है। भारत में भी इस घटना की शुरुआत तो हो चुकी है, लेकिन लोगों को यह अंधेरा होने पर ही दिखाई देगा। ये चंद्र ग्रहण दोपहर 2 बजकर 17 में शुरू होकर शाम को 7 बजकर 15 मिनट पर खत्म होगा।

सामान्य आकार से काफी बड़ा दिखाई दे रहा चंद्रमा

यह तस्वीर ऑस्ट्रेलिया से ली गई है। आज दुनियाभर के कई देशों में चंद्रमा अपने आकार से काफी बड़ा भी दिखाई दे रहा है। जिसे वैज्ञानिकों ने फ्लावर मून का नाम दिया है। अगर रात साफ रही तो भारत में यह इवेंट थोड़ा बहुत पूरी रात दिखाई देगा। सभी पूर्णिमाओं की तरह यह पूर्व दिशा से शुरू होकर पश्चिम में खत्म होगा। पूर्ण ग्रहण की सबसे गहरी छाया करीब 15 मिनट तक ही रहेगी। इसके बाद चंद्रमा धीरे-धीरे बड़े आकार में दिखना शुरू होगा।

आखिर चंद्रमा लाल रंग का क्यों दिखता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह ढक जाता है तो अंधेरा छा जाता है लेकिन पूरी तरह स्याह नहीं होता। इसके बजाए यह लाल रंग का दिखता है इसलिए पूर्ण चंद्र ग्रहण को लाल या रक्त चंद्रमा भी कहा जाता है। सूर्य के प्रकाश में दृश्य प्रकाश के सभी रंग होते हैं। पृथ्वी के वातावरण से गुजरने के दौरान प्रकाश में नीला प्रकाश छन जाता है जबकि लाल हिस्सा इससे गुजर जाता है। इसलिए आकाश नीला दिखता है और सूर्योदय और सूर्यास्त के समय लालिमा छा जाती है। चंद्र ग्रहण के मामले में लाल प्रकाश पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरता है और यह चंद्रमा की ओर मुड़ जाता है जबकि नीला प्रकाश इससे बाहर रह जाता है। इससे चंद्रमा पूरी तरह लाल नजर आता है।सुपरमून की यह तस्वीर अमेरिका की है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा कि 2021 में अन्य पूर्ण चंद्रमाओं की तुलना में फ्लावर मून पृथ्वी के सबसे निकट पहुंचेगा। जिसके कारण यह वर्ष के सबसे निकटतम और सबसे बड़े पूर्ण चंद्रमा के रूप में दिखाई देगा।पृथ्वी का चक्कर काटते समय ऐसी स्थिति बनती है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है यानी सबसे कम दूरी होती है। इस दौरान कक्षा में करीबी बिंदु से इसकी दूरी करीब 28,000 मील रहती है। इसी परिघटना को सुपरमून कहा जाता है।चंद्रमा के निकट आ जाने से यह आकार में बड़ा और चमकीला दिखता है। वैसे, सुपरमून और सामान्य चंद्रमा के बीच कोई अंतर निकालना कठिन है जब तक कि दोनों स्थिति की तस्वीरों को किनारे से ना देखें। चंद्र ग्रहण से क्या मतलब है। चंद्र ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह या आंशिक रूप से छिप जाता है। यह परिघटना पूर्णिमा के दौरान होती है। इसलिए पहले पूर्णिमा के चंद्रमा को समझने का प्रयास करते हैं। यह अमेरिका में चंद्रग्रहण की तस्वीर है।

पूर्णिमा के दिन पूर्ण आकार में दिखता है चंद्रमा

पृथ्वी की तरह ही चंद्रमा का आधा हिस्सा सूरज की रोशनी में प्रकाशित रहता है। पूर्ण चंद्र की स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा और सूरज पृथ्वी के विपरीत दिशा में होते हैं। इससे रात में चंद्रमा तश्तरी की तरह नजर आता है। प्रत्येक चंद्र कक्षा में दो बार चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य दोनों के समान क्षैतिज तल पर होता है। अगर यह पूर्ण चंद्रमा से मेल खाती है तो सूरज, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरेगा। इससे पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है।

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