Budget dayनई दिल्‍ली । हलवा रस्‍म के साथ ही आम बजट पेश होने की अब उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।एक फरवरी को आ रहे मोदी सरकार के चौथे बजट पर पूरे देश की निगाहें लगी हुई हैं। अगले आम चुनाव से पहले इस सरकार का यह आखिरी आम बजट भी है। सरकार ने भले ही इसके लिए अपनी तैयारी कर रखी हो लेकिन आम लोगों के लिए इस बजट के मायने अन्‍य बजट की ही तरह हैं। मसलन आम आदमी की यदि बात करें तो वह कुछ चीजों में कमी के लिए हमेशा सरकार की ओर बड़ी हसरत भरी नजरों से देखता रहता है। उसके लिए बजट का अच्‍छा या फिर बुरा होना भी इसी बात पर निर्भर करता है कि उसको इस बजट से क्‍या मिला। लिहाजा इस बार भी आम आदमी को इस बजट से पहले जैसी ही अपेक्षाएं हैं।

कौन होता है आम आदमी

हम बार-बार आम आदमी की बात कर रहे हैं लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि ये आम है आखिर है क्‍या। तो चलिए पहले इस आम आदमी के बारे में ही आपको बताते हैं। एक अध्ययन के अनुसार हमारे देश में लगभग 300 मिलियन लोग मध्यम वर्ग में आते हैं। कुछ विदेशी रिपोर्ट्स और शोध के मुताबिक भारत के मध्यम वर्ग की आबादी, देश की आबादी की लगभग 20 फीसद तक पहुँच चुकी है, यानी पूरी आबादी का पांचवां हिस्सा। अनुमान है कि 2025-26 तक यह वर्ग आबादी का दोगुना हो जाए। देश में इस वक्त बीस हजार रुपए से लेकर दस लाख रुपए तक की घरेलू आय के परिवारों को अस्पष्ट रूप से मध्य वर्गीय श्रेणी से परिभाषित किया जा रहा है। आइए जानते हैं इस बजट से क्‍या चाहता है आम आदमी।

भवन ऋण

मौजूदा कुछ समय लोगों के लिए घर की चाहत काफी बढ़ गई है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार ने इसके लिए जो मुहिम शुरू की है उसमें घर खरीदने को लेकर ग्राहक को करीब ढाई लाख की रियायत देने का प्रावधान है। लिहाजा यहां पर घर खरीदने की चाहत रखने वालों को घर की कीमत में सीधेतौर पर इस रकम की छूट मिलती दिखाई देती है। आम आदमी की बात करें तो आयकर कानून की धारा 80EE के तहत पहली बार घर खरीदने वालों को 50,000 रुपये का अतिरिक्त कटौती लाभ मिलता है। यह लाभ पूर्व में उन ग्राहकों को दिया गया था जिनका ऋण 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच मंजूर किया गया था। लिहाजा इस बार भी घर खरीदने वाले ग्राहकों की यह चाहत जरूर होगी कि इसका लाभ उन्‍हें भी मिले और बीते वित्‍त वर्ष के दौरान मंजूर किए गए भवन ऋण वालों को भी इसका फायदा हो।

टैक्स में बचत

टैक्‍स बचाने को लेकर हर कोई वित्‍त वर्ष के आखिर में सारे उपाय करता दिखाई देता है। वर्तमान में एक टैक्सपेयर आयकर अधिनियम की धारा 80 CCE के अनुसार धारा 80C, 80CCC और 80 CCD(1) के तहत हर साल 1.5 लाख रुपये तक टैक्स कटौती का लाभ उठा सकता है। इस सीमा को 2014 में 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया था। इससे पहले आखिरी बार 2003 में इसे संशोधित किया गया था। इस तरह पिछले 14 साल में इस धारा के तहत सिर्फ 50% संशोधन किया गया है। आम आदमी की यदि बात करें तो उसको उम्‍मीद है कि आने वाले बजट में सरकार इसमें कुछ और फायदा उन्‍हें देगी। दरअसल टैक्‍स देने वाला व्‍यक्ति अपनी जेब में कुछ और पैसे का ख्वाहिशमंद शुरू से रहा है। ऐसा ही अब भी है।

टैक्स स्लैब

टैक्स भरने वालों को हर साल इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। फिलहाल साल में 2.5 लाख रुपये तक कमाने वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। लेकिन मौजूदा समय में जिस तरह से महंगाई बढ़ी है और जीवनयापन का खर्च बढ़ा है उसको देखते हुए सभी को उममीद है कि आने वाले बजट में सरकार उनकी मंशा को जानते हुए इस टैक्‍स स्‍लैब में बढ़ोतरी जरूर करेगी। आम आदमी चाहता है कि टैक्स बचाने में लोगों की मदद करने के लिए विभिन्न धाराओं के तहत छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। आपको बता दें कि भारत की आबादी के महज एक से दो फीसद लोग ही आयकर भरत है। वर्ष 2016 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 28.7 मिलियन लोगों ने टैक्‍स रिटर्न फाइल किया था। इनमें से महज 12.5 मिलियन लोगों ने ही अपना टैक्‍स जमा किया जबकि करीब 16.2 मिलियन लोगों ने टैक्‍स के नाम पर कोई पैसा सरकार को नहीं दिया था।

वरिष्ठ नागरिकों को छूट

भारत में 80 वर्ष की आयु से के आयकरदाता काफी कम हैं। लेकिन ऐसे लोग धारा 80 D के तहत 30,000 रुपये तक मेडिकल इलाज पर किए गए खर्च को क्लेम करने का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन इसका लाभ 60 से 80 उम्र के लोग नहीं उठा सकते हैं, जो वरिष्‍ठ नागरिकों की श्रेणी में आते हैं। लिहाजा ऐसे आयुवर्ग के लोगों की यह उम्‍मीद हो सकती है कि सरकार इस बारे में उन्‍हें कुछ रियायत देगी और यह लाभ उन्‍हें भी मिल सकेंगे।

एजुकेशन लोन

एजुकेशन लोन पर दिए गए ब्याज को धारा 80E के तहत टैक्स कटौती के रूप में क्लेम किया जा सकता है। यह लाभ सिर्फ 8 साल के लिए ही उपलब्ध है। इस स्‍कीम को वर्ष 2006 में शुरू किया गया था लेकिन उस वक्‍त शिक्षा का खर्च आज के मुकाबले काफी कम था। आम आदमी चाहता है कि टैक्स कटौती के लिए इस सीमा को बढ़ा देना चाहिए।

मेडिकल रीइंबर्समेंट

मेडिकल खर्च का रीइंबर्समेंट टैक्स बचाने का एक बहुत बढ़िया तरीका है, लेकिन इसकी वर्तमान सीमा 15,000 रुपये ही है। जो पिछले दशक में तेजी से बढ़े मेडिकल खर्च के लिहाज से बहुत कम है। आम आदमी की बात करते हैं तो उन्‍हें इसमें भी बढ़ोतरी की उम्‍मीद है।

एफडी रिटर्न

सरकार लगातार बचत को लेकर काफी ध्‍यान दे रही है। लेकिन सरकार की तरफ से मिलने वाले रिटर्न से लोगों में इसको लेकर मायूसी है। आम आदमी अक्‍सर अपनी छोटी-छोटी बचत को एक मुश्‍त रकम के तौर पर बैंक में रखवाता आया है। कुछ समय पहले तक अच्छा खासा रिटर्न भी दे रहा था। लेकिन हाल ही में एफडी की दरों में आई गिरावट के कारण वास्तविक रिटर्न और कम हो गया है। पेंशनभोगियों और कम जोखिम उठाने वाले निवेशकों की रक्षा करने के लिए यह जरूरी है कि एफडी रिटर्न को डेब्ट म्यूचुअल फंड्स के समकक्ष कर दिया जाए। इसको लेकर लोगों को सरकार से काफी उम्‍मीदें हैं।