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सोनिया गांधी के चाणक्य की जीत

Ahmed_Patel_RSTVनई दिल्ली।राज्यसभा के चुनाव गुजरात में पहले भी हुए हैं. अहमद पटेल का ये पांचवा राज्यसभा चुनाव था. इससे पहले राज्यसभा का चुनाव एक फ़्रेंडली मैच की तरह होता था जिसका परिणाम आमतौर पर मालूम होता था कि अगर इतनी सीटें हैं तो कौन-कौन लोग चुनकर आएंगे.इस बार भी गुजरात का राज्यसभा चुनाव कुछ अलग नहीं था. लेकिन दो बातों की वजह से सारा समीकरण बदल गया. एक तो ये कि शंकरसिंह वाघेला ने नेता विपक्ष के पद से इस्तीफ़ा दिया और दूसरा ये कि बीजेपी ने ये मन बना लिया कि इस चुनाव को वो बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाएगी और जीतेगी. इन दो कारकों के होने की वजह से ये एक बहुत हाई वोल्टेज ड्रामा की शक्ल में सामने आया.घटनाक्रम को देखें तो ये बात समझ में आती है कि बीजेपी ने इस चुनाव को इस स्तर तक ले जाने का काफ़ी पहले ही मन बना लिया था.इस योजना के तहत बीजेपी ने सबसे पहला काम ये किया कि शंकर सिंह वाघेला पर प्रश्न उठाना शुरू किया और ऐसा माहौल तैयार कर दिया जिससे ये लगने लगा कि वाघेला शायद बीजेपी में जा रहे हैं. जबकि हक़ीक़त ये थी कि उस समय तक वाघेला का ऐसा कोई इरादा नज़र नहीं आ रहा था.कांग्रेस के लिए ये जीत बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी क्योंकि कांग्रेस लंबे अरसे से बैकफ़ुट पर चल रही है. अहमद पटेल को हराने के लिए बीजेपी और सरकार दोनों ने मिलकर बेहद आक्रामक रणनीति तैयार की थी. लेकिन अब जबकि अहमद पटेल इस कांटे की टक्कर में विजेता बनकर उभरे हैं तो परसेप्शन के स्तर पर और मनोबल के स्तर पर इसका काफ़ी फ़ायदा कांग्रेस को मिलेगा.इस साल के आखिर में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं. अहमद पटेल की जीत से कांग्रेस पार्टी के पास एक मौका आ गया है चीज़ों को ठीक करने का.मोदीजी के गुजरात से केंद्र में जाने के बाद गुजरात बीजेपी में वैसी बात नहीं रही है जो पहले होती थी. वैसे भी कहते हैं कि वट वृक्ष के नीचे कुछ नहीं पनपता. तो मोदी जी के समय गुजरात बीजेपी में मोदी ही मोदी नज़र आते थे. दूसरे नंबर के नेता का भरपूर अभाव था.

अहमद पटेल ने राज्यसभा चुनाव से एक सप्ताह पहले दिए अपने एक इंटर्व्यू में उन्होंने कहा था कि यह उनकी और अमित शाह की व्यक्तिगत राजनीतिक लड़ाई है। यही वजह थी कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पॉलिटिकल एडवाइजर अहमद पटेल को राज्यसभा में जाने से रोकने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था। हालांकि, कई राज्यों को केसरिया रंग में रंगने वाले शाह की रणनीति इस बार कामयाब नहीं हो पाई और पटेल एक बार फिर गुजरात से होकर 5वीं बार राज्यसभा पहुंच गए। एक नजर डालते हैं, अहमद पटेल पर जो कांग्रेस का ‘चाणक्य’ और सोनिया गांधी का राजनीतिक सलाहकार है, इसके अलाव वे अपने जमाने कोई टाइम एक बेहतरीन क्रिकेटर भी हुआ करते थे।

सबसे कम उम्र में सांसद बन दिल्ली आए अहमद पटेल गुजरात के भरूच से आते हैं, जिनके पास भारतीय राजनीति का करीब 40 साल का अनुभव है। 1977 में उन्होंने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और 26 साल की उम्र में 60 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया। पटेल अपने जमाने के सबसे युवा सांसद बनकर दिल्ली आए थे। राजनीति के पंडित बताते है कि पटेल की उस जीत ने इंदिरा गांधी को भी हैरान कर दिया था। पटेल पहली बार कांग्रेस की सीट से उस टाइम जीतकर दिल्ली आए थे, जब पूरा मुल्क आपातकाल जैसी भयावह घटना से जूझ चुका था और कांग्रेस के खिलाफ विरोध की जबरदस्त लहर थी। पटेल की इस जीत के बाद कांग्रेस ने उन्हें गुजरात की यूथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनाया। उसके बाद पटेल के जीत का अंतर हमेशा बढ़ता ही गया।

गांधी परिवार के हैं करीबी अहमद पटेल हमेशा से ही गांधी परिवार करीबी रहे हैं। जब वे पहली बार जीत कर आए, तो इंदिरा गांधी को उनके काम करने का तरीका पसंद था। 1985 में वे प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव भी रहे। 1985 से जनवरी 1986 तक अहमद पटेल ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रहे। 1991 में जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने, तब अहमद पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया गया।1993 में अहमद पटेल पहली बार राज्यसभा पहुंचे और उसके बाद उन्होंने सोनिया गांधी को भारतीय राजनीति में स्थापित करने के लिए एक चाणक्य के रूप हमेशा पर्दे के पिछे काम किया। 2001 में पटेल, सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार बने। राजनीतिज्ञों का मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए हर छोटे और बड़े फैसले उनके सलाहकार पटेल से होकर गुजरते हैं और वे ही उन्हें हर चीज के लिए एडवाइज देते हैं। पटेल बताते हैं, ‘मै सिर्फ सोनिया गांधी के एजेंडे पर अपनी पूरी ईमानदारी से काम करता हूं। 2005 और 2009 के यूपीए की जीत में पटेल का अहम योगदान माना जाता है।

पटेल एक बहुत अच्छे क्रिकेटर भी हैं, कॉलेज के जमाने में वे साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम के बैट्समैन हुआ करते थे। अहमद पटेल के दिमाग में क्या चलता है, इसके बारे में किसी को पता नहीं होता है। अहमद पटेल हिंदी अखबार ज्यादा पढ़ते हैं, उनका मानना है कि देश की जनता के बारे में आपको हिंदी अखबारों से ही पता चलता है। बहुत ही कम न्यूज देखने वाले और मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले, पटेल ने हमेशा से ही पर्दे के पीछे ही राजनीति की है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पटेल वो इंसान है जिन्हें कभी अपने विरोधियों से भी शिकायत नहीं रही। पटेल भले ही मीडिया से दूरी बनाए रखते हो लेकिन वे कांग्रेस के ना सिर्फ ‘किंगमेकर’ हैं बल्कि पार्टी के ‘पावरफुल लीडर’ भी हैं।

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