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सच बात—देश की बात

भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू

Corona-Vaccination-Preperation-6नई दिल्‍ली कोरोना वायरस के खिलाफ भारत ने सबसे बड़ा अटैक कर दिया है। देशभर में कोरोना टीकाकरण अभियान का पहला चरण शुरू हो चुका है। शनिवार सुबह साढ़े दस बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए इस अभियान की शुरुआत की। पीएम मोदी ने इस मौके पर सभी टीकाकरण केंद्रों को सीधे संबोधित भी किया। उन्होंने कहा, ‘‘इतने बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया। यह अभियान इतना बड़ा है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि दुनिया के कई देशों की आबादी तीन करोड़ से कम है और भारत पहले ही चरण में 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है।’’ केंद्र सरकार के मुताबिक, पहले दिन कुल 3006 वैक्‍सीनेशन सेंटर्स पर तीन लाख से ज्‍यादा हेल्‍थ वर्कर्स को पहली डोज दी जाएगी।

 

पीएम मोदी ने लॉन्‍च किया टीकाकरण अभियान

modi farmerप्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार सुबह 10.30 बजे कोरोना टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर मोदी ने कहा कि “आज वो वैज्ञानिक, वैक्सीन रिसर्च से जुड़े अनेकों लोग विशेष प्रशंसा के हकदार हैं, जो बीते कई महीनों से कोरोना के खिलाफ वैक्सीन बनाने में जुटे थे। आमतौर पर एक वैक्सीन बनाने में बरसों लग जाते हैं। लेकिन इतने कम समय में एक नहीं, दो मेड इन इंडिया वैक्सीन तैयार हुई हैं।” उन्होंने देशवासियों से टीकाकरण को लेकर अफवाहों से बचने की भी सलाह दी।

इनको लगी वैक्‍सीन की पहली डोज
वैसे तो पूरे देश में टीकाकरण अभियान की शुरुआत एक साथ होगी। मगर राजस्थान में जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य सुधीर भंडारी को सबसे पहले टीके की खुराक दी गई। इसके अलावा, मध्य प्रदेश में एक अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और एक सहायक समेत अन्य लोग सबसे पहले टीका लेने वालों में शामिल रहे। हर सेंटर पर एक दिन में औसतन 100 लोगों का वैक्‍सीन लगाई जाएगी। दिल्‍ली के एम्‍स में सबसे पहले एक सैनिटेशन वर्कर को टीका लगा।

देशभर में वैक्‍सीन के स्‍वागत की तैयारियां
Corona-Vaccine-3कोविड टीकाकरण अभियान शुरू होने से पहले देशभर के अस्‍पतालों में खास तैयारियां की गई हैं। कई अस्‍पतालों को सजाया गया है। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में सिविल डिफेंस के लोग तैनात हैं और वॉलिंटियर्स को पूरी प्रक्रिया के बारे में समझा रहे हैं। साउथ वेस्ट दिल्‍ली के दिव्य प्रस्थ अस्‍पताल में अभी वैक्सीन का इंतजार हो रहा है। महाराष्‍ट्र के मुंबई में जब वैक्‍सीन पहुंची तो हेल्‍थ वर्कर्स ने तालियों की गड़गड़ाहट से उसका स्‍वागत किया। कूपर हॉस्पिटल का स्‍टाफ वैक्‍सीन लगवाने वालों के लिए मिठाइयां लेकर इंतजार कर रहा है।भारत में ऑक्‍सफर्ड-एस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन जिसे यहां पर सीरम इंस्टिट्यूट ने डिवेलप किया है, उसे अप्रूवल मिला है। यह वैक्‍सीन ‘कोविशील्ड’ नाम से उपलब्‍ध है। इसके अलावा भारत बायोटेक की ‘कोवैक्सीन’ भी लोगों को दी जाएगी। दोनों को सुरक्षा के मानकों पर सुरक्षित और असरदार पाया गया है। ‘कोविशील्ड’ और ‘कोवैक्सीन’ की 1.65 करोड़ डोज में से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को हेल्‍थ वर्कर्स की संख्‍या के हिसाब से अलॉट किया गया है।सरकार के मुताबिक, सबसे पहले एक करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले करीब दो करोड़ कर्मियों और फिर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को टीके की खुराक दी जाएगी। बाद के चरण में गंभीर रूप से बीमार 50 साल से कम उम्र के लोगों का टीकाकरण होगा। स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च सरकार वहन करेगी।

कुछ सवाल हों तो यहां करें कॉल
कोविड-19 महामारी, टीकाकरण की शुरुआत और कोविन सॉफ्टवेयर के संबंध सवालों के जवाब के लिए एक कॉल सेंटर-1075 भी बनाया गया है। सारे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने टीकाकरण के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। दिल्ली में, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में एलएनजेपी अस्पताल में एक डॉक्टर, एक नर्स और एक सफाई कर्मचारी को कोविड-19 का टीका दिया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी में 81 केंद्रों पर कोविड-19 का टीकाकरण अभियान शुरू होगा।

भारत बायोटेक का ऐलान, साइड इफेक्ट हुआ तो देंगे मुआवजा

कांग्रेस द्वारा वैक्सीन पर सवाल खड़े किए जाने के बीच भारत बायोटेक ने बड़ा ऐलान किया। कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक का कहना है कि यदि इससे साइड इफेक्ट होता है तो फिर मुआवजा मिलेगा। भारत बायोटेक से केंद्र सरकार ने 55 लाख खुराकें अभी खरीदी हैं और शनिवार से शुरू हुए टीकाकरण में उसका इस्तेमाल भी हो रहा है। टीका लगवाने वाले लोगों द्वारा जिस फॉर्म पर हस्ताक्षर किए जा हैं, उस पर भारत बायोटेक ने कहा है, ”किसी प्रतिकूल या गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में आपको सरकारी और अधिकृत केंद्रों और अस्पतालों में मान्यताप्राप्त देखभाल दी जाएगी।” सहमति पत्र के अनुसार, अगर टीके से गंभीर साइड इफेक्ट होने की बात साबित होती है तो मुआवजा बीबीआईएल द्वारा दिया जाएगा।बता दें कि कोवैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण में कोविड-19 के खिलाफ एंटीडोट विकसित होने की पुष्टि हुई है। टीका निर्माता कंपनी के मुताबिक, टीके के क्लिनिकल रूप से प्रभावी होने का तथ्य अभी अंतिम रूप से स्थापित नहीं हो पाया है तथा इसके फेज के क्लिनिकल ट्रायल में स्टडी की जा रही है।इसमें कहा गया है, ”इसलिए यह जान लेना आवश्यक है कि टीका लगाने का मतलब यह नहीं है कि कोविड-19 संबंधी अन्य सावधानियों को नहीं बरता जाए।” इस क्षेत्र के एक विशेषज्ञ के मुताबिक चूंकि टीका अभी क्लिनिकल ट्रायल के चरण में ही है इसलिए यदि किसी को गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं तो मुआवजा देना कंपनी की जिम्मेदारी बनती है। वहीं, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एल्ला ने ट्वीट किया कि कोवैक्सीन और भारत बायोटेक, देश और कोरोना योद्धाओं की सेवा करके सम्मानित और कृतज्ञ महसूस कर रहे हैं।

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