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दिल्ली में कोरोना जमातियों से जुड़े 63 फीसदी केस

Nizamuddin-markazनई दिल्लीवैश्विक महामारी कोरोना वायरस दिल्ली में तेजी से फैल रहा है। इस खतरनाक वायरस से केवल राजधानी में अबतक 1700 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। दिल्ली में तेजी से बढ़ते संक्रमितों की संख्या का निजामुद्दीन मरकज से सीधा संबंध पाया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि दिल्ली में 63 फीसदी कोरोना मरीज किसी न किसी रूप से जमातियों से जुड़े हैं।

देश में संक्रमण के कुल मामलों के 29.8 फीसदी जमात से जुड़े
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश भर में कोरोना वायरस से संक्रमितों की तादाद 14378 हो गई है। इनमें से 4291 लोगों का संबंध निजामुद्दीन मरकज से है। उन्होंने यह भी कहा कि तबलीगी जमात से देश के 23 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में कोरोना संक्रमण फैला है।

दिल्ली में 63 फीसदी केस जमात से संबंधित
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में कोरोना वायरस के 63 फीसदी केस किसी न किसी रूप से तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। इतना ही नहीं, तमिलनाडु के 84 फीसदी, तेलंगाना के 79 फीसदी, उत्तर प्रदेश के 59 फीसदी मामले जमात से जुड़े हैं।

दिल्ली में 1767 हुई मरीजों की संख्या
राजधानी में अभी तक कुल 1767 कोरोना पॉजिटिव केस आ चुके हैं। जिसमें कि 67 मरीज शुक्रवार को आए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 911 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। 27 मरीज आईसीयू में रखे गए हैं जबकि छह को वेंटिलेटर पर रखा गया है।

कोरोना योद्धाओं की संक्रमण से हुई मौत तो मिलेगी 1 करोड़ की आर्थिक सहायता: केजरीवाल

केजरीवाल सरकार ने ऐलान किया कि यदि किसी डॉक्टर, नर्सेज, पुलिसकर्मी या आपातकालीन सेवा से जुड़े किसी भी कर्मचारी-अधिकारी की संक्रमण से मौत हो जाती है तो उसके परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।उन्होंने अपील करते हुए कहा कि कंटेनमेंट जोन के लोग सरकारी दिशा निर्देशों का पालन करें और आपसी मेल मिलाप न करें। कोरोना संक्रामक बीमारी है और यह किसी को भी हो सकती है। इसलिए सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें।

प्लाज्मा तकनीकी के ट्रायल पर भी बातचीत
कहा जा रहा है कि इस बैठक में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के ऊपर प्लाज्मा तकनीकी के ट्रायल को लेकर भी बातचीत हुई है। सीएम केजरीवाल दो दिन पहले ही इस तकनीकी के प्रयोग को लेकर सार्वजनिक बयान दे चुके हैं।

क्या है प्लाज्मा टेक्नोलॉजी
इस तकनीकी में संक्रमण से मुक्त हो चुके मरीजों के रक्त की जरूरत होगी। उसके रक्त से प्लाज्मा को निकालकर उसे इनरिच किया जाएगा और उसे संक्रमित रोगियों के शरीर में डाला जाएगा। हालांकि, कोरोना से स्वस्थ हुए मरीजों की तादाद बहुत कम है। जो मरीज तुरंत ठीक हुआ है उसी के शरीर में यह एंडीबॉडी मिलेगी।इस एंटीबॉडी को संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डालने के बाद कोरोना वायरस धीरे-धीरे कमजोर हो जाएगा। इससे मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाएगी।

दिल्ली को मिली 42,000 रैपिड टेस्ट किट

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि उनको 42 हजार रैपिड किट्स मिल चुकी हैं। इनका इस्तमाल उन इलाकों में किया जाएगा जो इलाके हॉट स्पॉट हैं और उनको शील्ड किया गया है। जांच की प्रक्रिया रविवार से ही शुरू कर दी जाएगी।

भारत को मिली टेस्टिंग किट
कोरोना वायरस संकट से जूझ रहे भारत के सामने पहले टेस्टिंग किट की कमी का संकट था। लेकिन अब लाखों की संख्या में रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट्स आ गई हैं। लेकिन अभी एक बड़ी परेशानी सामने है। यह दिक्कत एंटीबॉडी किट्स से रिजल्ट को लेकर है जिनपर संशय बना रहता है। दरअसल, दुनियाभर से ऐसी रिपोर्ट आई हैं जिसने एंटीबॉडी किट्स पर विश्वसनीयता का संकट खड़ा कर दिया है।

क्या है एंटी बॉडी टेस्ट
रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट से ये कंफर्म नहीं होता कि किसी शख्स में कोरोना वायरस है या नहीं। बस ये पता चलता है कि उसमें कोरोना वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी बन रही हैं या नहीं। यानी ये कोरोना मरीजों की संभावित पहचान करने में मददगार है। इस टेस्ट से पता चलता है कि क्या शरीर में कोरोना वायरस आया था या नहीं। एंटीबॉडी पॉजिटिव आती है तो पीसीआर करवाने की सलाह दी जाती है। अगर वह भी पॉजेटिव आई तो यानी कोरोना है। अगर नहीं तो यानी पुराना इंफेक्शन हो सकता है। ऐसे में अलग रहने की सलाह दी जाती है। अगर दोबारा रिपोर्ट नेगेटिव आई तो शख्स घर जा सकता है।

सिर्फ निगरानी में इस्तेमाल होगा: ICMR
फिलहाल देश में चीन से 5 लाख से ज्यादा एंटीबॉडी टेस्ट किट आ चुकी हैं। इनका इस्तेमाल निगरानी और महामारी विज्ञान अनुसंधान में किया जाएगा। आईसीआमआर के हेड साइंटिस्ट डॉ आर गंगाखेडकर ने बताया था कि अगर किसी शख्स के शुरुआती 10 दिन या दो हफ्तों में एंटीबॉडी टेस्ट हुआ तो सिर्फ 80 प्रतिशत चांस हैं कि उसमें एंटीबॉडी मिलें। ऐसे में किट का इस्तेमाल बीमारी पता करने में नहीं बल्कि नजर रखने के लिए किया जाएगा।

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