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कोरोना वायरस; अच्‍छी खबर, भारत में ठीक हुए 100 मरीज

1.7 लाख करोड़ का कोरोना पैकेज, वित्त मंत्री की 15 प्रमुख घोषणाएं

भारतीय वैज्ञानिक ने तैयार की कोरोना वायरस टेस्टिंग किट

कोरोना वायरस; मोदी बने मिसाल

modi covid 19कोरोना वायरस देश में अब तक की सबसे बड़ी विपदा के रूप में सामने आया है। कहा जा रहा है कि यह वायरस देश के सामने पिछले सौ सालों की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसमें पहले लोगों की सेहत का सवाल है और फिर उससे निपटने के बाद आर्थिक सेहत से भी जूझना होगा। यह लड़ाई लंबी चलने वाली है और इसी लड़ाई के दौरान इस बात की भी परीक्षा होगी कि देश के अंदर मौजूद स्वास्थ्य व्यवस्था इस वायरस से निपटने में कितनी सक्षम है। जब हालात सामान्य होंगे, तब लोग इस संकट से जूझने वाली सरकार को आंकेंगे भी और उसी अनुरूप सरकार का भविष्य भी तय करेंगे। 24 मार्च को जब प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया और आधी रात से पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की तो ट्वीटर पर पूरी दुनिया में उनसे जुड़ी बातें ट्रेंड करने लगीं। लेकिन ये कोई पहला मामला नहीं है, जब पीएम मोदी को न सिर्फ भारत के नागरिक बल्कि विश्व भर के लोग गंभीरता से सुन रहे थे। इससे पहले पीएम मोदी की अपील पर 22 मार्च को भी विकसित देश 130 करोड़ लोगों की जनता कर्फ्यू को टकटकी लगाए देखते रहे। दरअसल कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री मोदी ने जो कुछ किया है, वो कोई दूसरीसरकार न तो सोच पाई और न ही उसे करने का दमखम दिखा पाई।

कोरोना वायरस की गंभीरता को मोदी सरकार ने समझा

चीन में पैदा हुए कोरोना वायरस की गंभीरता को पूरे विश्व में पहली बार मोदी सरकार ने ही गंभीरता से समझा। वे न केवल समय से पहले सतर्क हुए, बल्कि लगातार कड़े कदम उठाते रहे।31 दिसंबर, 2019 को चीन ने पहली बार वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन को बताया कि उसके हुबेई राज्य के वुहान शहर में एक असामान्य मारी हो रही है, जिसके वायरस के बारे में कोई जानकारी नहीं है। 23 जनवरी तक इस बीमारी से चीन में 17 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 550 लोग संक्रमित हो चुके थे। चीन ने इसके बाद वुहान को लॉकडाउन करना शुरू कर दिया था। लेकिन इसके बाद भी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इसकी गंभीरता को नहीं समझा और पब्लिक इमरजेंसी घोषित नहीं की।

भारत सरकार ने तेज कार्रवाई की

कोरोना वायरस की बीमारी को WHO ने 30 जनवरी को ग्लोबल इमरजेंसी घोषित किया। जबकि महामारी घोषित करने में 11 मार्च तक का समय लग गया। लेकिन सच्चाई ये है कि इससे काफी पहले से ही मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर जुट चुकी थी।कोरोना वायरस का पहला मामला भारत में 31 जनवरी को केरल में सामने आया। तभी से भारत सरकार सक्रिय हो गई। 1 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने इस हालात से निपटने के लिए GoM बनाने का निर्देश दे दिया। इस GoM में कई मंत्रियों को शामिल किया गया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन, नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी,विदेश मंत्री डा़ एस जयशंकर, गृह राज्य मंत्री जी कृष्णन रेड्डी, अश्वनी चौबे और मनसुख लाल मांडवीय भी शामिल हैं। इस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की जिम्मेदारी थी कि देश में इस वायरस से निपटे और लड़ने का प्रबंध करे। तीन फरवरी को इसकी पहली बैठक दिल्ली के निर्माण भवन में हुई। बैठक में ट्रेवल एडवाइजरी के साथ ही कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।3 फरवरी तक 72,353 यत्रियों की 21 एयरपोर्ट पर स्क्रिंनिंग की जा चुकी थी। 338 नमूनों को जांच के लिए भेजा जा चुका था, जिनमें 335 निगेटिव पाए गए थे और 3 पॉजिटिव थे। कोरोना वायरस की जांच के लिए ICMR National Institute of Virology (NIV) पुणे  केन्द्र बनाया गया, जबकि 12 अन्य क्षेत्रिय केन्द्र बनाए गए।
पीएम मोदी की सक्रियता से भारतीयों की तेज वापसी

23 जनवरी से ही मोदी सरकार ने वुहान में रह रहे भारतीयों सेसंपर्क करने और उन्हें लाने की तैयारियां शुरू कर दी। और जैसे ही चीन ने भारत को 31 जनवरी को इजाजत दी, 1 फरवरी को वुहान में फंसे भारतीयों का पहला जत्था भारत लाया गया। इन भारतीयों को 14 दिन के आइसोलेशन में रखा गया। मोदी सरकार की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि 30 जनवरी को WHO ने इसे ग्लोबल इमरजेंसी घोषित किया, लेकिन इससे पहले ही भारत सरकार काफी तैयारियां कर चुकी थी।मोदी सरकार की सक्रियता की वजह से भारत अब तक लगभग 28,000 भारतीयों को वापस लेकर आया है। इसमें सबसे अधिक खाड़ी देश के लोग हैं।

01 फरवरी को चीन के वुहान शहर से 324 भारतीयों को वापस लाया गया।

02 फरवरी को वुहान से 323 भारतीय और मालदीव्स के सात लोगों को वापस लाया गया।

इस बीच भारत ने महामारी को देखते हुए चीन की मदद भी की। 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना के ग्लोबमास्टर से 15 टन मेडिकल सामान चीन को भेजा गया, जिसमें मास्क इत्यादि थे।

27 फरवरी को वुहान से एक बार फिर 112 लोगो को वापस लाया गया, जिनमें 76 भारतीय और 36 विदेशी थे, जिनमें बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और मेडागास्कर के नागरिक शामिल थे।

27 फरवरी को ही एयर इंडिया के विमान से जापान के योकोहामा में क्वारान्टाइन क्रूज शिप में फंसे 119 भारतीयों और पांच विदेशियों को वापस लाया गया।

इस बीच ईरान में स्थिति खराब होने की वजह से वहां भी भारतीय फंसे हुए थे, जिनकी टेस्टिंग भी नहीं हो पा रही थी।

इसे देखते हुए 6 मार्च को महान एयरप्लेन से ईरान से 300 ब्लड सैंपल टेस्टिंग के लिए लाया गया।

10 मार्च ईरान से 58 तीर्थयात्रियों को, 11 मार्च को इटली से 83 भारतीयों को, 13 मार्च को ईरान से 44, 15 मार्च को इटली से 218, 15 मार्च को ही ईरान से 234, 16 मार्च को ईरान से 53, 22 मार्च को इटली से 263 भारतीयों को वापस लाया गया।

इसके अलावा 31 मार्च तक खाड़ी देशों से 26 हजार भारतीय महाराष्ट्र पहुंचेंगे, जिन्हें क्वारेन्टाइन करके रखा जाएगा।

भारत सरकार से बाकी देशों की सरकारों की तुलना करें तो पता चलेगा कि विदेशी नागरिक भारतीयों की तरह इतने भाग्यशाली नहीं रहे। अमेरिका ने जहां विदेश में फंसे सिर्फ 1225 नागरिकों को बाहर निकाला, वहीं जापान ने 828, ब्रिटेन ने 342, फ्रांस ने 533, जर्मनी ने 180, कनाडा ने 561 और दक्षिण कोरिया ने सिर्फ 928 नागरिकों को ही अपने देश लाने का काम किया।

भारत ने पहली बार सहयोगी देशों को आपस में जोड़ा

कोरोना के खिलाफ पीएम मोदी के एक कदम ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया, जब उन्होंने सार्क देशों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक के लिए आमंत्रित किया। पूरी दुनिया ने देखा कि किस प्रकार 15 मार्च को पीएम मोदी के नेतृत्व में 8 विकासशील देश कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हुए। हालांकि पाकिस्तान यहां भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, लेकिन इस बैठक से कोरोना के खिलाफ पूरी दुनिया में एक मैसेज गया। पीएम मोदी की इस पहल को विकसित देशों ने भी फॉलो किया। बाद में दुनिया के विकसित देशों के संगठन G-7 ने भी बैठक की और अब G-20 की बैठक होने जा रही है।

भारत ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय कोष बनाया

मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत ने न केवल सहयोगी देशों को जोड़ा, बल्कि कोरोना से लड़ने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय कोष का भी गठन किया। भारत ने इसमें 10 मिलियन डॉलर का योगदान दिया। इसके बाद पाकिस्तान को छोड़कर बाकी सभी 6 देशों ने इसमें अपना  योगदान दिया। एक प्रकार से दुनिया के सबसे अविकसित क्षेत्र ने कोरोना से लड़ने के लिए पूरे विश्व के सामने एक मिसाल पेश की।

130 करोड़ भारतीयों का जनता कर्फ्यू

कोरोना वायरस की महामारी से निपटने में दुनिया के कई विकसित देश अपने हाथ खड़े कर चुके हैं। जो इटली स्वास्थ्य सेवा में दुनिया में दूसरे नंबर पर है, वहां आज रोजाना सैकड़ों लोगों की जान जा रही है और सरकार ने भगवान भरोसे सब कुछ छोड़कर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। यही हाल पूरे यूरोप का है। जो अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है, वो भी कोरोना से कराह रहा है।

लेकिन भारत में मोदी सरकार ने वो काम कर दिया, जो विकसित देश अपनी ताकत और कानून की सख्ती से भी नहीं कर पाए। पीएम मोदी ने 19 मार्च को देश को संबोधित किया और 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया। पूरी दुनिया 22 मार्च को भारत की ओर टकटकी लगाए बैठी थी। लेकिन भारत के लोगों ने एक बार फिर पीएम मोदी को निराश नहीं किया। एकाध वाकये को छोड़कर जनता कर्फ्यू पूरी तरह से सफल रहा। दरअसल जिस आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग की बात विकसित देशों में सिर्फ कही और सुनी जा रही थी, उसे पीएम मोदी की एक अपील पर भारत के लोगों ने कर दिखाया।

विश्व इतिहास में पहली बार इतना बड़ा लॉकडाउन

कोरोना महामारी आज जिस तेज गति से पूरी दुनिया को जकड़ रही है, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मार्च को राष्ट्र के नाम संबोधन में एक नया ऐलान किया। पहली बार देश में आधी रात से इक्कीस दिनों के लिए संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की। आश्चर्य की बात ये है कि इस फैसले को पूरे देश ने एक सुर से स्वीकार किया।खुद पीएम मोदी ने कहा कि वो ये फैसला एक प्रधानमंत्री होने केनाते नहीं, बल्कि घर का एक सदस्य होने के नाते कह रहे हैं। सच्चाई ये है कि जिस महामारी से आज विकसित देश पूरी तरह जकड़ चुके हैं, उन्होंने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने लोगों के स्वास्थ्य के ऊपर देश की अर्थव्यवस्था को तरजीह दी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने साफ माना कि उनके इस फैसले से अर्थव्यवस्था को नुकसान जरूर होगा, लेकिन इस देश के एक-एक नागरिकों की जान को बचाना जरूरी है। सच्चाई ये है कि आज विकसित देश न तो लोगों की जिंदगी बचा पा रहे हैं और न ही अर्थव्यवस्था। कोरोना महामारी पूरी दुनिया में उसी तेजी से पांव पसार रही है, मरने वालों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन सुखद बात ये है कि उस हिसाब से भारत में इसका पैटर्न बिल्कुल विपरित है। यहां तक कि भारत में मंगलवार को नए कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में 55 प्रतिशत तक की कमी आई है। और ये सब कुछ प्रधानमंत्री मोदी की पहल से ही संभव हो पाया है। यही वजह है कि आज वर्ल्ड हेल्थ ऑरगेनाइजेशन समेत दुनिया के कई देश पीएम मोदी की तारीफ कर चुके हैं। जाहिर है आज पूरी दुनिया कोरोना से लड़ने के लिए पीएम मोदी के एक-एक कदम का बारीकी से अध्ययन कर रही है।

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