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लोगों ने वंशवाद को स्वीकार कर लिया है?

Rahul-Robert-Priyanka-Soniaआज हम आपसे एक सीधा सवाल करना चाहते हैं.. – वंशवाद पर आपकी क्या राय है..?  आप इसके पक्ष में हैं या विरोध में हैं ? क्या आप चाहते हैं.. कि आपके क्षेत्र के विधायक और सांसद के बच्चे ही.. आगे चलकर आपके क्षेत्र के सांसद और विधायक बनें.. क्या आप चाहते हैं कि देश की राजनीति में बड़े पद पर बैठे नेताओं के बच्चे ही आगे चलकर उनके पदों पर बैठें ? या फिर आप चाहते हैं कि इन पदों पर देश के आम नागरिकों का भी उतना ही अधिकार है.. और आम नागरिकों को भी य़े मौका मिलना चाहिए ?

ये सवाल आज इसलिए उठे हैं.. क्योंकि कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी  ने एक तरह से वंशवाद का समर्थन कर दिया है. और इसके बाद वंशवाद के विषय पर बहस शुरू हो गई है. अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में दिया गया राहुल गांधी के भाषण के बारे में आज आपने दिन भर सुना होगा. ऐसा लग रहा था जैसे राहुल गांधी विदेशी ज़मीन पर किसी देसी चुनावी रैली को संबोधित कर रहे हों. उनके तमाम डायलॉग्स आप अलग अलग न्यूज़ चैनल्स पर सुन चुके होंगे.. लेकिन हमें लगता है कि राहुल गांधी की इस राजनीतिक बयानबाज़ी का विश्लेषण करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

लेकिन उन्होंने जिस आत्मविश्वास के साथ वंशवाद को सही ठहराने की कोशिश की है. वो अपने आप में चिंताजनक है. आप खुद सुनिए कि राहुल गांधी ने वंशवाद पर क्या कहा?  राहुल गांधी के इस बयान को सुनने के बाद ऐसा लगता है कि जैसे वो कह रहे हों कि हमारे देश के लोगों ने वंशवाद को स्वीकार कर लिया है और खुशी खुशी इसे अपना लिया है. अपने वंशवाद को सही ठहराने के लिए उन्होंने अखिलेश यादव, M. K. Stalin, अनुराग ठाकुर और अभिषेक बच्चन का नाम लिय़ा है.

राहुल गांधी बड़े ही गर्व के साथ ये कह रहे हैं कि भारत का सिस्टम ऐसे ही चलता है. इसका सीधा सा मतलब ये है कि राहुल गांधी ने वंशवाद को स्वीकार कर लिया है. लेकिन क्या भारत ने वंशवाद को स्वीकार कर लिया है? क्या आपने वंशवाद को स्वीकार कर लिया है? ये सबसे बड़ा सवाल है. आज हमने इस विषय पर रिसर्च किया तो हमें पता चला कि मौजूदा लोकसभा में कांग्रेस के 48% सांसद वंशवाद से निकलकर आए हैं. 2014 में पूरे देश में कांग्रेस के सिर्फ 44 सांसद ही जीतकर आए थे और इनमें से भी करीब आधे… अपने पिता या रिश्तेदारों की वजह से राजनीति में आए हैं.

बीजेपी भी इसमें पीछे नहीं है. मौजूदा लोकसभा में बीजेपी के 15% सांसद वंशवाद की देन हैं. इसका मतलब ये है कि वंशवाद की जड़ें, भारत की ज़्यादातर राजनीतिक पार्टियों के अंदर.. गहराई तक फैली हुई हैं. और इन जड़ों को काटने के लिए देश को अपनी राजनीतिक सोच बदलनी होगी. आम लोगों को भी व्यक्ति पूजा की आदत को छोड़ना होगा.. तभी हमारे देश में योग्यता का परचम लहराएगा

क्या आप चाहते हैं कि आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री का पद या कोई भी महत्वपूर्ण राजनीतिक पद सिर्फ राहुल गांधी के परिवार वालों को ही मिले.. क्या आप चाहते हैं कि भविष्य में नरेंद्र मोदी के परिवार के सदस्य ही.. प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे ? या फिर आम लोगों को बराबरी से.. ऐसे पदों तक पहुंचने का मौका मिले ?

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