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पत्नी को है पति का वेतन जानने का अधिकार: हाई कोर्ट

GTY_supreme_court_cases_jef_131003_16x9_992भोपाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि पत्नी को यह जानने का अधिकार है कि उसके पति का वेतन कितना है। डबल बेंच ने कहा है कि पत्नी को तीसरा पक्ष मानकर पति की वेतन संबंधित जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता पत्नी को सूचना के अधिकार के तहत उसके पति की ‘पे-स्लिप’ देने के निर्देश दिए हैं।

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केनस्र सरकार ओर अदालत सभी कानून क्या हिन्दुओ पर ही लागू करेगी या फिर किसी ओर पर भी लागू करेगी मुश्लिम समाज वाले क्या सरकार के रिश्तेदार है जो कोई कानून इन मुश्लिमो पर सरकार लागू कर…जिला न्यायालय और लोक सूचना अधिकारी ने भी यह आवेदन खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति एसके सेठ और न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता सुनीता जैन को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत उनके पति की पेमेंट स्लिप देने के निर्देश जारी किए हैं। सुनीता के वकील के डी घिल्डियाल ने बताया, ‘युगलपीठ ने मेरी मुवक्किल की अपील की सुनवाई करते हुए 15 मई के अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता पत्नी है और उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके पति का वेतन कितना है। पत्नी को तीसरा पक्ष मानकर पति की वेतन संबंधित जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।’

भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग
घिल्डियाल ने बताया, ‘मेरी मुवक्किल की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया था कि वह (सुनीता) और अनावेदक पवन जैन पति-पत्नी हैं। दोनों के वैवाहिक संबंध में तनाव चल रहा है। उनके पति भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) में प्रतिनियुक्ति पर उच्च पद पर हैं। पति द्वारा उन्हें भरण-पोषण के लिए मात्र 7,000 रुपये दिए जाते हैं जबकि पति का वेतन प्रतिमाह सवा दो लाख रुपए है।’

बता दें कि भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग करते हुए जिला न्यायालय में पति की पे-स्लिप मंगाने के लिए आवेदन दायर किया था, जिसे जिला न्यायालय और लोक सूचना अधिकारी ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था।

बीएसएनएल को दिए निर्देश
घिल्डियाल के मुताबिक, इसके बाद सुनीता ने केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) के समक्ष अपील दायर की। सीआईसी ने 27 जुलाई 2007 को पारित अपने आदेश में आवेदिका महिला को पति की पे-स्लिप सूचना के अधिकार के तहत प्रदान करने के बीएसएनएल को निर्देश जारी किए थे। सीआईसी के आदेश के खिलाफ अनावेदक पति ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने मार्च 2015 को गिरीश रामचंद्र देशपांडे विरूद्ध सीआईसी के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए सीआईसी के आदेश को खारिज कर दिया था।

घिल्डियाल ने बताया कि इसके बाद याचिकाकर्ता महिला ने अपने पति पवन जैन तथा बीएसएनएल को अनावेदक बनाते हुए दो अलग-अलग अपील दायर की थी, जिस पर युगलपीठ ने यह फैसला सुनाया है।

  
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