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कोरोना ने ब्राजील में मचाई तबाही…

covid in brazilनई दिल्ली. कोरोना वायरस  की दूसरी लहर का प्रकोप देश भर में दिख रहा है. वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत का नंबर अब दूसरा है. संक्रमण के मामलों में वृद्धि के चलते मार्च में भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़ दिया था. लेकिन, अब भी एक बड़ा सवाल है कि कोरोना ने ब्राजील में सबसे ज्यादा तबाही क्यों मचाई. संक्रमण को देखें तो भारत और ब्राजील की हालत एक जैसी है. दोनों देशों में 1 करोड़ 40 लाख के करीब मामले हैं. मुंबई से लेकर साओ पाउलो तक अस्पतालों पर दबाव है. आईसीयू बेड और ऑक्सीजन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. हालांकि वैज्ञानिकों के लिए अब भी ब्राजील में संक्रमण से हुई मौतें एक पहेली बनी हुई हैं. 21 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले ब्राजील (Brazil) में अब तक 3,61,800 लोगों की मौत हुई है, जोकि भारत के मुकाबले लगभग दोगुना है, जबकि ब्राजील के मुकाबले भारत की आबादी कई गुना ज्यादा है.

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के बायोस्टैटिक्स के चेयर भ्रमर मुखर्जी कहते हैं कि दोनों देश एक उलझाऊ पहेली की तरह हैं और इसे सुलझाने के लिए शरलॉक होम्स की जरूरत पड़ेगी. ब्लूमबर्ग के डाटा के मुताबिक पिछले हफ्ते ब्राजील में एक दिन में 4000 से ज्यादा मौत के मामले सामने आ रहे थे, जबकि भारत में प्रतिदिन हो रही मौतों की संख्या 1 हजार के आसपास है. पिछले हफ्ते तो यह इससे भी नीचे थी. एशियाई देशों में संक्रमण के चलते मृत्यु दर 1.2 फीसद है, जबकि ब्राजील में यह 2.6 है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राजील और भारत में संक्रमण के असर में उम्र एक बड़ा कारक है. अगर दोनों देशों में हुई मौतों की माध्य आयु देखें तो भारत में यह 26 वर्ष है, जबकि ब्राजील में यह 33.5 है.

वायरस का म्यूटेंट स्ट्रेन
ब्राजील के मुकाबले भारत में संक्रमण के चलते मृत्यु दर कम होने के बारे में विशेषज्ञ कई बातें सामने रखते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि पर्यावरण और बीमारियों को लेकर दोनों देशों का अनुभव भी मायने रखता है. भ्रमर मुखर्जी के मुताबिक ब्राजील की 87 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है, लेकिन भारत में दो तिहाई आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. जहां एक खुला क्षेत्र है और आसपास का इलाका भी हवादार है. ये तथ्य है कि ब्राजील में कोरोना वायरस का म्यूटेंट स्ट्रेन P.1 की दिसंबर में ही पहचान कर ली गई थी. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में मिले वायरस के स्ट्रेन भी ब्राजील में मिले हैं.
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि ये तीनों स्ट्रेन ज्यादा संक्रामक हैं. अपोलो अस्पताल की मैनेजिंग डायरेक्टर सुनीता रेड्डी कहती हैं कि पहली लहर के मुकाबले हम ज्यादा तैयार हैं. बेड और मेडिकल संसाधनों का हमने बढ़िया उपयोग किया है. भारत में कोरोना की दूसरी लहर के पीछे म्यूटेंट स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जा रहा है, और ये लहर पहली के मुकाबले बहुत ही खतरनाक है. हालांकि ये कहना काफी मुश्किल है, क्योंकि किसी भी एशियाई देश में वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग 1 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हुई है.

कोरोना की दूसरी लहर
ब्राजील में मृत्यु दर ज्यादा होने की वजहों में बोलसोनारो सरकार का कुप्रबंधन भी जिम्मेदार माना जा रहा है. जैर बोलसोनारो पहले लॉकडाउन का विरोध करते रहे. स्थानीय सरकारों से लड़ते रहे और मास्क पहनने से भी सार्वजनिक तौर पर इनकार करते रहे. दूसरी ओर भारत में सितंबर के बाद अनलॉक गाइडलाइंस आने के बाद लोगों ने गाइडलाइन के पालन में कोताही बरती. लोग पुरानी जिंदगी में वापस लौटने लगे. चुनाव, त्यौहार पर सुरक्षा मानकों का पालन ना करने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया.
मॉन्ट्रियल में मैक्गिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मधुकर पई ने कहा कि पॉलिटिकल लीडरशिप के मामले में ब्राजील की स्थिति डरावनी है, वहीं भारत में संक्रमण की रफ्तार थमने पर लोग लापरवाह हो गए. पई कहते हैं कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि भारत का हाल ब्राजील की तरह नहीं होगा. देश के कई इलाकों में टारगेटेड लॉकडाउन लगाया गया है. पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं. चुनावी रैलियों में लोगों की भीड़ है, तो गंगा किनारे लोग हिंदू श्रद्धालु डुबकी लगा रहे हैं.उन्होंने कहा कि दोनों देशों को टीकाकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के उपायों को कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता है. हर देश को महामारी रोकने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.

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