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दाती महाराज सवालों के घेरे में , पीड़िता की आपबीती

firनई दिल्ली रेप और कुकर्म जैसे संगीन आरोपों से घिरे दाती महाराज उर्फ मदन लाल राजस्थानी ने अपने बचाव में ऑडियो-विडियो क्लिप के साथ पीड़िता का एक ‘शपथ पत्र’ सार्वजनिक किया है। अब यह शपत्र पत्र भी सवालों के घेरे में है। इनकी पड़ताल करते हुए कई चौंकाने वाली बातें दिखीं। शपथ पत्र के 11वें पैरे से शपथ पत्र शक के दायरे में आ गया है। वहीं बुधवार शाम को एनबीटी को फोन करके दाती महाराज ने कहा कि वह जल्द ही दिल्ली आएंगे और जांच में सहयोग करेंगे। दूसरी ओर पीड़िता के वकील प्रदीप तिवारी का कहना है कि सभी डॉक्युमेंट काफी पहले दाती महाराज ने आश्रम में लड़की से जबरन साइन करवाए थे।  शपथ पत्र को गौर से पढ़ा तो ऐसा लगा कि उसे मनमाने तरीके से कुछ जगहों पर पेन से भरा गया है। कुछ स्थानों पर छेड़छाड़ की गई है। दाती महाराज की ओर से भेजा गया 3 पेज का यह शपथ पत्र टाइप किया हुआ है। लेकिन कुछ जगहों पर खाली जगह छोड़ी गई है। वहां ब्लू पेन से पीड़िता का नाम, पता, खासतौर पर तारीख लिखी गई है। शपत्र पत्र में 11 पॉइंट देते हुए मजमून के शुरुआत में जहां पेन से 2006 लिखकर पीड़िता के हवाले से कबूलनामा दिखाया गया है कि वह स्वेच्छा से दाती महाराज की शरण में आई, वहीं आखिरी 11 वें पैरे में जो लिखा है उससे शपथ पत्र शक के दायरे में आ गया।

उसमें टाइप किए गए मैटर में लिखा है कि.. ‘मैं निजी कारणों से यह कर रही हूं। इसमें किसी भी प्रकार का छल, प्रलोभन, बल, प्रयोग, उत्पीड़न इत्यादि नहीं है। मैं वचन देती हूं कि मैं दाती महाराज की किसी प्रकार की निंदा नही करूंगी। किसी भी प्रकार का उपहास नहीं करूंगी। क्योंकि यहां मैंने ऐसा कुछ भी निंदा या उपहास आदि के लायक नहीं पाया है। यदि मैं ऐसा कुछ करती हूं तो इसमें मेरा निजी स्वार्थ ही होगा तथा दाती महाराज अथवा संस्थान मेरे ऊपर उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। आज के बाद मैं किसी अनुचित, अमानवीय अथवा गलत आचरणों के लिए स्वयं जिम्मेदार होऊंगी’..। टाइप किये गए मैटर में पीड़िता के कथित साइन और अंगूठा निशानी होने का दावा किया गया। क्या ऐसे शपथ पत्र वहां सभी से भरवाएं जाते रहे हैं? इसके जवाब में आश्रम की तरफ से तर्क दिया गया है कि पहले तो इस तरह के शपथ पत्र नहीं लिए जाते थे, लेकिन आसाराम प्रकरण के बाद शपथ पत्र लेने लगे। मामले में पीड़ित परिवार का दावा है कि आरोपी बाबा ने अपनी करतूतों के खुलासे के डर से उन्हीं दिनों में डरा धमकाकर कई पेपर्स पर लड़की से साइन करवाए थे। एक बार जब कुछ पेज पढ़ने की कोशिश की तो आरोपी बाबा ने कई थप्पड़ जड़े।

वहीं बुधवार शाम को दाती महाराज ने एनबीटी को फोन करके कहा, ‘मैं जल्द ही दिल्ली आऊंगा। मैं न भागा हूं न भागूंगा।’ उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं, उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने जांच में पूरा सहयोग देने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘पिछले दो दिन से जो भी कुछ मैं अखबार और टीवी चैनल्स पर अपने बारे में पढ़ और सुन रहा हूं, उसे लेकर मैं यही कहना चाहता हूं कि मैं कहीं नहीं भाग रहा हूं। मैं सैकड़ों बेटियों का पिता हूं, उनके आसपास ही रहूंगा। जब भी मुझे अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया जाएगा को मैं वहां हाजिर रहूंगा। अभी मुझे बहुत बेटियों की शादी करनी हैं।’ आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 25 वर्षीय युवती के साथ बार-बार बलात्कार करने के आरोपी स्वयंभू बाबा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। जिला पुलिस से मामले की जांच बुधवार को ही क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।

 ‘मैं तुम्हारा प्रभु हूं, इधर-उधर क्यों भटकना…’

यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पीड़िता इन्साफ के लिए एक हफ्ते से परिवार के साथ दर-दर भटकती रही। उन्होंने जान पर खतरे का अंदेशा जताया है और पुलिस प्रोटेक्शन की मांग की है। परिवार इन दिनों डर के कारण मोबाइल बंद करके एनसीआर में जगह बदल-बदलकर रह रहा है। आरोप है कि दाती मदनलाल राजस्थानी की तरफ से लगातार धमकियां मिल रही हैं। पीड़िता ने कंप्लेंट दर्ज कराने में आई मुश्किलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वह कालकाजी थाने गईं। आरोप है कि उन्हें सुबह 11 बजे से शाम साढ़े चार बजे तक बिठाए रखा गया। थाने में कई पुलिसकर्मियों ने शिकायत पढ़ी, लेकिन शाम को यह कहकर भेज दिया कि यह केस फतेहपुर बेरी इलाके का है। डेढ़ दशक से अनुयायी रहे पीड़ित परिवार के दिलो-दिमाग पर बाबा का खौफ है। पीड़िता ने उस रात का जिक्र करते हुए बताया कि उसे सफेद कपड़े पहनाए गए। कहा गया कि चरण सेवा के लिए सफेद कपड़े वालों को ही भेजा जाता है। जिस अंधेरी गुफा नुमा कमरे में भेजा गया वहां एसी के एलईडी लाइट पर भी टेप लगाया हुआ था। मदनलाल राजस्थानी ने कहा, ‘मैं तुम्हारा प्रभु हूं। क्यों इधर- उधर भटकना। मैं सब वासना खत्म कर दूंगा।’ पीड़िता ने कहा कि उन्होंने खुद को कैद में पाया। उस रात रोने के अलावा कुछ नहीं था। वहां से बाहर निकलने के बाद जिसने भेजा था उसने कहा, जो कुछ भी हुआ है सभी करते हैं।

पीड़िता ने चिट्ठी लिख बताई आपबीती…
‘मुझे नहीं पता शिकायत के बाद मेरा क्या होगा.. शायद आप लोगों के बीच में मैं न रहूं, मगर औरों की जिंदगी बर्बाद न हो’

 मैं……………. आज आपसे उस बारे में शिकायत करने जा रही हूं, जिसे डर के कारण, पारिवारिक खातमे के डर से हिम्मत न कर सकी। मगर अब घुट-घुट कर जिया नहीं जाता। भले मेरी जान क्यों न चली जाएं, जिसकी मुझे पूरी आशंका है। फिर भी मरने से पहले यह सच सबके सामने लाना चाहती हूं….

मेरे साथ दाती मदनलाल राजस्थानी ने अपने सहयोगी श्रद्धा उर्फ नीतू, अशोक, अर्जुन, नीमा जोशी के साथ मिलकर 9 जनवरी 2016 को दिल्ली स्थित आश्रम श्री शनि तीर्थ, असोला फतेहपुर बेरी में रेप, कुकर्म किया। यह तब हुआ जब मुझे ‘चरण सेवा’ के लिए श्रद्धा उर्फ नीतू के द्वारा दाती मदनलाल राजस्थानी के पास ले जाया गया। मेरे प्राइवेट पार्ट में …… किया गया। उस रात चीखती-चिल्लाती, दर्द से कराहती रही।

यही चीजें मेरे साथ 26, 27, 28, मार्च 2016 को राजस्थान स्थित गुरुकुल, सोजत शहर, जिला पाली में दाती मदनलाल राजस्थानी ने दोहराईं। अनिल व श्रद्धा ने इस घटना को अंजाम देने के लिए दाती मदनलाल राजस्थानी का भरपूर साथ दिया। अनिल ने भी यही सब किया। इन दोनों घटनाओं में मेरे शरीर के हर हिस्से को जानवरों की तरह नोंचा गया। ये सब मेरे साथ ‘चरण सेवा’ के नाम पर किया गया।

श्रद्धा उर्फ नीतू हमेशा कहती, …‘इससे तुम्हें मोक्ष प्राप्त होगा। यह भी सेवा ही है। तुम बाबा की हो और बाबा तुम्हारे। तुम कोई नया काम नहीं कर रही हो, सब करते आए हैं। कल हमारी बारी थी, आज तुम्हारी बारी है, कल न जाने किसकी होगी। बाबा समंदर हैं और हम सब उसकी मछलियां हैं। इसे कर्ज समझ कर चुका लो’…

इन तीन दिनों में अनिल ने भी मेरे साथ जबर्दस्ती रेप, कुकर्म किया। ये तीन रातें मेरी जिंदगी की सबसे भयानक रातें थीं। इस तीन रातों में न जाने मेरे साथ कितनी बार …किया। ये सब करते हुए मदललाल राजस्थानी ने एक बात कही- ‘तुम्हारी सेवा पूरी हुई’…

इस घटना के बाद मेरी सोचने की इच्छाशक्ति मानो जैसे खत्म हो गई थी। घुट-घुट के जीने से अच्छा है एक बार लड़कर मरूं ताकि इस गंदे राक्षस की सच्चाई सबके सामने ला सकूं। ना जाने कितनी ही लड़कियां मेरी तरह बेबस, लाचार हैं।

मुझे नहीं पता इस शिकायत के बाद मेरा क्या होगा। शायद मैं आप लोगों के बीच न रहूं पर मेरी पुकार आप सभी के बीच रहेगी। सिर्फ इसी उम्मीद के सहारे यह पत्र लिख रही हूं। शायद मुझे न्याय मिले व औरों की जिंदगियां बर्बाद होने से बच सकें। मदनलाल राजस्थानी को जीने का अधिकार नहीं हैं।

मेरी एक ही इच्छा है कि इसके कर्मों की सजा फांसी होनी चाहिए। आपसे यह प्रार्थना है कि मेरा नाम, मेरी पहचान, मेरा पता गुप्त रखा जाए। वरना उसके द्वारा दी गईं धमकियां (न तू रहेगी, न तेरा अस्तित्व) सच हो जाएंगी, जिसकी वजह से आज तक चुप रही।

मुझे व मेरे परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, अगर मुझे सुरक्षा नहीं दी गई तो यह तय है, न मैं रहूंगी, न मेरा परिवार। सब खत्म हो जाएगा। दाती मदनलाल राजस्थानी बहुत खतरनाक है।

अब तक इसलिए चुप रही। मुझे नहीं लगता था कि मेरा कोई साथ देगा। मगर जब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो इस बारे में अपनी ममी-पापा को बताया। उन्होंने वचन दिया कि आखिरी सांस तक तुम्हारा साथ देंगे।

न्याय की इच्छा मरने से पहले और मरने के बाद, जो मेरे साथ हुआ और किसी के साथ न हो।

पीड़िता.. XYZ 

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