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कोटा के अस्पताल में 91 बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन ?

kotaकोटा के अस्पताल में पांच दिन के भीतर 12 और बच्चों की मौत की खबर है. इससे पहले इस महीने 27 दिसंबर तक 79 बच्चों की मौत खबर आई थी. कुल मिलाकर इस महीने 91 बच्चों की मौत हो चुकी है. लेकिन बच्चों की मौत रोकने की जगह इसे लेकर राजस्थान में सियासत शुरू हो गई है.राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में इस महीने 77 बच्चों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है। पिछले 48 घंटे में ही 10 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसमें नवजात शिशु भी शामिल हैं। एक महीने में इतने बच्चों की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन की नींद नहीं खुली है और वह इन आंकड़ों को नॉर्मल बता रहा है। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की ओर से किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। अस्पताल प्रशासन द्वारा मौतों की जांच के लिए गठित एक कमिटी ने कहा है कि अस्पताल के सारे उपकरण सुचारू रूप से चल रहे हैं, इसलिए अस्पताल की तरफ से लापरवाही का सवाल नहीं पैदा होता।बच्चों की मौत को विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गंभीरता से लिया है। बीजेपी ने चार महिला सांसदों की फैक्ट फाइंडिंग टीम बनाई है।

सफाई देने में जुटा अस्पताल प्रशासन
इस अवस्था में नवजात के मस्तिष्क में पर्याप्त ऑक्सिजन नहीं पहुंच पाती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 23 दिसंबर को पांच महीने के बच्चे की गंभीर निमोनिया की वजह से मौत हुई जबकि सात साल के एक बच्चे की एक्यूट रेस्पिरटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम यानी सांस लेने में दिक्कत की वजह से मौत हुई। इसी दिन एक डेढ़ महीने के बच्चे की मौत भी हो गई जो जन्म से ही दिल की बीमारी से पीड़ित था। इनके अलावा 24 दिसंबर को दो महीने के बच्चे की गंभीर एस्पिरेशन निमोनिया और एक अन्य डेढ़ महीने के बच्चे की ऐस्पिरेशन सीजर डिसऑर्डर की वजह से मौत हो गई।
बच्चों की मौत के आंकड़े को नॉर्मल बता रहा अस्पताल
बुधवार को अस्पताल अधीक्षक डॉ. एसएल मीणा ने बताया, ‘जांच के बाद सामने आया कि 10 बच्चों की मौत नॉर्मल थी न कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह से।’ अस्पताल के पीडिएट्रिक विभाग के अमृत लाल बैरवा ने कहा कि बच्चों को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उन्होंने कहा, ‘नैशनल एनआईसीयू रेकॉर्ड के अनुसार, शिशुओं की 20 फीसदी मौत स्वीकार्य है जबकि कोटा में शिशु मृत्यु दर 10 से 15 फीसदी है जो खतरनाक नहीं है क्योंकि ज्यादातर बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। गंभीर मरीज बूंदी, बारां, झालावाड़ और मध्य प्रदेश से भी आए थे। यहां रोज एक से तीन शिशुओं और नवजात की मौत होती है।’

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने CM गहलोत को लिखी चिट्ठी

kota 2लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संसदीय क्षेत्र कोटा के एक अस्पताल में पिछले दो दिनों में 10 शिशुओं की मौत होने पर शुक्रवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस विषय की जांच-पड़ताल कराने और आवश्यक मेडिकल इंतजाम करने का अनुरोध किया. बिरला ने कहा कि कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में स्थित जेके लोन अस्पताल में शिशुओं की असमय मौत सभी के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि इस बड़े अस्पताल में योग्य चिकित्साकर्मियों और जीवन रक्षक उपकरणों के अभाव के चलते हर साल 800 से 900 शिशुओं और 200 से 250 बच्चों की मौत हो जाती है. बिरला ने गहलोत को लिखे पत्र में कहा कि जानकारी के मुताबिक अस्पताल में जीवन रक्षक उपकरण काम नहीं कर रहे हैं और योग्य चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल कर्मचारी के कई पद खाली हैं. उन्होंने इसे हर साल इस अस्पताल में शिशुओं और बच्चों की मौत होने की मुख्य वजह बताया और इस विषय की जांच पड़ताल करने के लिए गहलोत से एक कमेटी गठित करने का अनुरोध किया. बिरला ने कहा कि उन्होंने इस विषय की जांच पड़ताल करने और अस्पताल में सुविधाओं को बेहतर करने के लिए तथा सभी आवश्यक इंतजाम करने का गहलोत से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया है.

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