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जीटीबी अस्पताल में दिल्लीवासियों को तरजीह देने वाला सर्कुलर रद्द

ERERERदिल्ली की केजरीवाल सरकार को आज हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में तगड़ा झटका दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी के गुरु तेगबहादुर अस्पताल में इलाज के लिए दिल्लीवासियों को अन्य लोगों के मुकाबले तरजीह देने संबंधी दिल्ली सरकार के सर्कुलर को शुक्रवार को रद्द कर दिया।मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और न्यायमूर्ति वी. के. राव की पीठ ने दिल्ली की आम आदमी सरकार की इस पायलट परियोजना को चुनौती देने वाली एक एनजीओ की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।अदालत इसपर विचार कर रही थी कि अन्य लोगों के मुकाबले जीटीबी में इलाज के लिए दिल्लीवासियों को तरजीह देने की आप सरकार की परियोजना संविधान द्वारा दिए गए समानता और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करती है या नहीं।

दिल्ली का वोटर आई कार्ड एक अक्तूबर से अनिवार्य कर दिया है

दरअसल, दिल्ली सरकार ने सर्कुलर जारी कर अस्पताल में इलाज के लिए दिल्ली का वोटर आई कार्ड एक अक्तूबर से अनिवार्य कर दिया है। पूर्व में इस मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने पूछा था कि दिल्ली सरकार सरकारी अस्पताल में बाहरी मरीजों के इलाज पर रोक कैसे लगा सकती है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि वह इस आदेश को रद्द करे या वापस ले।
इस पर दिल्ली सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने दलील दी कि इलाज पर प्रतिबंध नहीं है। इस पर दिल्ली सरकार से वह निर्देश लेंगे। यह जनहित याचिका एनजीओ सोशल जूरिस्ट की ओर से डाली गई है। याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने जीटीबी अस्पताल में बाहरी मरीजों के इलाज के लिए वोटर आई कार्ड अनिवार्य कर अप्रत्यक्ष रूप से रोक लगा दी है। जबकि बॉर्डर होने के चलते अस्पताल में 70 फीसदी से अधिक मरीज यूपी से आते हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार का यह आदेश मनमाना, अवैध व भेदभाव पूर्ण है। यह आदेश संविधान के समानता व अन्य अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसलिए इस आदेश को फौरन रद्द कर वंचित लोगों को न्याय दिलाया जाए।
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