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संघ किसी का विरोधी नहीं ;मोहन भागवत

mohan-bhagwat-12001नई दिल्ली: ‘भविष्य का भारत ‘ परिचर्चा की शुरुआत करते हुए  सरसंघचालक  मोहन भागवत ने कहा कि वो इस इरादे से अपनी बात नहीं कह रहे हैं आप लोग उनकी बात से सहमत हों। सहमति या असहमति का फैसला आप लोगों को करना है। लेकिन संघ को समझने के लिए 1925 की पृष्ठभूमि को समझना होगा जब नागपुर में इस संगठन की नींव डाली गई। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास हर एक घटना का निर्मम मूल्यांकन करता है। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि हम समाज, देश और दुनिया को किस रूप में योगदान दे रहे हैं।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वैचारिक तौर पर असहमति अपनी जगह है। लेकिन संवाद का रास्ता खुला होना चाहिए। हम संवाद के जरिए किसी भी संगठन के बारे में जो भ्रांतियां हों या अच्छाई हो उसे करीब से समझ सकते हैं। लकीर का फकीर बनकर हमें आलोचनाओं से बचना चाहिये। नकारात्मक आलोचना समाज में विभाजन की वजहों को जन्म देती है। विज्ञान भवन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि संघ किसी राजनीतिक दल का विरोधी नहीं है। संघ की कोशिश है कि परस्पर विरोधी विचारों को एक मंच पर जगह मिलनी चाहिए जिसके जरिए हम राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान कर सकें। इस मौके पर उन्होंने  हुए कहा कि आखिर उस राजनीतिक विचार को कैसे भूला जा सकता है। आजादी के आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका अहम थी।स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि कांग्रेस के रूप में एक बड़ा आंदोलन देश भर में खड़ा हुआ। कांग्रेस से जुड़े अनगिनत लोगों ने देश के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी। यही नहीं कांग्रेस में तमाम ऐसे लोग भी थे जिनके जीवन का प्रभाव हम लोगों के मन और मष्तिष्क पर पड़ा। किसी भी विचार को किसी खास खांचे में डालकर नहीं देखना चाहिए।

कांग्रेस के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एक धारा का यह मानना था कि अपने देश में लोगों में राजनीतिक समझदारी कम है. सत्ता किसकी है, इसका महत्व क्या है, लोग कम जानते हैं और इसलिए लोगों को राजनीतिक रूप से जागृत करना चाहिए. भागवत ने कहा, ‘इसलिए कांग्रेस के रूप में बड़ा आंदोलन सारे देश में खड़ा हुआ. अनेक सर्वस्वत्यागी महापुरूष इस धारा में पैदा हुए जिनकी प्रेरणा आज भी हमारे जीवन को प्रेरणा देने का काम करती है.’सरसंघचालक ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में योजनाएं कम नहीं बनीं, राजनीति के क्षेत्र में आरोप लगते रहते हैं, उसकी चर्चा नहीं करूंगा, लेकिन कुछ तो ईमानदारी से हुआ ही है. सरसंघचालक ने कहा कि देश का जीवन जैसे जैसे आगे बढ़ता है, तो राजनीति तो होगी ही और आज भी चल रही है. सारे देश की एक राजनीतिक धारा नहीं है. अनेक दल है, पार्टियां हैं.

‘विविधताओं से डरने की बात नहीं’

भागवत ने कहा, ‘अब उसकी स्थिति क्या है, मैं कुछ नहीं कहूंगा. आप देख ही रहे हैं.’ भागवत ने कहा, ‘हमारे देश में इतने सारे विचार हैं, लेकिन इन सारे विचारों का मूल भी एक है और प्रस्थान बिंदु भी एक है. विविधताओं से डरने की बात नहीं है, विविधताओं को स्वीकार करने और उसका उत्सव मनाने की जरूरत है.’ उन्होंने कहा कि विविधता में एकता का विचार ही मूल बिंदु है और इसलिये अपनी अपनी विविधता को बनाए रखें और दूसरे की विविधता को स्वीकार करें.

संघ हमेशा तिरंगे का सम्मान करता 

 भागवत ने कहा, संघ हमेशा तिरंगे का सम्मान करता है. स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हर निशानी से प्रत्येक स्वयंसेवक दिल से जुड़ा है लेकिन भगवा ध्वज को हम अपना गुरु मानते हैं. हर साल इसी ध्वज के सामने हमलोग गुरु दक्षिणा कार्यक्रम आयोजित करते हैं. हम इस देश में संघ के दबदबे की मंशा नहीं रखते.  भागवत ने यह भी कहा कि वे लोगों को जोड़ना चाहते हैं, उनपर कुछ थोपना नहीं…संघ के विचारों को वे सबके साथ बांटना चाहते हैं.
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