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दिग्विजय को ‘ राम ‘ तो कमल नाथ को याद आ रहे ‘ हनुमान ‘

kamalnathनई दिल्ली। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भगवान राम तो कमल नाथ को हनुमान याद आ रहे हैं। यह सबकुछ हो रहा है 5 अगस्त को अयोध्या में होने वाले राम मन्दिर निर्माण की शुरूआत की तैयारियों के बीच। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन्दिर निर्माण का श्रीगणेश करने 5 अगस्त को अयोध्या जा रहे हैं। सबसे पहले करते हैं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रमुख कमलनाथ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि-पूजन समारोह की पूर्व संध्या यानी मंगलवार को भोपाल में अपने निवास पर ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ कर रहे हैं। रविवार को कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस दौरान कोविड -19 के सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाएगा।गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को कमलनाथ जी के निवास पर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। वह हनुमानजी के आराध्य भक्त हैं। उन्होंने पार्टी कैडर और नेताओं से मंगलवार को अपने घरों में ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करने के लिए कहा है।

kamalnath hanumanशनिवार को कमलनाथ ने कहा कि हर भारतीय की सहमति से अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। kamalnath chalisaजब कांग्रेस प्रवक्ता से पूछा गया कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित कार्यक्रम के पीछे का कारण क्या है तो उन्होंने कहा कि मंगलवार एक शुभ दिन है।उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को लेकर कोई अंदाज नहीं लगाना चाहिए। यह विशुद्ध रूप से एक आध्यात्मिक कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस सरकार गिरने के चलते कमलनाथ जी अपने निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा में हर साल होने वाले भव्य वार्षिक धार्मिक आयोजन नहीं कर सके।उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले जब कमलनाथ जी संसद थे तो उन्होंने छिंदवाड़ा जिले में भगवान हनुमान की 101 फीट ऊंची प्रतिमा  स्थापित की थी। इस साल मार्च में कांग्रेस के 22 बागी विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया, जिससे राज्य में 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार गिर गई थी।इस विद्रोह के बाद कमलनाथ ने 20 मार्च को मुख्यमंत्री के रूप में इस्तीफा दे दिया, जिससे राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी हुई। मार्च के बाद से 25 विधायकों ने अब तक कांग्रेस के साथ-साथ राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है।

Digvijay-Singh-Ram-Mandirdigi ramकांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आज फिर राम मंदिर के शिलान्यास की तारीख को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी भी चाहते थे कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बने और राम लला वहां विराजें। हमारी आस्था के केंद्र भगवान राम ही हैं, 5 अगस्त को कोई मुहूर्त नहीं है। रही बात मुहूर्त की तो इस देश में 90% से भी ज्यादा हिंदू ऐसे होंगे, जो मुहूर्त, ग्रह दशा, ज्योतिष, चौघड़िया आदि धार्मिक विज्ञान को मानते हैं। मैं तटस्थ हूं इस बात पर कि 5 अगस्त को शिलान्यास का कोई मुहूर्त नहीं है। ये सीधे- सीधे धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं से खिलवाड़ है।दिग्विजय सिंह ने दो दिन पहले राममंदिर के मुख्य पुजारी समेत 14 लोगों के कोरोना पॉजिटिव आने पर कमेंट्स किया था। उन्होंने कहा था कि अब बताओ मुहूर्त सही है या गलत? अब बताओ शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वतीजी सही हैं या गलत? इससे पहले स्वरूपानंद ने 5 अगस्त को कोई मुहूर्त नहीं होने पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद दिग्विजय ने भी इसी बात को दोहराया था।

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