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नेहरू-गांधी परिवार के बिना कांग्रेस की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता : दिग्विजय सिंह

digi gandhiनई दिल्ली : कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को बैठक से पहले मध्यप्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने गांधी परिवार का समर्थन करते हुए सोनिया गांधी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया है.  प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोनिया गांधी से कांग्रेस अध्यक्ष के रुप में कार्य जारी रखने का आग्रह किया है.  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने रविवार देर रात ट्वीट किया, ‘मैं कई वर्षों तक अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी का महासचिव भी रहा. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सोनिया गांधी के खिलाफ तमाम झूठी अफ़वाहों के बावजूद उन्होंने 2004 में कांग्रेस पार्टी की जीत का नेतृत्व किया और अटल बिहारी वाजपेयी को घर पर बैठाया.’अपने अगले ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘सोनिया गांधी के नेतृत्व पर कोई भी सुझाव या आक्षेप बेतुका है. मैं सोनिया गांधी से अपील करता हूं कि वे अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस पार्टी को मजबूती प्रदान करें और कांग्रेस का नेतृत्व करती रहें.’ पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह समय कांग्रेस के लिए एकजुट होने का है.

सिंह ने ट्वीट में कहा, ‘यह समय कांग्रेस के एकमत होने का है.  मत भिन्नता का नहीं. जिस परिवार ने देश की आज़ादी और उसके बाद देश के लिए त्याग और बलिदान किया है वह सर्व विदित है. मीडिया में जो कुछ आ रहा है मैं उस से सहमत नहीं हूं. नेहरू-गांधी परिवार के बिना कांग्रेस की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता. सोनिया जी का नेतृत्व सर्व मान्य है. यदि सोनिया जी कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ना ही चाहती हैं तो राहुल जी को अपनी ज़िद छोड़ कर अध्यक्ष का पद स्वीकार कर लेना चाहिए.  देश का आम कांग्रेस कार्यकर्ता और किसी को स्वीकार नहीं करेगा’.ग़ौरतलब है कि रविवार को पार्टी में उस वक्त नया सियासी तूफान आया जब पूर्णकालिक एवं ज़मीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई. नेतृत्व के मुद्दे पर चर्चा के लिए ही सीडब्ल्यूसी की बैठक चल रही है.

गुलाम नबी आज़ाद ने दी सफाई – सोनिया-राहुल से दिक्कत नहीं, उनकी वजह से नहीं की इस्तीफे की पेशकश

सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की वर्चुअल बैठक के बीच खबर आई थी कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद की ओर से इस्तीफे की पेशकश की खबर आई थी, जिसपर अब उनकी ओर से सफाई आई है. उन्होंने कहा कि उन्हें राहुल गांधी और सोनिया गांधी से कोई दिक्कत नहीं है और उन्होंने उनकी वजह से इस्तीफे की पेशकश नहीं की थी. नबी आज़ाद ने कहा कि उन्होंने बैठक में कुछ कांग्रेस नेताओं के बयान पर इस्तीफे की पेशकश की थी और उन्हें राहुल-सोनिया से कोई दिक्कत नहीं है.दरअसल, इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से लिखी गई एक चिट्ठी को लेकर राहुल गांधी ने एक बयान दिया है, जिसे लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है. सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने इस्तीफे की बात तक कर दी थी. राहुल गांधी ने इस चिट्ठी के इरादों के पीछे संदेह जताते हुए कहा था कि यह चिट्ठी बीजेपी के साथ सांठगांठ में लिखी गई है. सूत्रों ने कहा था कि गुलाम नबी आज़ाद ने इस बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ‘अगर बीजेपी से सांठगांठ की बात साबित हो जता है तो वो पार्टी से इस्तीफा दे देंगे.’दरअसल, इस बैठक में राहुल गांधी ने सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र की टाइमिंग को लेकर गुस्सा जताया था. उन्होंने पार्टी में नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले नेताओं पर निशाना साधा और कहा कि जिस वक्त पत्र भेजा गया उस समय सोनिया गांधी बीमार थी. उन्होंने पत्र के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘जब कांग्रेस मध्य प्रदेश और राजस्थान के सियासी संकट का सामना कर रही थी, जब अध्यक्ष बीमार थी, तब ही चिट्ठी क्यों भेजी गई.’ उन्होंंने यह भी कहा कि चिट्ठी बीजेपी के साथ सांठगांठ में लिखी गई है.

कपिल सिब्बल ने हटाया अपना ट्वीट, कहा- मुझे पर्सनली राहुल गांधी ने दी जानकारी

राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के बाद कांग्रेस के सीनियर नेता द्वारा जताई गई सार्वजनिक आपत्ति को हटा लिया गया है. कपिल सिब्बल ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी कि राहुल गांधी ने मुझे खुद फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और बताया कि उन्होंने इस तरह का बयान नहीं दिया. लिहाजा मैं अपने ट्वीट को हटा रहा हूं. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी के संबोधन को लेकर उठे बवाल को लेकर कांग्रेस की तरफ से सफाई भी आई है.कांग्रेस पार्टी की ओर से कहा गया है कि राहुल ने ‘बीजेपी के साथ मिलीभगत’ जैसा या इससे मिलता-जुलता एक शब्‍द भी नहीं बोला था. इसके बाद वरिष्‍ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्‍बल ने अपना ट्वीट वापस ले लिया है. सिब्‍बल ने कहा, ‘राहुल गांधी ने निजी तौर पर मुझे बताया है कि उन्‍होंने ऐसी कोई बात नहीं कही थी जो बताई जा रही है, इसके बाद मैंने अपना ट्वीट वापस ले लिया है.’इससे पहले सिब्बल ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी को लेकर उनपर कटाक्ष करते हुए कहा था कि उन्होंने पिछले 30 वर्षों में भाजपा के पक्ष में कोई बयान नहीं दिया, इसके बावजूद ‘हम भाजपा के साथ साठगांठ कर रहे हैं.’ उन्होंने बतौर वकील कांग्रेस को सेवा देने का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया, ‘‘ राहुल गांधी का कहना है कि ‘हम भाजपा के साथ साठगांठ कर रहे हैं’. राजस्थान उच्च न्यायालय में कांग्रेस पार्टी का पक्ष रखते हुए सफल हुआ. मणिपुर में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने करने के लिए पार्टी का पक्ष रखा.’

सोनिया गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान, मनमोहन सिंह ने की अपील

कांग्रेस वर्किंग कमेटी  की बैठक शुरू होते ही सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कहा है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नहीं रहना चाहती हैं और नया अंतरिम अध्यक्ष चुनने के लिए प्रक्रिया शुरू किया जाए. अपने भाषण में सोनिया गांधी ने कहा कि चीन के साथ यथास्थिति बदल रही है लेकिन पीएम मोदी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी से अपील की कि वह अभी इस कांग्रेस वर्किंग कमेटी के पूरे सेशन तक के लिए उनको जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. पूर्व पीएम ने इसके साथ ही उन नेताओं की आलोचना की है जिन्होंने चिट्ठी लिखी है. उन्होंने कहा कि यह पत्र दुर्भाग्यपूर्ण है. खबरों के मुताबिक उन्होंने कहा, आलाकमान को करना, एक तरह से कांग्रेस को कमजोर करना है’.  मनमोहन सिंह के बाद अब पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता एके एंटनी  ने भी अपनी राय रखी है. गौरतलब है कि राजस्थान प्रकरण से पार्टी अभी उबरी ही थी कि 23 वरिष्ठ नेताओं ने बदलाव की मांग करते हुए अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख दी. हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस चिट्ठी पर सोनिया गांधी ने विचार करने का आश्वासन भी दिया था लेकिन इससे पहले ही इसे मीडिया में लीक कर दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम को एक तरह से ‘तख्तापलट’ की तौर भी देखा जा रहा है. जिसको लेकर कई तरह के सवाल भी चर्चा में है.इसी बीच सूत्रों के हवाले से एक और जानकारी सामने आई कि इस पूरे प्रकरण में कांग्रेस के ही दो नेताओं का हाथ है. उनका राज्यसभा में कार्यकाल खत्म हो रहा था और उन्हें इस बात की चिंता थी कि हो सकता है दोबारा पार्टी उनके लिए राज्यसभा का रास्ता न खोले. वैसे तो कांग्रेस के पास अब कोटा बचा भी नहीं है और इसे देखते हुए इन दोनों नेताओं ने महाराष्ट्र की एक पार्टी से भी बात कर ली थी और आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए दोनों ने ‘लेटर बम’ का प्रकरण रचा है.क्योंकि यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि इस चिट्ठी के बाद कुछ नेता खुलकर सोनिया गांधी के पक्ष में बोल रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ नेता सोनिया गांधी की तारीफ कर रहे हैं लेकिन अध्यक्ष पद की कुर्सी पर राहुल गांधी को देखना चाहते हैं. इस बात का अंदाजा आप राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और हाल ही में कांग्रेस बगावत कर वापस लौटे सचिन पायलट के बयान से लगा सकते हैं.

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