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DMK में विरासत की जंग ?

karunanidhi leadएम. करुणानिधि की मौत को अभी एक हफ्ता भी नहीं गुजरा है कि उनकी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) में विरासत को लेकर विवाद के संकते फिर मिलने लगे हैं. पार्टी से निष्कासित और करुणानिधि के बड़े बेटे एमके अलागिरी ने दावा किया है कि पिता के सच्चे समर्थक और सहयोगी उनके साथ हैं.

अलागिरी का यह बयान डीएमके कार्यकारी समिति की बैठक से ठीक पहले आया है. चेन्नई में अन्ना मेमोरियल पर अपने पिता को श्रृद्धांजलि देने के बाद अलागिरी ने कहा कि कलाईनर (एम. करुणानिधि) के सच्चे समर्थक मेरे साथ हैं और वे मेरे समर्थन में हैं. भविष्य की राजनीतिक योजना पर उन्होंने कहा कि यह वक्त बताएगा. हालांकि, जब उनसे डीएमके मीटिंग को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा ‘वह पार्टी के सदस्य नहीं हैं और उन्हें इस बारे में कुछ नहीं कहना है.’

बता दें कि डीएमके की राजनीतिक विरासत को लेकर दोनों भाइयों के बीच पुराना विवाद रहा है. दरअसल, करुणानिधि ने 2016 में ही छोटे बेटे एमके स्टालिन को अपना सियासी वारिस घोषित कर दिया था. इससे पहले ही 2014 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए एमके अलागिरी को निष्कासित कर दिया गया था. अलागिरी पर पार्टी लाइन के खिलाफ काम करने के आरोप थे. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि स्टालिन तीन महीने के अंदर मर जाएंगे.ऐसे में अब जबकि 2019 का लोकसभा चुनाव करीब है और पहले ही AIADMK चीफ जयललिता की मौत के बाद तमिलनाडु की सियासत में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, करुणानिधि का जाना डीएमके के लिए संकट की स्थिति पैदा कर सकता है. यही वजह है कि एमके अलागिरी का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है.

राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो करुणानिधि के जाने के बाद अब अलागिरी अपनी राजनीतिक ताकत की आजमाइश कर सकते हैं. तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में भी अलागिरी का काफी प्रभाव है क्योंकि निष्कासन से पहले वह दक्षिणी जिलों के महासचिव थे. निष्कासन के समय करुणानिधि ने अलागिरी के लिए कहा था- ‘उसके मन में स्टालिन के लिए एक अंजान सी नफरत भरी हुई है, अलागिरी ने यहां तक कह दिया कि स्टालिन तीन महीने में मर जाएगा. कोई भी पिता अपने पुत्र के लिए ऐसे शब्द बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन बतौर पार्टी प्रमुख मुझे उसे बर्दाश्त करना पड़ा’ हालांकि अलागिरी ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था.

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