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दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके, केंद्र पूर्वी दिल्ली

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के संक्रमण के बीच राजधानी दिल्ली और एनसीआर रीजन में रविवार शाम भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 दर्ज की गई है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप शाम 5.45 पर आया। भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 8 किलोमीटर अंदर रहा है। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद कई लोग घरों से बाहर निकल आए। इससे एकाएक सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर खतरा पैदा हुआ। हालांकि, इतनी तीव्रता के भूकंप से ज्यादा नुकसान नहीं होने का अनुमान जताया गया है।

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पूर्वी दिल्ली में ज्यादा लोगों ने झटके महसूस किए

दिल्ली के साथ-साथ गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के झटके लगभग 5 सेकंड तक महसूस किए गए। पूर्वी दिल्ली में इसका एपीसेंटर था, इसलिए यहां सबसे ज्यादा लोगों ने झटके महसूस किए।

 

अब तक सबसे ज्यादा 9.4 मैग्नीट्यूड तीव्रता का भूकंप आया
अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड किया गया भूकंप 22 मई1960 को चिली में आया था। यह 9.5 मेग्नीट्यूड तीव्रता का भूकंप था। चिली के बाद दूसरा सबसे बड़ा भूकंप 28 मार्च 1964 में यूनाइटेड स्टेट्स में रिकॉर्ड किया गया था। ये 9.2 मेग्नीट्यूड का था, इससे प्रिंस विलियम साउंड, अलास्का का क्षेत्र काफी प्रभावित हुआ था।

6 की तीव्रता वाला भूकंप भयानक होता है
भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप की असली वजह टेक्टोनिकल प्लेटों में तेज हलचल होती है। इसके अलावा उल्का प्रभाव और ज्वालामुखी विस्फोट, माइन टेस्टिंग और न्यूक्लियर टेस्टिंग की वजह से भी भूकंप आते हैं। डॉ. अरुण ने बताया कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। इस स्केल पर 2.0 या 3.0 की तीव्रता का भूकंप हल्का होता है, जबकि 6 की तीव्रता का मतलब शक्तिशाली भूकंप होता है।

धरती चार परतों से बनी है- वैज्ञानिक डॉ. अरुण

वैज्ञानिक डॉ. अरुण बताते हैं कि धरती चार परतों से बनी है- इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मेंटल को लिथोस्फेयर कहा जाता है। लिथोस्फेयर 50 किलोमीटर की मोटी परत होती है। ये परत वर्गों में बंटी है और इन्हें टेक्टोनिकल प्लेट्स कहते हैं। जब इन टेक्टोनिकल प्लेटों में हलचल तेज होती है तो भूकंप आता है।

भूकंप आने पर क्या करें क्या न करें…
भूकंप आने के वक्त यदि आप घर से बाहर हैं तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों आदि से दूर रहें. जब तक झटके खत्म न हों, बाहर ही रहें. चलती गाड़ी में होने पर जल्द गाड़ी रोक लें और गाड़ी में ही बैठे रहें. ऐसे पुल या सड़क पर जाने से बचें, जिन्हें भूकंप से नुकसान पहुंचा हो.

भूकंप आने के वक्त यदि आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं. मज़बूत टेबल या किसी फर्नीचर के नीचे पनाह लें. टेबल न होने पर हाथ से चेहरे और सिर को ढक लें. घर के किसी कोने में चले जाएं और कांच, खिड़कियों, दरवाज़ों और दीवारों से दूर रहें. बिस्तर पर हैं तो लेटे रहें, तकिये से सिर ढक लें. आसपास भारी फर्नीचर हो तो उससे दूर रहें. लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचें, पेंडुलम की तरह हिलकर दीवार से टकरा सकती है लिफ्ट और बिजली जाने से भी रुक सकती है लिफ्ट. कमज़ोर सीढ़ियों का इस्तेमाल न करें, आमतौर पर इमारतों में बनी सीढ़ियां मज़बूत नहीं होतीं. झटके आने तक घर के अंदर ही रहें और झटके रुकने के बाद ही बाहर निकलें.

अगर आप भूकंप के दौरान मलबे के नीचे दब जाएं तो माचिस हरगिज़ न जलाएं क्‍योंकि इस दौरान गैस लीक होने का खतरा हो सकता है. हिलें नहीं, और धूल न उड़ाएं. किसी रूमाल या कपड़े से चेहरा ज़रूर ढक लें. किसी पाइप या दीवार को ठकठकाते रहें, ताकि बचाव दल आपको तलाश सके. यदि कोई सीटी उपलब्ध हो तो बजाते रहें. यदि कोई और जरिया न हो, तो चिल्लाते रहें, हालांकि चिल्लाने से धूल मुंह के भीतर जाने का खतरा रहता है, सो, सावधान रहें.

 

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