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सच बात—देश की बात

नेपाल में नमक 100 रुपये किलो….

china with nepalनई दिल्ली: भारत-नेपाल के बीच सीमाएं बंद होने का प्रभाव दोनों देशों के व्यापार पर पड़ रहा है। नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों के भारत में प्रवेश पर रोक लगा दी है। वहीं, भारतीय क्षेत्र से भी लोगों की आवाजाही बंद है। इसका असर ये हुआ है कि नेपाल में खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं। नमक का भाव 100 रुपये किलो और सरसों तेल की कीमत 250 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। सामान्य दिनों में इस हिमालयी देश और भारत के बीच करीब 4.21 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है। इसके अलावा, घोषित व्यापार से 10 गुना ज्यादा अघोषित व्यापार होता है। वहीं, सीमाएं बंद होने का प्रभाव भारतीय क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। नेपाल सीमा से सटे इलाकों में व्यापार ठंडा पड़ गया है। बिहार के मधुबनी जिले के सीमावर्ती इलाके जयनगर में कपड़ा व्यापारियों ने बताया कि सीमा बंद होने का प्रभाव यहां के बाजारों पर खासा देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में केवल जयनगर मंडी को ही 25-30 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। दोनों देशों के बीच सीमाओं के बंद होने और नेपाल की रोकटोक से मधेशियों के बीच खासी नाराजगी है। बताया जा रहा है कि ऐसे लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है, जो भारत में रहते हैं लेकिन उनके खेत नेपाल में हैं। सीमाओं के बंद होने से वे दोनों तरफ फंस गए हैं। वहीं, इससे उनकी खेती भी प्रभावित हुई है। बता दें कि, नेपाल में करीब 75 फीसदी उपजाऊ जमीन मधेशियों के पास ही है।

नेपाल की संसद में हिंदी पर रोक की तैयारी
वहीं, नेपाल और चीन की दोस्ती गहराती जा रही है और इसका असर नेपाल की सियासत पर दिख रहा है। दरअसल, नेपाल की संसद में हिंदी पर रोक की तैयारी की जा रही है, जिसको लेकर सांसदों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से पूछा है कि क्या ऐसा चीन के निर्देश पर किया जा रहा है? हालांकि, प्रधानमंत्री ओली सियासी बगावत से लगातार देश की जनता का ध्यान भटकाने में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने भारत के विरोध को हथियार बनाया है। दरअसल, वह नेपाल में एक नए राष्ट्रवाद का उदय करना चाह रहे हैं, ताकि उनकी पार्टी में उनके काम करने के तरीकों पर उठ रहे सवालों को खत्म किया जा सके। साथ ही विरोधियों को भी इसमें उलझाया जा सके।

नेपाल में बढ़ते भ्रष्टाचार और कोरोना संक्रमण से निपटने में नाकाम केपी ओली सरकार के खिलाफ पूरे नेपाल में जबरदस्त प्रदर्शन

नेपाल सरकार जहां चीन के उकसावे पर भारत के खिलाफ सीमा विवाद को हवा दे रही है वहीं नेपाल में बढ़ते भ्रष्टाचार और कोरोना संक्रमण से निपटने में नाकाम केपी ओली सरकार के खिलाफ पूरे नेपाल में जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं. नेपाल की जनता ओली सरकार से इस बात से भी नाराज है कि भ्रष्टाचार​ के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए वो भारत के साथ सीमा विवाद कर रही है. भारत नेपाल से सटे नेपाल में स्थित दारचुला में ओली सरकार के खिलाफ जहां रविवार को प्रदर्शन किए गए वहीं पिछले हफ्ते काठमांडू में भी हजारों की संख्या में छात्रों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर कोरोना वायरस महामारी की स्थिति से निपटने की अयोग्यता के लिए सरकार की आलोचना भी की.भारत-नेपाल सीमा पर स्थित दोनों देशों के बीच रोटी बेटी के संबध हैं. सीमा पर स्थित इन इलाकों के लोग एक दूसरे से काफी घुले मिले हुए हैं लेकिन जब से नेपाल ने एक नया मैप जारी कर धारचुला के इलाकों पर अपना दावा ठोका है उससे स्थानीय लोग नेपाल सरकार से काफी नाराज हैं. नेपाल में स्थित दारचुला के लोग नेपाल सरकार से इस बात से भी नाराज दिखे कि चीन, नेपाल के आतंरिक मामलों में लगातार हस्तक्षेप कर रहा है और प्रधानमंत्री ओली चीन सरकार के कठपुतली बन चुके हैं.

दारचुला में हो रहे प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी के मुताबिक, नेपाल सरकार भ्रष्ट्राचार में शामिल हैं लेकिन नेपाल सरकार इस पर कारवाई न कर चीन की कठपुतली बनी हुई है और चीन नेपाल के आतंरिक मामलों में दखलदांजी कर रहा है.नेपाल ने जब से भारत के साथ सीमा विवाद शुरू किया है, उसके बाद से पहली बार नेपाल के सेना प्रमुख जनरल पूरन सिंह थापा ने कालापानी के पास के इलाके का दौरा किया. इस महीने के 17 जून को नेपाली आर्मी चीफ के साथ नेपाल पुलिस के मुखिया शैलेन्द्र थापा ने भी भारत नेपाल सीमा का दौरा किया. ऐसा बताया जाता है कि इस दौरे के दौरान नेपाल ने दारचुला में भारत-नेपाल सीमा पर 6 नए बार्डर पोस्ट डुमलिंग, दारचुला, लेकम, लाली, मल्लिकार्जुन और जौलजीबी बनाए जाने का फैसला किया. भारत और नेपाल सीमा पर स्थित काली नदी दोनों देशों के सीमाओं को बांटती है. नेपाल ने भारत से सटते सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है. धारचुला से कुछ किलोमीटर की दूरी पर लिपुलेख पास है जो भारत और चीन सीमा को जोड़ता है.सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, काठमांडू में स्थित चीन की एम्बेसडर Hou Yanqi ने नेपाल को भारत के खिलाफ उकसाने में बड़ी भूमिका निभाई है. Hou Yanqi ने नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के अलावा नेपाल के कई बड़े नेताओं से मुलाकात कर उन पर भारत के खिलाफ बयानबाजी करने को कहा था. नेपाल में एम्बेसडर से पहले Hou Yanqi पाकिस्तान के चीनी दूतावास में तैनात थी. सुरक्षा एजेंसियो के मुताबिक, पाकिस्तान और चीन, नेपाल को उकसा कर भारत के खिलाफ एक और फ्रंट खोलने की साजिश में लगे हैं जिससे भारत की मुश्किलें बढ़ाई जा सकें.नेपाल के Unified Nepal National Front के नेता Phanindra Nepal पिछले कुछ महीनों में लगातार काठमांडू में स्थित पाक दूतावास के साथ साथ चीन दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात की थी. जब भारत चीन के साथ लद्धाख को लेकर बातचीत कर रहा है. उसी दौरान नेपाल का भारत के साथ सीमा विवाद को उठाना एक बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है.

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