Pages Navigation Menu

Breaking News

राम मंदिर के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिए 5 लाख 100 रुपये

 

भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू

किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करें, उन्हें गुमराह न करें; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नेपाल नक्शा विवाद ; प्रतिनिधि सभा से 11 सांसद रहे गैरहाजिर

nepal-china-indiaकाठमांडू नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने शनिवार को देश के राजनीतिक नक्शे को संशोधित करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। केपी ओली सरकार ने भले ही इस विधेयक को निचले सदन से पारित करा लिया हो लेकिन वह खुद ही पार्टी में इसको लेकर पूरा समर्थन जुटा नहीं पाए। आलम यह रहा है कि प्रतिनिधि सभा की इस महत्‍वपूर्ण बैठक से 11 सांसद गैरहाजिर रहे।प्रतिनिधि सभा की इस बैठक में 275 में से 258 सांसदों ने हिस्‍सा लिया। स्‍पीकर ऐसे मौकों पर वोट नहीं देते हैं और चार सांसद निलंबित चल रहे हैं। इसके अलावा 11 सांसदों ने इस बैठक में हिस्‍सा नहीं लिया। इसमें 4 सांसद सत्‍तारूढ़ नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी, तीन नेपाली कांग्रेस और 4 अन्‍य जनता समाजबादी पार्टी के हैं। ओली की पार्टी के जिन सांसदों ने हिस्‍सा नहीं लिया उनमें गोपाल बहादुर बाम, हरिबोल गजुरेल, धान बहादुर बुधा और शिव कुमार मंडल शामिल हैं। सभी 11 सांसदों ने कोई न कोई बहाना बनाकर बैठक में हिस्‍सा नहीं लिया।

विधेयक को नैशनल असेंबली में भेजा जाएगा
ओली सरकार ने 22 मई को इस विधेयक को संसद में सूचीबद्ध कराया था और विधि, न्याय एवं संसदीय कार्य मंत्री शिवामाया तुम्बाहाम्फे ने 24 मई को इसे सदन में पेश किया था। संसद ने नौ जून को आम सहमति से इस विधेयक के प्रस्ताव पर विचार करने पर सहमति जताई थी जिससे भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नए नक्शे को मंजूर किये जाने का रास्ता साफ हुआ। विधेयक को नैशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास नैशनल असेंबली में दो तिहाई बहुमत हैनैशनल असेंबली को विधेयक के प्रावधानों में संशोधन प्रस्ताव, अगर कोई हो तो, लाने के लिये सांसदों को 72 घंटे का वक्त देना होगा। नैशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद नए नक्शे का सभी आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल होगा। एक कैबिनेट बैठक में 18 मई को नए राजनीतिक नक्शे का अनुमोदन किया गया था। सरकार ने बुधवार को विशेषज्ञों की एक नौ सदस्यीय समिति बनाई थी जो इलाके से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य और साक्ष्यों को जुटाएगी।

विशेषज्ञों ने ओली सरकार के कदम पर उठाए सवाल
कूटनीतिज्ञों और विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि नक्शे को जब मंत्रिमंडल ने पहले ही मंजूर कर जारी कर दिया है तो फिर विशेषज्ञों के इस कार्यबल का गठन किस लिए किया गया? भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव दिखा जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया। नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि यह सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि यह सड़क पूरी तरह उसके भूभाग में स्थित है।नेपाली संसद के निचले सदन से विधेयक पारित होने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शनिवार को कहा था कि हम इस मामले में अपना पक्ष साफ कर चुके हैं। इस तरह का कृत्रिम विस्तार ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह कदम सीमा मुद्दे पर आपसी बातचीत और समझ के खिलाफ भी है।वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक डेली के संपादक प्रह्लाद रिजल ने कहा कि नेपाल द्वारा नक्शे में संशोधन और कालापानी क्षेत्र को अपने में शामिल करने का फैसला यह दिखाता है कि केपी ओली सरकार राष्ट्रवाद के नाम पर महज सस्ती लोकप्रियता पाना चाहती है, इसका उन्हें उल्टा परिणाम भुगतना पड़ सकता है। रिजल ने चेतावनी दी कि ओली सरकार का यह दांव नेपाल और भारत के बीच की भूमि को लेकर दोनों देशों के बीच नया और बड़ा विवाद का मुद्दा उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं जिनसे पता चलता है कि नेपाल ने यह कदम चीन के कहने पर उठाया है। अगर ऐसा है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का यह दांव उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पुष्प कमल दहल प्रचंड के बीच उत्पन्न हो रहे विवाद को लेकर भी हो सकता है। रिजल ने कहा, प्रधानमंत्री ओली को पार्टी में अपना आधिपत्य बनाए रखने के लिए स्वयं को अधिक राष्ट्रवादी साबित करना पड़ा।ओली सरकार को कोरोना वायरस प्रबंधन के मोर्चे पर भी खासी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर आवाजें उठ रही थीं कि सरकार इसे ठीक से नहीं संभाल सकती है। पर्याप्त जांच न होना, चिकित्सा उपकरणों की खरीद में अनियमितता और अन्य मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे हैं।

दि काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में कोरोना वायरस के अभी तक 5,760 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, इस जानलेवा वैश्विक महामारी की वजह से अभी तक नेपाल 19 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल में कोरोना वायरस के अधिकांश मामलों की पुष्टि मरणोपरांत हो पाई है। रिजल ने कहा कि यह देखते हुए कि नेपाल अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए 75 फीसदी आयात के लिए भारत पर निर्भर था। ऐसा लगता है कि नेपाल सरकार ने इस बारे में अपने लंबे समय के हितों को ध्यान में नहीं रखा। यह देखते हुए कि नेपाल अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 75 प्रतिशत आयात के लिए भारत पर निर्भर था, रिजल ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार ने इसके दीर्घकालिक निहितार्थ के बारे में नहीं सोचा होगा। ऐसे में यह स्थिति नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए उल्टी हो सकती है। रिजल ने कहा, अगर भारत के साथ हमारे संबंध बिगड़ते हैं तो यह स्थिति हमारे आर्थिक हितों के लिए प्रतिकूल साबित हो सकती है। हम डेढ़ दशक पहले तक दक्षिण की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों से सीख सकते हैं कि चीन मीठे शब्द बोलने के अलावा कुछ नहीं कर सकता है। चीन भारत का विकल्प नहीं बन सकता। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता के जरिए यह विवाद सुलझाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। हमें मसले को सुलझाने के लिए व्यापक और गहन बातचीत की जरूरत है और नेपाल को परिपक्व कूटनीति दिखाने की आवश्यकता है।वहीं, बाकी विशेषज्ञों से इतर नेपाल सेना के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर जनरल प्रेम सिंह बसन्यात ने कहा कि भारत द्वारा नेपाल की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान न करना दोनों देशों के बीच सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को खराब करने का मूल कारण रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को नेपाल के साथ रिश्ते को मित्रतापूर्ण और पड़ोसी भावना से बनाए रखना चाहिए।

बांग्लादेश जैसी न हो जाए नेपाल की हालत

नए नक्शे को लेकर सरकार के संविधान संशोधन का विरोध कर रही नेपाल की एक महिला सांसद को सदन में बोलने तक नहीं दिया गया है. उन्हें शनिवार को सदन से बाहर निकलने पर मजबूर किया गया तो बाहर आकर उन्होंने अपना आक्रोश व्यक्त किया.संसद की कार्यवाही शुरू होते ही बाहर निकलीं सांसद सरिता गिरी ने पत्रकारों से कहा कि इस सदन में एक महिला का अपमान किया गया है. उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई है. विपक्ष की बातों को अनसुना किया जा रहा है.गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि नेपाल में जो बर्ताव उनके साथ किया जा रहा है उससे नेपाल की हालत बांग्लादेश जैसी हो सकती है. महिलाओं को अपमान करने के कारण ही बांग्लादेश का जन्म हुआ था. उन्होंने कहा कि जब जातीय भावना में राष्ट्रीयता को मिलाया जाता है और किसी असहमत पक्ष के ऊपर आक्रमण किया जाता है तो इसका परिणाम राष्ट्रीय एकता के लिए ठीक नहीं निकलता है.सरिता गिरि शुरुआत से ही नेपाल सरकार के इस कदम का खुलकर विरोध कर रही हैं. सांसद ने खुलेआम संविधान संशोधन का विरोध किया था. सरकार द्वारा नए नक्शे को संविधान का हिस्सा बनाने के लिए लाए गए संविधान संशोधन प्रस्ताव पर अपना अलग से संशोधन प्रस्ताव डालते हुए जनता समाजवादी पार्टी की सांसद सरिता गिरि ने इसे खारिज करने की मांग की थी.

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *